कहा कि जिन स्थानों पर प्रभु की कथा और धार्मिक आयोजन होते हैं, वहां का वातावरण पवित्र होने के साथ लोगों के जीवन में भक्ति, सद्भाव और संस्कार की भावना को मजबूत करता है.
- विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद, नौ दिनों तक गूंजता रहा राम नाम
- आचार्य पीतांबर जी महाराज ने दिया रामराज्य का संदेश, बोले- श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारना ही कथा की सार्थकता
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : श्रीरामेश्वरनाथ मंदिर परिसर में नौ दिनों से चल रही श्रीरामकथा मानस ज्ञान गंगा का बुधवार को भक्तिमय माहौल में समापन हुआ. अंतिम दिन कथा स्थल पर आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरा परिसर श्रद्धालुओं से भर गया. कथा श्रवण के बाद आयोजित विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग नौ दिनों तक कथा सुनने के लिए पहुंचते रहे.
समापन अवसर पर व्यासपीठ से आचार्य पीतांबर जी महाराज ने कहा कि जिन स्थानों पर प्रभु की कथा और धार्मिक आयोजन होते हैं, वहां का वातावरण पवित्र होने के साथ लोगों के जीवन में भक्ति, सद्भाव और संस्कार की भावना को मजबूत करता है. उन्होंने आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किए गए इंतजामों की सराहना करते हुए सभी सहयोगियों के प्रति आभार जताया.
अंतिम दिन आचार्य ने भरत मिलाप, सीता हरण, रावण वध और भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक जैसे भावपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया. प्रसंगों के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए. उन्होंने कहा कि कथा सुनने की सार्थकता तभी है, जब उसके संदेश को मनुष्य अपने जीवन और आचरण में उतारे. प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलकर ही समाज में प्रेम, भाईचारा, सौहार्द और सद्भाव स्थापित किया जा सकता है.
रामराज्य की अवधारणा समझाते हुए आचार्य पीतांबर जी महाराज ने कहा कि रामराज्य केवल एक शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि आदर्श समाज की कल्पना है. ऐसी व्यवस्था में चोरी, भ्रष्टाचार, झूठ और घृणा के लिए कोई स्थान नहीं होता, बल्कि प्रेम, विश्वास और सद्भाव का वातावरण रहता है. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को इन्हीं मूल्यों की सबसे अधिक आवश्यकता है.
उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम को जानने और अंत:करण में उनके दर्शन की अनुभूति के लिए पूर्ण गुरु की कृपा आवश्यक है. समापन अवसर पर आयोजन समिति के गणमान्य सदस्यों, श्रद्धालुओं और सनातन धर्मावलंबियों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. भंडारे में श्रद्धालुओं की भीड़ देर तक जुटी रही और पूरा मंदिर परिसर जय श्रीराम के जयघोष से गूंजता रहा.






.png)











0 Comments