गोकुल जलाशय को मिलेगी नई पहचान? खेल मंत्री के सामने रखा बक्सर में वाटर स्पोर्ट्स हब बनाने का प्रस्ताव ..

कहा कि यदि गोकुल जलाशय में तैराकी प्रशिक्षण केंद्र और जल क्रीड़ा गतिविधियां शुरू होती हैं तो जिले के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का बेहतर अवसर मिलेगा.





                             


-अंतरराष्ट्रीय तैराक कैप्टन बिजेंद्र सिंह ने खेल मंत्री श्रेयसी सिंह से की मुलाकात

खिलाड़ियों और पूर्व सैनिकों के मुद्दों पर हुई चर्चा

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिले के 24 किलोमीटर लंबे गोकुल जलाशय को आने वाले दिनों में तैराकी और वाटर स्पोर्ट्स का बड़ा केंद्र बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है. इस दिशा में अंतरराष्ट्रीय तैराक एवं बिहार राज्य पूर्व सैनिक संघ के जिलाध्यक्ष कैप्टन बिजेंद्र सिंह ने पटना में बिहार सरकार की खेल एवं उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह से मुलाकात कर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सौंपा. उन्होंने कहा कि यदि गोकुल जलाशय में तैराकी प्रशिक्षण केंद्र और जल क्रीड़ा गतिविधियां शुरू होती हैं तो जिले के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का बेहतर अवसर मिलेगा.

मंत्री से मुलाकात के दौरान कैप्टन बिजेंद्र सिंह ने कहा कि बक्सर में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है, लेकिन आधुनिक प्रशिक्षण और खेल संसाधनों के अभाव में उनकी क्षमता पूरी तरह सामने नहीं आ पाती. उन्होंने गोकुल जलाशय को तैराकी प्रशिक्षण का स्थायी केंद्र बनाने के साथ यहां विभिन्न जल क्रीड़ा प्रतियोगिताओं के आयोजन का भी सुझाव दिया.

बैठक में खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने, ग्रामीण क्षेत्रों में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने तथा पूर्व सैनिकों के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई. कैप्टन बिजेंद्र सिंह ने पूर्व सैनिकों की समस्याओं और उनके हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय भी मंत्री के समक्ष रखे.

खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुना और कहा कि खिलाड़ियों के हित में आने वाले प्रस्तावों पर सकारात्मक पहल की जाएगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि संबंधित विषयों पर आवश्यक स्तर पर विचार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

कैप्टन बिजेंद्र सिंह का खेल जगत में लंबा और गौरवशाली सफर रहा है. भारतीय सेना में सेवा के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 400 से अधिक पदक जीते हैं. सेवानिवृत्ति के बाद भी वे ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को निशुल्क तैराकी प्रशिक्षण देकर नई प्रतिभाओं को तैयार करने में जुटे हैं. साथ ही बिहार राज्य पूर्व सैनिक संघ के जिलाध्यक्ष के रूप में पूर्व सैनिकों के अधिकारों और उनके हितों की आवाज भी लगातार बुलंद कर रहे हैं.













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