अब तक धरातल पर कोई बड़ा काम शुरू नहीं हो सका है. उनका कहना है कि भवन लगातार कमजोर होता जा रहा है और यदि समय रहते मरम्मत या निर्माण नहीं कराया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.
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| रेलवे स्टेशन पोर्टिको में छत की हालत |

- जर्जर भवन बना खतरा, छत का बड़ा हिस्सा भरभराकर गिरा
- कायाकल्प की योजनाएं फाइलों में, यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर उठे सवाल
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : विश्व स्तरीय रेलवे स्टेशन बनने का इंतजार कर रहे बक्सर स्टेशन पर शुक्रवार को बड़ा हादसा टल गया. स्टेशन भवन की छत का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर गया. संयोग अच्छा रहा कि उस समय नीचे कोई यात्री या कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे जान-माल का नुकसान नहीं हुआ. घटना के बाद स्टेशन भवन की जर्जर स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं.
नाम नहीं छापने की शर्त पर रेलवे के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों ने बताया कि स्टेशन को आधुनिक और विश्व स्तरीय बनाने की घोषणा तो वर्षों पहले हुई थी, लेकिन अब तक धरातल पर कोई बड़ा काम शुरू नहीं हो सका है. उनका कहना है कि भवन लगातार कमजोर होता जा रहा है और यदि समय रहते मरम्मत या निर्माण नहीं कराया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.
रेल यात्रियों की सुरक्षा पहले सुनिश्चित हो
रेल यात्री और अधिवक्ता अश्विनी कुमार वर्मा ने कहा कि अंग्रेजों के समय का बना स्टेशन भवन अब काफी जर्जर हो चुका है. स्टेशन के कायाकल्प की योजना अभी तक अमल में नहीं आई है. उन्होंने रेल मंत्री और संबंधित अधिकारियों से मांग की कि नई परियोजना पूरी होने तक भवन की तत्काल मरम्मत कराई जाए ताकि यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.
रेल अस्पताल का भी बुरा हाल
सामाजिक कार्यकर्ता अरुण कुमार ने कहा कि रेलवे यात्रियों और अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा है. हाल ही में जर्जर रेलवे अस्पताल भवन का मामला भी सामने आया था. अस्पताल के लिए योजना स्वीकृत होने की चर्चा हुई, लेकिन आज भी भवन बदहाल और खतरनाक स्थिति में है.
130 करोड़ की योजना अब भी इंतजार में
बक्सर रेलवे स्टेशन को विश्व स्तरीय स्वरूप देने की योजना लंबे समय से चर्चा में है. स्टेशन परिसर के कायाकल्प के लिए 130 करोड़ रुपये की परियोजना भी प्रस्तावित है, लेकिन अब तक काम शुरू होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं. ऐसे में जर्जर भवन यात्रियों और रेलकर्मियों के लिए लगातार खतरा बना हुआ है.
रेलवे का पक्ष नहीं मिला
इस संबंध में रेलवे के आईओडब्ल्यू महेंद्र रजक से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनसे बात नहीं हो सकी.





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