संजय सिंह यादव को पांचवीं बार गुड सेमेरिटन अवॉर्ड मिला है. खास बात यह है कि इस बार उनके साथ उनके पुत्र ऋतिक कश्यप को भी गुड सेमेरिटन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है.
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| गुड सेमेरिटन का अवार्ड प्राप्त करते संजय सिंह यादव |
- पांचवीं बार सम्मानित हुए संजय सिंह यादव, पुत्र ऋतिक कश्यप को भी मिला पुरस्कार
- मां के नाम से चलाते हैं निशुल्क एंबुलेंस सेवा, आपात स्थिति में पटना से लखनऊ तक पहुंचाते हैं मरीज
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : सड़क दुर्घटना या किसी आपात स्थिति में जब अपनों का साथ भी मुश्किल हो जाता है, तब मदद के लिए आगे आने वाले लोगों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है. बक्सर के संजय सिंह यादव ऐसे ही लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने जरूरतमंदों की मदद को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया है. उनके इसी सेवा भाव को एक बार फिर सम्मान मिला है. संजय सिंह यादव को पांचवीं बार गुड सेमेरिटन अवॉर्ड मिला है. खास बात यह है कि इस बार उनके साथ उनके पुत्र ऋतिक कश्यप को भी गुड सेमेरिटन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है.
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| ऋतिक कुमार की अनुपस्थिति में उनका सम्मान प्राप्त करते उनके चचेरे भाई |
संजय सिंह यादव को अब तक चार बार जिले में गुड सेमेरिटन अवॉर्ड मिल चुका है. वहीं फरवरी 2026 में पटना के अधिवेशन भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान परिवहन मंत्री के हाथों भी उन्हें सम्मानित किया गया था. अब पांचवीं बार सम्मान मिलने के साथ उनके पुत्र का भी इस सम्मान में शामिल होना परिवार के सेवा संस्कार की कहानी बयां करता है.
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| ऋतिक कुमार |
पिता को सेवा करते देख बेटे ने भी चुनी मदद की राह
ऋतिक कश्यप बचपन से ही अपने पिता को जरूरतमंदों की सहायता करते देखते रहे हैं. पिता के सेवा कार्यों से प्रेरित होकर वह भी पिछले कुछ समय से लोगों की मदद में सक्रिय हैं. इस बार गुड सेमेरिटन अवॉर्ड में पिता के साथ बेटे का नाम जुड़ना उनके लिए भी गर्व का क्षण है.
मां के नाम से शुरु की निशुल्क एंबुलेंस सेवा
संजय सिंह यादव पिछले करीब तीन वर्षों से चार गाड़ियों का संचालन कर रहे हैं. इनमें एक एंबुलेंस है, जबकि अन्य लग्जरी वाहन हैं. उन्होंने अपनी मां के नाम से ‘मां माहेश्वरी निशुल्क एंबुलेंस सेवा’ शुरू की है. इसके माध्यम से करीब 20 किलोमीटर के दायरे में जरूरतमंद लोगों को निशुल्क सेवा उपलब्ध कराई जाती है.
जरूरत पड़ने पर यह एंबुलेंस बक्सर से बाहर भी मरीजों को लेकर जाती है. आपात परिस्थितियों में अब तक मरीजों को पटना, वाराणसी, कानपुर, लखनऊ, टाटा और रांची तक पहुंचाया जा चुका है.
पानी में डूबे युवक को ले जाने में हुई परेशानी तो लिया संकल्प
संजय सिंह यादव बताते हैं कि गांव में एक हादसे के दौरान पानी में डूबे एक युवक को अस्पताल तक पहुंचाने में काफी परेशानी हुई थी. उस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया. तभी उन्होंने तय किया कि आपात स्थिति में लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए कुछ करना चाहिए. सामाजिक सेवा की सोच उनके भीतर पहले से थी, लेकिन पिछले तीन वर्षों से उन्होंने इसे लगातार सेवा के रूप में आगे बढ़ाया.
पिता-पुत्र को मिला यह सम्मान सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उस सोच की पहचान है, जिसमें किसी अनजान व्यक्ति की मुश्किल घड़ी में मदद करना ही सबसे बड़ा धर्म माना जाता है.





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