योगिया कांड पर नंद कुमार तिवारी का दो टूक: हत्या का बदला आगजनी नहीं, अपराधी कोई भी हो सजा जरूरी ..

कहना था कि कई बार मौके पर पुलिस मौजूद होने के बावजूद हालात ऐसे होते हैं कि बल प्रयोग करना आसान नहीं होता. पुलिस अगर सख्ती करती है तो उसके खिलाफ भी मुकदमे और कार्रवाई का दबाव बनता है. 





                             


- बोले- ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, कार और घर जलाने से क्या मृतक लौट आएगा? कानून हाथ में लेना भी उतना ही बड़ा अपराध

- जाति के चश्मे से मामला देखने पर बढ़ेगी खाई, सोशल मीडिया की गाली-गलौज और भड़काऊ टिप्पणियों पर भी हो कार्रवाई

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : पड़ोसी जिले रोहतास के योगिया में हत्या के बाद भड़के उपद्रव और आगजनी ने पूरे मामले को और ज्यादा गंभीर बना दिया है. अब सामाजिक कार्यकर्ता नंद कुमार तिवारी ने लाइव वीडियो के जरिए इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी बात रखी है. उन्होंने हत्या की कड़ी निंदा करते हुए दोषी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की, लेकिन साथ ही घटना के बाद हुई आगजनी और हिंसा पर भी सवाल खड़े किए. उनका साफ कहना था कि अपराध का जवाब दूसरे अपराध से नहीं दिया जा सकता.

‘हत्या गलत है तो आगजनी भी अपराध’

नंद कुमार तिवारी ने कहा कि अजीत तिवारी द्वारा की गई हत्या या जो भी आपराधिक कृत्य हुआ है, वह बेहद निंदनीय है. दोषी को कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए. लेकिन इसके बाद ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, कार, घर और गेहूं जलाने जैसी घटनाओं को किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने सवाल उठाया कि आग लगाने से क्या मृत व्यक्ति वापस आ जाएगा? हिंसा से केवल एक अपराध की जगह कई नए अपराध खड़े होते हैं.

पुलिस तमाशबीन नहीं, हालात में बंधी होती है

उन्होंने पुलिस की भूमिका को लेकर भी लोगों से संयम बरतने की अपील की. उनका कहना था कि कई बार मौके पर पुलिस मौजूद होने के बावजूद हालात ऐसे होते हैं कि बल प्रयोग करना आसान नहीं होता. पुलिस अगर सख्ती करती है तो उसके खिलाफ भी मुकदमे और कार्रवाई का दबाव बनता है. ऐसे में जनता को पुलिस के काम में बाधा डालने के बजाय कानून-व्यवस्था कायम रखने में सहयोग करना चाहिए.

सड़क हादसा हुआ तो सड़क जाम और आगजनी क्यों?

नंद कुमार तिवारी ने सड़क हादसों के बाद होने वाली हिंसक घटनाओं पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद सड़क जाम करना, वाहनों में आग लगाना या चालक के साथ मारपीट करना किसी समस्या का समाधान नहीं है. इससे आम लोगों को परेशानी होती है और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचता है. आखिरकार इसकी कीमत जनता के टैक्स के पैसे से ही चुकानी पड़ती है.

जाति के चश्मे से देखा तो मामला और बिगड़ेगा

उन्होंने लोगों से जोगिया की घटना को जातिगत रंग नहीं देने की अपील की. उनका कहना था कि गलत काम करने वाला किसी भी पक्ष या जाति का हो, गलत हमेशा गलत ही रहेगा. इंसानियत और कानून सबसे ऊपर होना चाहिए. सोशल मीडिया पर चल रही गाली-गलौज और जातिगत टिप्पणियों पर भी उन्होंने सरकार और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की.

‘दोनों तरफ के दोषियों पर चले कानून का डंडा’

नंद कुमार तिवारी ने प्रशासन से मांग की कि जोगिया मामले में बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई हो. हत्या के आरोपी हों या उपद्रव, आगजनी और हिंसा में शामिल लोग, कानून की नजर में सभी के लिए एक ही मापदंड होना चाहिए. उनका कहना था कि दोषियों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसी घटनाओं को रोकना मुश्किल होगा. अब जरूरत बदले की नहीं, बल्कि कानून के राज को मजबूत करने की है.













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