श्रीराम की खड़ाऊं सिर पर, आंखों में आंसू... राम-भरत मिलाप सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु ..

श्रीरामेश्वरनाथ मंदिर परिसर में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन राम-भरत मिलाप का ऐसा भावुक प्रसंग सुनाया गया कि कथा पंडाल श्रद्धालुओं के आंसुओं और जयघोष से गूंज उठा.





                             


श्रीरामेश्वरनाथ मंदिर में श्रीराम कथा के आठवें दिन उमड़ा आस्था का सैलाब

प्रेमाचार्य पीताम्बर महाराज ने त्याग, प्रेम और मर्यादा का सुनाया मार्मिक प्रसंग

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जय भोलेनाथ ग्रुप एवं पंडा समाज के तत्वावधान में श्रीरामेश्वरनाथ मंदिर परिसर में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन राम-भरत मिलाप का ऐसा भावुक प्रसंग सुनाया गया कि कथा पंडाल श्रद्धालुओं के आंसुओं और जयघोष से गूंज उठा. प्रेमाचार्य पीताम्बर महाराज ने भरत के त्याग, प्रेम और समर्पण का ऐसा चित्र खींचा कि श्रोता भाव-विभोर हो गए.

जब चित्रकूट में गले मिले दो भाई

महाराजश्री ने कहा कि भगवान श्रीराम के वनवास जाने और राजा दशरथ के निधन के बाद जब भरत अयोध्या लौटे और उन्हें पूरी घटना का पता चला तो वे गहरे दुख में डूब गए. उन्होंने श्रीराम को अयोध्या वापस लाने का संकल्प लिया और अयोध्यावासियों के साथ चित्रकूट पहुंच गए. वहां पहुंचते ही भरत प्रभु श्रीराम के चरणों में गिर पड़े, जिसके बाद श्रीराम ने उन्हें उठाकर हृदय से लगा लिया.

पिता के वचन को निभाने का संकल्प

कथा में बताया गया कि भरत ने श्रीराम से अयोध्या लौटकर राजपाट संभालने की विनती की, लेकिन श्रीराम ने पिता के वचन को सर्वोच्च मानते हुए चौदह वर्ष का वनवास पूरा करने का अपना संकल्प दोहराया. इसके बाद उन्होंने भरत को अपनी खड़ाऊं सौंप दी, जिसे भरत अयोध्या ले गए और उसी को राजसिंहासन पर स्थापित कर स्वयं सेवक भाव से राज्य का संचालन किया.

भजन से गूंज उठा कथा परिसर

जैसे ही कथा के दौरान "राम भक्त ले चला राम की निशानी, शीश पर खड़ाऊं, अंखियों में पानी" भजन गूंजा, पूरा कथा परिसर भक्तिरस में डूब गया. श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे और वातावरण "जय श्रीराम" के उद्घोष से गूंजता रहा.

बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु

कथा के दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे. आयोजन समिति के सदस्यों ने श्रद्धालुओं से कथा का रसास्वादन करते हुए धर्म और मर्यादा के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया.













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