कहा कि इंटर्नशिप विद्यार्थियों को कक्षा में अर्जित सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर देती है. खासकर इतिहास के विद्यार्थियों के लिए संग्रहालय और ऐतिहासिक स्थलों का प्रत्यक्ष भ्रमण बेहद उपयोगी है.

- इंटर्नशिप के अंतिम दिन 144 छात्र-छात्राओं ने जाना बक्सर की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत
- पुरातात्विक स्रोतों के महत्व और संरक्षण की जरूरत पर भी दी गई जानकारी
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय, बक्सर के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग में प्रणव चटर्जी महाविद्यालय, बक्सर के स्नातक इतिहास विभाग के सेमेस्टर-5 के छात्र-छात्राओं के लिए चल रहे इंटर्नशिप कार्यक्रम का रविवार को समीक्षा एवं समापन सत्र आयोजित किया गया. इंटर्नशिप के अंतिम दिन विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट एवं उनके द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षा के बाद सभी 144 छात्र-छात्राओं को सीताराम उपाध्याय संग्रहालय, बक्सर का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया.
संग्रहालय में विद्यार्थियों ने बक्सर के इतिहास से जुड़े पुरातात्विक स्रोतों, ऐतिहासिक धरोहरों और संरक्षित सामग्रियों को करीब से देखा. संग्रहालय की निदेशिका सुधा सिंह ने विद्यार्थियों को विभिन्न पुरातात्विक सामग्रियों एवं ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी. उन्होंने बताया कि किसी भी क्षेत्र के इतिहास को समझने में पुरातात्विक स्रोतों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. साथ ही उन्होंने ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला.
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) कृष्णा कान्त सिंह ने कहा कि इंटर्नशिप विद्यार्थियों को कक्षा में अर्जित सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर देती है. खासकर इतिहास के विद्यार्थियों के लिए संग्रहालय और ऐतिहासिक स्थलों का प्रत्यक्ष भ्रमण बेहद उपयोगी है. इससे विद्यार्थी ऐतिहासिक स्रोतों को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय उन्हें सामने देखकर और समझकर इतिहास की गहराई को महसूस कर पाते हैं. उन्होंने कहा कि महाविद्यालय की ओर से इस तरह के शैक्षणिक और शोधपरक कार्यक्रमों को आगे भी प्रोत्साहित किया जाएगा.
स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेन्द्र कुमार एवं डॉ. नवीन शंकर पाठक ने विद्यार्थियों को इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट कार्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अध्ययन और स्रोत आधारित अनुसंधान विद्यार्थियों में इतिहास के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक होता है. ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को शोध की बुनियादी समझ देने के साथ-साथ उन्हें स्थानीय इतिहास और विरासत से भी जोड़ते हैं.
इंटर्नशिप के समापन अवसर पर विभाग की ओर से सभी छात्र-छात्राओं को सक्रिय सहभागिता के लिए धन्यवाद दिया गया. साथ ही उनके उज्ज्वल भविष्य और आगामी शैक्षणिक सफलता की शुभकामनाएं दी गईं. कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक, कर्मचारी तथा इंटर्नशिप में शामिल कुल 144 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.





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