नेपाल की ओर पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और ढलान वाले पहाड़ों के कारण बाढ़ में ज्यादा नुकसान हुआ है. वहीं चीन की ओर का क्षेत्र अपेक्षाकृत सुरक्षित है.

 





                             


  • बक्सर के अहिरौली निवासी मोहन जी चौबे चीन के दारचेन में सुरक्षित, शनिवार से यात्रा के अगले चरण की शुरुआत
  • नेपाल-चीन सीमा का रास्ता तबाह, वापसी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर मंथन; 3 सितंबर तक लौटने का कार्यक्रम

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ से कैलाश मानसरोवर यात्रा का रास्ता प्रभावित होने के बाद बक्सर के अहिरौली निवासी मोहन जी चौबे अब सुरक्षित हैं और यात्रा के अगले चरण की शुरुआत कर चुके हैं. मोहन चौबे फिलहाल चीन के दारचेन में हैं, जहां से शनिवार को कैलाश मानसरोवर यात्रा आगे बढ़ेगी. उनके पुत्र अभिषेक चौबे ने बताया कि बाढ़ की घटना के समय उनके पिता इमीग्रेशन ऑफिस से निकल चुके थे और इसके बाद ही सीमा क्षेत्र में हालात बिगड़े.

अभिषेक चौबे ने बताया कि मोहन जी चौबे समेत यात्रा दल इमीग्रेशन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद शाम को काइराउंग के लिए निकल गया था. उनके वहां से निकलने के बाद भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ से नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में भारी तबाही हुई. काइराउंग काउंटी और रसुवागढ़ी को जोड़ने वाला मार्ग भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. इस कारण यात्रा और आगे की वापसी की योजना प्रभावित हुई, लेकिन चीन के दारचेन पहुंचने के बाद श्रद्धालु सुरक्षित हैं.



दारचेन में सुरक्षित, शनिवार से आगे बढ़ेगी यात्रा

अभिषेक चौबे के अनुसार फिलहाल मोहन चौबे दारचेन में हैं, जिसे श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित स्थान बताया गया है. शुक्रवार को वहां हवन सहित धार्मिक अनुष्ठान किए गए. इसके बाद शनिवार से कैलाश मानसरोवर यात्रा का अगला चरण शुरू होगा. दारचेन से श्रद्धालु मानसरोवर पहुंचेंगे और वहां परिक्रमा करेंगे. इसके बाद वापस लौटकर कैलाश पर्वत की यात्रा शुरू होगी.

चीन की ओर कोई परेशानी नहीं

अभिषेक चौबे ने बताया कि नेपाल की ओर पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और ढलान वाले पहाड़ों के कारण बाढ़ में ज्यादा नुकसान हुआ है. वहीं चीन की ओर का क्षेत्र अपेक्षाकृत सुरक्षित है. उन्होंने बताया कि उनके पिता फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित हैं और यात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी है.

नेपाल-चीन का रास्ता पूरी तरह क्षतिग्रस्त

काइराउंग काउंटी और रसुवागढ़ी के बीच नेपाल और चीन को जोड़ने वाला रास्ता बाढ़ में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है. नेपाल की ओर से रास्ते को बहाल करने के लिए करीब सात दिनों का समय लिया गया है. ऐसे में श्रद्धालुओं की वापसी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है.

अभिषेक चौबे ने बताया कि एक संभावना यह है कि चीन की ओर से श्रद्धालुओं को क्षतिग्रस्त हिस्से तक लाया जाए. इसके बाद करीब एक-दो किलोमीटर के क्षतिग्रस्त मार्ग को पार कराने के लिए राहत एवं बचाव दल की मदद से मानव श्रृंखला जैसी व्यवस्था कर नेपाल में प्रवेश कराया जा सकता है. नेपाल पहुंचने के बाद बस या कार के माध्यम से श्रद्धालुओं को आगे भेजने की व्यवस्था की जा सकती है.

3 सितंबर तक वापसी का कार्यक्रम

कैलाश मानसरोवर यात्रा करीब 15 दिनों की निर्धारित है. बाढ़ के कारण यात्रा मार्ग प्रभावित जरूर हुआ है, लेकिन अब यात्रा फिर से शुरू हो चुकी है. अभिषेक चौबे ने बताया कि दो दिनों बाद श्रद्धालुओं की वापसी को लेकर विस्तृत ब्रीफिंग की जाएगी. फिलहाल 3 सितंबर तक वापसी का कार्यक्रम निर्धारित है.

मोहन जी चौबे के परिजन लगातार उनके संपर्क में हैं और उनके सुरक्षित होने से परिवार ने राहत की सांस ली है. बाढ़ से पैदा हुई चुनौती के बावजूद अब मोहन चौबे समेत यात्रा दल पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ कैलाश मानसरोवर की यात्रा पूरी करने में जुटा है.