विधि की मर्यादा के पक्ष में उतरे युवा अधिवक्ता, BCI चेयरमैन पर लगाए आरोपों का किया खंडन ..

उन्होंने आरोपों को निराधार, तथ्यहीन और पूर्वाग्रह से प्रेरित बताते हुए कहा कि विधि के क्षेत्र से जुड़े किसी भी व्यक्ति के संबंध में सार्वजनिक विमर्श तथ्यों, प्रमाण और विधिक प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए.






                             


नालसार प्रकरण को लेकर कहा- असहमति का अधिकार है, लेकिन आरोपों के लिए प्रमाण जरूरी

बोले- व्यक्ति नहीं, तथ्य, कानून और संस्थागत गरिमा होनी चाहिए सार्वजनिक विमर्श का आधार

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) के चेयरमैन सह राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा को लेकर सामने आ रहे आरोपों पर व्यवहार न्यायालय के युवा अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता राघव कुमार पाण्डेय ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने आरोपों को निराधार, तथ्यहीन और पूर्वाग्रह से प्रेरित बताते हुए कहा कि विधि के क्षेत्र से जुड़े किसी भी व्यक्ति के संबंध में सार्वजनिक विमर्श तथ्यों, प्रमाण और विधिक प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए.

राघव कुमार पाण्डेय ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया देश के अधिवक्ता समुदाय और विधि-व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण वैधानिक संस्था है. ऐसी संस्था के शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति के निर्णयों पर सवाल उठाना या असहमति जताना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन असहमति को व्यक्तिगत आरोपों में बदलना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय का मूल्यांकन कानून और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए.

नालसार प्रकरण पर भी रखी बात

नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए पाण्डेय ने कहा कि दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भारत के मुख्य न्यायाधीश को आमंत्रित किए जाने के विरोध में कुछ छात्रों की ओर से पत्र लिखे जाने के बाद BCI द्वारा राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिए जाने की बात सामने आई. इसी घटनाक्रम को लेकर मनन कुमार मिश्रा पर विभिन्न आरोप लगाए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि पूरे मामले को भावनात्मक या राजनीतिक नजरिये से देखने के बजाय BCI के अधिकार-क्षेत्र, अधिवक्ता नामांकन से जुड़े नियमों और संस्थागत प्रक्रिया के संदर्भ में समझना चाहिए. किसी कार्रवाई की वैधता का अंतिम निर्धारण तथ्यों और कानून के आधार पर ही किया जा सकता है.

आरोप नहीं, प्रमाण बनें विमर्श का आधार

राघव कुमार पाण्डेय ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में किसी व्यक्ति पर आरोप लगाना आसान हो गया है, लेकिन आरोप को प्रमाणित करने के लिए साक्ष्य और विधिक कसौटी जरूरी है. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को महज आरोपों के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता.

उन्होंने मनन कुमार मिश्रा के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि उनका समर्थन किसी व्यक्ति-विशेष की प्रशंसा नहीं, बल्कि निष्पक्षता, प्रमाण और विधिक प्रक्रिया के सिद्धांतों के प्रति है. उन्होंने कहा कि किसी निर्णय से असहमति होने पर न्यायिक अथवा वैधानिक मंच का सहारा लेना ही उचित रास्ता है.

“असहमति हो सकती है, लेकिन मर्यादा नहीं टूटनी चाहिए”

पाण्डेय ने कहा कि लोकतंत्र की खूबसूरती ही असहमति में है, लेकिन आलोचना और व्यक्तिगत आक्षेप के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है. विधि का सम्मान केवल न्यायालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सार्वजनिक जीवन की भाषा और आचरण में भी दिखाई देना चाहिए.

उन्होंने अधिवक्ता समाज और आम नागरिकों से अपील की कि किसी भी विवाद पर राय बनाने से पहले तथ्यों की पूर्णता और प्रमाण की प्रामाणिकता की जांच करें. उन्होंने कहा कि व्यक्ति और पद बदलते रहते हैं, लेकिन संस्थाओं की गरिमा और विधि का शासन स्थायी मूल्य हैं. इसलिए सार्वजनिक विमर्श का आधार आरोप नहीं, बल्कि तथ्य और कानून होना चाहिए.













Post a Comment

0 Comments