कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि आज भी समाज के शोषित, वंचित और आम जनजीवन की सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करता है.
- गांधीवादी विचारों पर छात्रों ने रखा पक्ष, विशेषज्ञों ने साहित्य और इतिहास के वैश्विक प्रभाव पर किया गंभीर विमर्श.
- राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में सात कवियों ने बांधा समां, लिट्टी-चोखा और खीर के प्रीतिभोज के साथ हुआ भव्य समापन.
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय शनिवार को शिक्षा, साहित्य और संस्कृति के अद्भुत संगम का साक्षी बना. महाविद्यालय परिसर में इतिहास संगोष्ठी, प्रेमचंद दिवस और राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का ऐसा त्रिवेणी आयोजन हुआ, जिसमें विद्यार्थियों से लेकर प्राध्यापकों, साहित्यकारों और कवियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. प्रधानाचार्य प्रो. कृष्णकांत सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम ने पूरे दिन महाविद्यालय को बौद्धिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से सराबोर रखा.
गांधीवादी विचारों पर छात्रों ने रखा मजबूत पक्ष
कार्यक्रम के प्रथम चरण में स्नातकोत्तर इतिहास विभाग की ओर से गांधीवादी दर्शन पर विभागीय संगोष्ठी आयोजित की गई. 'सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह की समकालीन प्रासंगिकता' विषय पर आयोजित प्रतियोगितात्मक संगोष्ठी में लगभग तीन दर्जन छात्र-छात्राओं ने अपने शोधपरक और मौलिक विचार प्रस्तुत किए. विद्यार्थियों ने महात्मा गांधी के सिद्धांतों की वर्तमान समय में उपयोगिता पर प्रभावशाली तर्क रखे, जिसे उपस्थित शिक्षकों और अतिथियों ने सराहा.
वैश्विक साहित्य और इतिहास पर विशेषज्ञों ने रखा दृष्टिकोण
संगोष्ठी में इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र कुमार, प्रधानाचार्य प्रो. कृष्णकांत सिंह तथा मुख्य वक्ता डॉ. मृत्युंजय सिंह मौजूद रहे. अपने संबोधन में प्रो. कृष्णकांत सिंह ने विद्यार्थियों की शोध क्षमता और चिंतनशील दृष्टि की प्रशंसा की. वहीं डॉ. मृत्युंजय सिंह ने 'वैश्विक साहित्य व इतिहास के स्वरूप एवं प्रभाव' विषय पर विस्तार से चर्चा करते हुए छात्रों के जिज्ञासापूर्ण प्रश्नों के तार्किक और प्रमाणिक उत्तर दिए. कार्यक्रम का संचालन इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. नवीन शंकर पाठक ने किया.
प्रेमचंद दिवस पर साहित्य की प्रासंगिकता पर हुआ मंथन
दूसरे सत्र में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर 'प्रेमचंद दिवस' मनाया गया. वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि आज भी समाज के शोषित, वंचित और आम जनजीवन की सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करता है. मुख्य अतिथि डॉ. मृत्युंजय सिंह तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. पंकज कुमार चौधरी ने प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान और सामाजिक दृष्टि पर विस्तार से अपने विचार रखे.
राष्ट्रीय कवि सम्मेलन ने बांधा समां
कार्यक्रम के तीसरे चरण में 'माँ निर्मला देवी फाउंडेशन' के तत्वावधान में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन आयोजित हुआ. सात प्रतिष्ठित कवियों ने राष्ट्रभक्ति, प्रेम, सामाजिक सरोकार और व्यंग्य से जुड़ी रचनाओं की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. कवि प्रीतम ने राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रचनाओं से जोश भरा, जबकि चिन्मय प्रकाश झा ने प्रेम और संवेदना की कविताएं सुनाईं. कवि वशिष्ठ पाण्डेय ने हिंदी भाषा की स्थिति पर मार्मिक रचना प्रस्तुत कर श्रोताओं को सोचने पर मजबूर किया.
गीतों और व्यंग्य से गूंजता रहा सभागार
कवि नर्मदेश्वर उपाध्याय ने देशभक्ति और भावनात्मक गीतों से वातावरण को भावुक बना दिया. भगवान पांडेय ने संस्मरणों और गीतों से श्रोताओं का मनोरंजन किया. संजय सागर ने समकालीन व्यवस्था पर व्यंग्य के माध्यम से तीखा संदेश दिया, जबकि कवि आजमी की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने देर तक तालियां बटोरीं. काव्य सत्र का संचालन डॉ. पंकज कुमार चौधरी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. श्वेत प्रकाश ने दिया.
लिट्टी-चोखा और खीर के साथ हुआ आत्मीय समापन
कार्यक्रम के अंत में माँ निर्मला देवी फाउंडेशन के सचिव डॉ. रासबिहारी शर्मा के सौजन्य से सभी अतिथियों, कवियों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के लिए पारंपरिक प्रीतिभोज का आयोजन किया गया. लिट्टी-चोखा और खीर का स्वाद लेते हुए सभी ने आयोजन की सराहना की. राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ. आयोजकों ने इसे महाविद्यालय के इतिहास में शिक्षा, साहित्य और संस्कृति के समन्वय का एक यादगार आयोजन बताया.






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