बक्सर की गंगा को नालों के गंदे पानी से बचाने की उठी मांग, डीएम से वैज्ञानिक जांच और कार्रवाई की अपील ..

कहा गया है कि बक्सर में गंगा का धार्मिक, सामाजिक और पर्यावरणीय महत्व अत्यंत व्यापक है. वर्षभर बड़ी संख्या में लोग गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में नदी की स्वच्छता केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से भी सीधे जुड़ा मामला है.





                             


  • नालों के डिस्चार्ज प्वाइंट से लेकर श्मशान घाट तक निरीक्षण की मांग
  • BOD-COD समेत कई मानकों की जांच कराने को कहा

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नगर के नालों से निकलने वाले सीवेजयुक्त पानी और ठोस कचरे के गंगा नदी में पहुंचने की आशंका को लेकर सामाजिक संगठन "आपकी आवाज" ने गंभीर चिंता जताई है. संगठन के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. निसार अहमद ने शुक्रवार को जिलाधिकारी को आवेदन देकर गंगा प्रदूषण की स्थिति की जांच कराने और नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत प्रभावी कार्रवाई की मांग की है.

आवेदन में कहा गया है कि बक्सर में गंगा का धार्मिक, सामाजिक और पर्यावरणीय महत्व अत्यंत व्यापक है. वर्षभर बड़ी संख्या में लोग गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में नदी की स्वच्छता केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से भी सीधे जुड़ा मामला है.

नालों के डिस्चार्ज प्वाइंट की हो जांच

संगठन ने नगर के सभी प्रमुख नालों और उनके डिस्चार्ज प्वाइंट का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है. साथ ही यह पता लगाने को कहा गया है कि कहीं अनुपचारित सीवेज या ठोस कचरा सीधे गंगा में तो नहीं पहुंच रहा है.

BOD-COD समेत पानी की जांच की मांग

आवेदन में गंगा जल और नालों के पानी की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की गई है. इसके तहत BOD, COD, DO, TSS और Fecal Coliform जैसे मानकों की जांच कराने को कहा गया है, ताकि नदी में प्रदूषण की वास्तविक स्थिति सामने आ सके.

श्मशान घाट के अवशेषों पर भी सवाल

गंगा तट स्थित श्मशान घाट की व्यवस्था की भी पर्यावरणीय और स्वच्छता के नजरिये से जांच कराने की मांग की गई है. आवेदन में अंतिम संस्कार के बाद राख, अधजली लकड़ी और अन्य अवशेषों के नदी में जाने की स्थिति की जांच कर उनके उचित निस्तारण की व्यवस्था करने की अपील की गई है.

बढ़ती आबादी के साथ बढ़ी चुनौती

आवेदन में बक्सर नगर की वर्ष 2011 की 1,02,861 आबादी का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि करीब 15 वर्षों में आबादी और शहरी क्षेत्र के विस्तार को देखते हुए सीवेज एवं ठोस कचरा प्रबंधन की पर्याप्त व्यवस्था जरूरी है.

नमामि गंगे की योजनाओं की समीक्षा की मांग

"आपकी आवाज" ने नमामि गंगे के तहत चल रही और प्रस्तावित योजनाओं की समीक्षा करने तथा जहां कमी मिले, वहां सुधारात्मक कार्रवाई करने की मांग की है. साथ ही की गई कार्रवाई की Action Taken Report आवेदक को उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया गया है.

संगठन ने स्पष्ट किया है कि आवेदन किसी धार्मिक परंपरा या समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि गंगा नदी, पर्यावरण, स्वच्छता, जनस्वास्थ्य और व्यापक जनहित में दिया गया है.

आवेदन की प्रतिलिपि बक्सर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, BUIDCO, संबंधित नमामि गंगे अधिकारी, National Mission for Clean Ganga और अनुमंडल पदाधिकारी, बक्सर को भी भेजी गई है.













Post a Comment

0 Comments