सावन में उमड़ रही शिवभक्ति की आस्था, एक ही मंदिर में 12 ज्योतिर्लिंग और अष्टविनायक के दर्शन का मिल रहा दुर्लभ अवसर ..

प्रतिदिन विद्वान संस्कृत आचार्यों और वैदिक ब्राह्मणों की उपस्थिति में 51 हजार बिल्वपत्र, शमी पुष्प, कमल, दूर्वा और अन्य पूजन सामग्रियों से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भव्य रुद्राभिषेक कराया जा रहा है.





                             


  • 51 हजार बिल्वपत्रों से प्रतिदिन हो रहा वैदिक रुद्राभिषेक, बड़ी संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु
  • शीलनाथ महाराज बोले. शिव आराधना से दूर होते हैं कष्ट, पूरी होती हैं मनोकामनाएं

बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : सावन के पावन महीने में शहर का श्री आदिनाथ अखाड़ा स्थित नाथबाबा मंदिर शिवभक्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. यहां सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ भगवान भोलेनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रही है. मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्राभिषेक और भक्ति के माहौल से पूरी तरह गुंजायमान है.

महामंडलेश्वर श्री शीलनाथ महाराज ने बताया कि भगवान शिव करुणा, त्याग, वैराग्य और लोककल्याण के प्रतीक हैं. उन्होंने कहा कि सावन में श्रद्धा और विधि-विधान से की गई शिव आराधना से पापों का क्षय होता है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा भक्तों के जीवन के कष्ट और विघ्न दूर होकर उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

उन्होंने बताया कि नाथबाबा मंदिर देश का ऐसा अनूठा शिव मंदिर है, जहां भगवान शिव के सभी 12 ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं. प्रतिदिन विद्वान संस्कृत आचार्यों और वैदिक ब्राह्मणों की उपस्थिति में 51 हजार बिल्वपत्र, शमी पुष्प, कमल, दूर्वा और अन्य पूजन सामग्रियों से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भव्य रुद्राभिषेक कराया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेकर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं.

महामंडलेश्वर ने कहा कि मंदिर में स्थापित सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और पूजन से श्रद्धालुओं के कष्ट दूर होते हैं तथा उन्हें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है.

उन्होंने यह भी बताया कि पूरे बक्सर जिले में नाथबाबा मंदिर ही ऐसा शिवालय है, जहां भगवान श्रीगणेश के अष्टविनायक स्वरूप भी स्थापित हैं. अष्टविनायक के दर्शन और पूजन से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं तथा भक्तों के अभीष्ट कार्य सिद्ध होते हैं. इसलिए सावन में शिव आराधना के साथ श्रीगणेश की पूजा का भी विशेष महत्व है.

अंत में शीलनाथ महाराज ने श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा कि सावन केवल पूजा-पाठ का महीना नहीं, बल्कि सत्य, संयम, सेवा, साधना, स्वावलंबन और सदाचार को जीवन में अपनाने का अवसर भी है. उन्होंने कहा कि मन, वचन और कर्म की पवित्रता तथा समस्त प्राणियों के कल्याण की भावना ही भगवान शिव की सच्ची उपासना और सावन का वास्तविक संदेश है.













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