जेल में तैयार राखियों की बाजार में बढ़ी मांग, ‘मुक्ति’ ने बदली बंदियों के हुनर की तस्वीर ..

अलग-अलग रंग और डिजाइन में तैयार की गई राखियों की कीमत 15, 20, 25 और 30 रुपये रखी गई है. त्योहार को देखते हुए राखियों को आकर्षक रूप दिया गया है. इनकी बिक्री केंद्रीय कारा बक्सर के मुक्ति आउटलेट के अलावा आदर्श केंद्रीय कारा बेउर और खादी मॉल पटना में भी की जा रही है.





                             


15 से 30 रुपये तक कीमत, बक्सर के साथ पटना और बेउर में भी उपलब्ध हैं राखियां

कारा में प्रशिक्षण लेकर तैयार कर रहे आकर्षक राखियां, मेहनत के साथ आत्मविश्वास बढ़ाने पर 

बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर. रक्षाबंधन के बाजार में इस बार कुछ राखियां ऐसी भी हैं, जिनके पीछे किसी बड़े कारखाने की नहीं, बल्कि जेल की चारदीवारी के भीतर मेहनत कर रहे बंदियों की कहानी है. केंद्रीय कारा बक्सर में प्रशिक्षण के बाद बंदियों द्वारा तैयार की गई आकर्षक राखियां अब बाजार में उपलब्ध हैं. कारा महानिरीक्षक के निर्देश पर बंदियों को हुनरमंद बनाने के उद्देश्य से कारा निर्माणशाला एवं प्रशिक्षण के माध्यम से राखियां तैयार कराई जा रही हैं. जिला पदाधिकारी के निर्देश पर इन राखियों को ‘मुक्ति’ आउटलेट के जरिए आम लोगों तक पहुंचाया जा रहा है.

अलग-अलग डिजाइन में तैयार हुई राखियां

केंद्रीय कारा बक्सर में संसीमित 8 सजावार बंदी राखियां तैयार कर रहे हैं. अलग-अलग रंग और डिजाइन में तैयार की गई राखियों की कीमत 15, 20, 25 और 30 रुपये रखी गई है. त्योहार को देखते हुए राखियों को आकर्षक रूप दिया गया है. इनकी बिक्री केंद्रीय कारा बक्सर के मुक्ति आउटलेट के अलावा आदर्श केंद्रीय कारा बेउर और खादी मॉल पटना में भी की जा रही है.

हुनर के साथ नई जिंदगी की तैयारी

‘मुक्ति’ पहल का उद्देश्य बंदियों को केवल जेल की अवधि पूरी करने तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण देकर समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार करना है. राखियां तैयार करने का काम इसी सोच का हिस्सा है. बंदियों को काम सिखाने के साथ उनकी रचनात्मक क्षमता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. अपने हाथों से तैयार सामान को बाजार में बिकता देखना उनके लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला अनुभव बन रहा है.

राखियों से आगे भी बड़ा है दायरा

केंद्रीय कारा में बंदियों द्वारा सिर्फ राखियां ही नहीं बनाई जा रही हैं. ‘मुक्ति’ पहल के तहत कपड़े, साबुन, फिनाइल, तेल, मसाले, अगरबत्ती, सत्तू-बेसन, क्लीनर और फर्नीचर सहित कई उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. इन उत्पादों को कारा भवन के बाहरी परिसर में संचालित मुक्ति आउटलेट के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाया जा रहा है. इससे लोगों को बाजार से कम कीमत पर कई उपयोगी सामान उपलब्ध हो रहे हैं.

मेहनत को मिल रहा बाजार

बंदियों को प्रशिक्षण देने के पीछे एक अहम उद्देश्य उन्हें काम के प्रति जिम्मेदार बनाना और उनकी मेहनत को पहचान दिलाना भी है. जब उनके हाथों से तैयार सामान बाजार में पहुंचता है तो उन्हें अपनी क्षमता का अहसास होता है. इससे उनमें आत्मविश्वास पैदा करने और भविष्य के लिए सकारात्मक सोच विकसित करने में मदद मिलती है. ‘मुक्ति’ आउटलेट इस पूरी प्रक्रिया में बंदियों के हुनर और बाजार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभा रहा है.

रक्षाबंधन पर सकारात्मक संदेश

राखी का त्योहार भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है. ऐसे मौके पर बंदियों द्वारा तैयार राखियों का बाजार तक पहुंचना सुधार और पुनर्वास की सोच को भी सामने लाता है. यह पहल बताती है कि प्रशिक्षण और सही अवसर मिलने पर बंदियों की ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों से जोड़ा जा सकता है. इससे समाज में उनके प्रति सकारात्मक सोच बनाने में भी मदद मिलती है. 













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