दयाशंकर सिंह के निधन पर शोक संवेदनाओं का सिलसिला जारी, शिक्षा जगत ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि ..

कहा कि दयाशंकर सिंह का पूरा जीवन शिक्षा और समाज के लिए समर्पित रहा. उनका निधन व्यक्तिगत रूप से भी एक बड़ी क्षति है और शिक्षा जगत के लिए भी अपूरणीय नुकसान है.





                             


  • पांच दशक तक शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले प्रख्यात शिक्षाविद् के निधन से बक्सर में शोक
  • बक्सर हाई स्कूल से नवोदय विद्यालय समिति तक छोड़ी अमिट छाप, शुभचिंतकों ने बताया अपूरणीय क्षति

बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : प्रख्यात शिक्षाविद् एवं वरिष्ठ शिक्षा प्रशासक दयाशंकर सिंह के निधन से शिक्षा जगत और उनके शुभचिंतकों में गहरा शोक व्याप्त है. 20 अगस्त को उनके निधन के बाद से ही बक्सर समेत विभिन्न क्षेत्रों से शोक संवेदनाओं का सिलसिला जारी है. शिक्षाविदों, पूर्व सहयोगियों और शुभचिंतकों ने उनके निधन को शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है.

करीब पांच दशकों तक शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहे दयाशंकर सिंह ने अपने कार्यजीवन की शुरुआत बक्सर हाई स्कूल के प्रधानाचार्य के रूप में की थी. इसके बाद उन्होंने नवोदय विद्यालय समिति मुख्यालय, नई दिल्ली में संयुक्त आयुक्त तथा नवोदय विद्यालय समिति के पटना क्षेत्र के निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी निभाई. वे सीबीएसई निरीक्षण समिति के संयोजक और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् (NCTE) की पूर्वी क्षेत्रीय समिति के सदस्य भी रहे.

उनकी कार्यकुशलता, प्रभावशाली वक्तृत्व और शिक्षा के प्रति समर्पण को याद करते हुए राकेश कुमार ने कहा कि दयाशंकर सिंह का पूरा जीवन शिक्षा और समाज के लिए समर्पित रहा. उनका निधन व्यक्तिगत रूप से भी एक बड़ी क्षति है और शिक्षा जगत के लिए भी अपूरणीय नुकसान है.

अरविंद कुमार ने कहा कि दयाशंकर सिंह जैसे अनुभवी शिक्षाविद् का जाना एक युग के अवसान जैसा है. उन्होंने अपने कार्यों और विचारों से अनेक लोगों को दिशा दी. उनकी स्मृतियां हमेशा प्रेरणा देती रहेंगी.

रमेश कुमार ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि दयाशंकर सिंह का व्यक्तित्व बेहद प्रभावशाली और प्रेरणादायी था. शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता. ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में संबल दें.

वहीं मोहन कुमार ने कहा कि दयाशंकर सिंह केवल एक कुशल प्रशासक ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील मार्गदर्शक भी थे. उनके स्नेह और मार्गदर्शन से जुड़े लोगों के जीवन पर उनकी गहरी छाप रही. उनका निधन शिक्षा जगत के लिए बड़ी क्षति है.

परिवार की ओर से उनके नाती स्नेहिल ने भी गहरा दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि दयाशंकर सिंह उनके जीवन के सबसे प्रिय और महत्वपूर्ण व्यक्तियों में थे. उनका स्नेह, मार्गदर्शन और संस्कार परिवार के सदस्यों के जीवन की अमूल्य पूंजी रहे. उनके जाने से परिवार ने अपना स्नेहपूर्ण मार्गदर्शक और मजबूत आधार खो दिया है.

शोक संवेदनाओं में कहा गया कि दयाशंकर सिंह की कर्मनिष्ठा, शिक्षा के प्रति समर्पण और मार्गदर्शक व्यक्तित्व सदैव स्मृतियों में जीवित रहेगा. उनके योगदान को शिक्षा जगत लंबे समय तक श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करता रहेगा.

दिवंगत दयाशंकर सिंह को सभी ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की.













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