आरोप लगाया कि सरकार भू-माफियाओं के हित में काम कर रही है. उनका कहना था कि जब क्रेता-विक्रेता, गवाह और पहचानकर्ता के हस्ताक्षर जैसी पारंपरिक प्रक्रिया नहीं रहेगी तो भविष्य में फर्जीवाड़े की आशंका बढ़ सकती है.

- -डीड राइटरों से लेकर जमीन मालिकों तक में नाराजगी
- -बोले- अंग्रेजी की डिजिटल डीड आम आदमी की समझ से बाहर
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जमीन की रजिस्ट्री में डिजिटल बदलाव अब बक्सर में विवाद का कारण बनता जा रहा है. ऑनलाइन और पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में डीड राइटरों, स्टैंप वेंडरों और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाते हुए कहा कि नई व्यवस्था में आम आदमी के लिए यह समझना मुश्किल हो गया है कि उसने कितनी जमीन, किसके नाम और किन शर्तों पर बेची है. विरोध करने वालों का दावा है कि पहले जहां प्रतिदिन 30 से 50 तक रजिस्ट्रियां होती थीं, वहीं नई व्यवस्था लागू होने के बाद संख्या घटकर एक-दो तक पहुंच गई है.
कागज की जगह मोबाइल, भरोसे पर सवाल
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि नई व्यवस्था में डीड मुख्य रूप से डिजिटल माध्यम से तैयार हो रही है. कई लोगों के लिए अंग्रेजी में तैयार दस्तावेज को समझना चुनौती बन गया है. ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे लोगों को आशंका है कि मोबाइल पर आने वाली जानकारी को बिना पूरी तरह समझे ही प्रक्रिया पूरी हो सकती है.
स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि पहले दस्तावेज पर क्रेता-विक्रेता, गवाह, पहचानकर्ता और कातिब की मौजूदगी तथा हस्ताक्षर से पूरी प्रक्रिया स्पष्ट रहती थी. अब पेपरलेस व्यवस्था में भौतिक दस्तावेज नहीं मिलने से भविष्य में जमीन संबंधी विवाद बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
पुराने कागज दिखाकर बोले- यही था भरोसा
विरोध में शामिल लोगों ने अपने पुराने जमीन के दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि दशकों पुराने कागजात आज भी मुहर, हस्ताक्षर और स्पष्ट विवरण के साथ सुरक्षित हैं. उनका तर्क है कि डिजिटल पीडीएफ के मुकाबले ऐसे दस्तावेज आम आदमी को ज्यादा भरोसेमंद लगते हैं.
डीड राइटर राहुल सिंह ने कहा कि नई व्यवस्था से स्टैंप वेंडरों और कातिबों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है. उनका आरोप है कि हजारों लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है और पूरी प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं.
कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने ऑनलाइन रजिस्ट्री व्यवस्था को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भू-माफियाओं के हित में काम कर रही है. उनका कहना था कि जब क्रेता-विक्रेता, गवाह और पहचानकर्ता के हस्ताक्षर जैसी पारंपरिक प्रक्रिया नहीं रहेगी तो भविष्य में फर्जीवाड़े की आशंका बढ़ सकती है.
पंकज उपाध्याय ने आशंका जताई कि कोई व्यक्ति दो कट्ठा जमीन की रजिस्ट्री कराने जाए और प्रक्रिया की खामियों का फायदा उठाकर उसकी ज्यादा जमीन का दस्तावेज तैयार हो जाए, तो बाद में उसे न्याय पाने के लिए लंबे समय तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं.
सरकार से पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग
विरोध कर रहे लोगों ने सरकार से ऑनलाइन रजिस्ट्री व्यवस्था की समीक्षा करने और आम जनता के हित में आवश्यक बदलाव करने की मांग की है. उनका कहना है कि तकनीक के नाम पर ऐसी व्यवस्था लागू नहीं होनी चाहिए, जिसे ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे लोग आसानी से समझ ही न सकें.
पंकज उपाध्याय ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने व्यवस्था वापस लेकर पुरानी प्रक्रिया बहाल नहीं की तो कांग्रेस और आम जनता के साथ मिलकर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा.






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