पुलिस अधीक्षक सह साइबर थाना प्रभारी समीर कुमार सिंह के अनुसार, पीड़ित ने पुलिस को सूचना दी थी कि ठगी करने वाला युवक अगले दिन दोबारा उसके कैफे पर आने वाला है.
- टेलीग्राम समूहों से मिलता था बैंक खातों का ‘टारगेट’, दुकानदारों के क्यूआर कोड से मंगाते थे ठगी की रकम
- 20 फीसदी कमीशन के बदले नकदी निकालकर दूसरे खातों में पहुंचाते थे पैसा, चार मोबाइल, लैपटॉप और नकदी बरामद
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : साइबर ठगी की रकम को खपाने के लिए क्यूआर कोड का सहारा लेने वाले एक नेटवर्क का बक्सर साइबर थाना पुलिस ने खुलासा किया है. पुलिस ने मामले में इटाढ़ी निवासी 30 वर्षीय चंदन कुमार, पिता धनराज वर्मा को गिरफ्तार किया है, जबकि उसके साथ शामिल एक नाबालिग को भी निरुद्ध किया गया है. दोनों के पास से चार मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 39 हजार 10 रुपये नकद, पासबुक, चिप और दो एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं. पूछताछ और जांच में आरोपियों के करीब 20 लाख रुपये के साइबर फ्रॉड की रकम के लेन-देन से जुड़े होने की बात सामने आई है.
80 हजार की ठगी ने खोला पूरा राज
मामले का खुलासा एक साइबर कैफे संचालक के साथ हुई करीब 80 हजार रुपये की साइबर ठगी के बाद हुआ. पुलिस अधीक्षक सह साइबर थाना प्रभारी समीर कुमार सिंह के अनुसार, पीड़ित ने पुलिस को सूचना दी थी कि ठगी करने वाला युवक अगले दिन दोबारा उसके कैफे पर आने वाला है. सूचना मिलते ही साइबर थाना पुलिस ने जाल बिछाया और इटाढ़ी निवासी चंदन कुमार को गिरफ्तार कर लिया.
निशानदेही पर नाबालिग तक पहुंची पुलिस
चंदन से पूछताछ के बाद पुलिस को नेटवर्क से जुड़े एक नाबालिग की जानकारी मिली. उसकी निशानदेही पर पुलिस ने नाबालिग को भी निरुद्ध कर लिया. चंदन के पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए, जबकि नाबालिग के पास से एक लैपटॉप, दो मोबाइल फोन, 39 हजार 10 रुपये नकद, एक पासबुक, एक चिप और दो एटीएम कार्ड जब्त किए गए.
टेलीग्राम ग्रुप से आता था ‘काम’
जांच में साइबर ठगी के इस पूरे खेल का तरीका सामने आया. पुलिस के अनुसार, आरोपी अलग-अलग टेलीग्राम समूहों से जुड़े थे. इन्हीं समूहों के जरिए उन्हें बैंक खातों की जानकारी और ठगी की रकम को इधर-उधर करने का काम मिलता था. इसके बाद आरोपी दुकानदारों के क्यूआर कोड हासिल कर साइबर ठगी की रकम उनके खातों में मंगाते थे.
कमीशन लेकर निकालते थे ठगी का पैसा
खातों में रकम पहुंचने के बाद आरोपियों का अगला काम शुरू होता था. दुकानदारों को नकद रुपये देकर उनके खातों में आई साइबर ठगी की रकम निकाल ली जाती थी. इसके बाद नकद राशि को टेलीग्राम समूहों के जरिए बताए गए दूसरे बैंक खातों में जमा कराया जाता था. इस पूरे लेन-देन के बदले आरोपियों को करीब 20 प्रतिशत कमीशन मिलता था.
बक्सर से रोहतास और आरा तक फैला नेटवर्क
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी सिर्फ बक्सर में ही साइबर ठगी की रकम का लेन-देन नहीं करते थे. रोहतास और आरा में भी इसी तरीके से ठगी की रकम को अलग-अलग खातों के जरिए इधर-उधर करने की जानकारी मिली है. अब तक की पूछताछ में करीब 20 लाख रुपये के साइबर फ्रॉड से जुड़े लेन-देन का पता चला है.
पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य सामान की जांच के साथ टेलीग्राम समूहों में जुड़े लोगों और इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी है. पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर साइबर ठगी की रकम को खपाने वाले नेटवर्क से जुड़े और भी लोगों के नाम सामने आ सकते हैं.






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