परिसीमन या सियासी गणित? वार्ड 16 की मापी पर मुन्ना तिवारी ने नगर परिषद को घेरा, पूछा—आखिर किसके इशारे पर बदल रही सीमा?

पूछा कि आखिर वार्ड के परिसीमन की प्रक्रिया क्या है, इसे कौन तय कर रहा है और जनता को इसकी स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है. पूर्व विधायक ने नगर परिषद से पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की.

 





                           



  • पूर्व विधायक के तीखे सवाल—कमेटी किसने बनाई, जनसंख्या का आधार क्या और चौहद्दी तय करने का फॉर्मूला क्या? जनता के सामने प्रक्रिया रखने की मांग
  • मापी के बाद वार्डवासियों में खलबली, पार्षद प्रतिनिधि बोले—पता बदला तो जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से पहचान पत्र तक होगी परेशानी

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नगर परिषद के वार्ड संख्या 16 में हुई मापी के बाद परिसीमन की चर्चा ने अब सियासी तापमान बढ़ा दिया है. मंगलवार को बक्सर सदर के पूर्व विधायक संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी वार्ड 16 पहुंचे और स्थानीय लोगों के बीच बने भ्रम को लेकर नगर परिषद पर सवालों की बौछार कर दी. उन्होंने पूछा कि आखिर वार्ड के परिसीमन की प्रक्रिया क्या है, इसे कौन तय कर रहा है और जनता को इसकी स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है. पूर्व विधायक ने नगर परिषद से पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की.

मापी हुई, चर्चा चली और सियासत गरमाई

मामला उस समय तूल पकड़ गया, जब वार्ड में मापी करने पहुंचे नगर परिषद के कर्मियों से पूछताछ के दौरान लोगों को बताया गया कि वार्ड का नया परिसीमन होने वाला है. इसके बाद वार्ड में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया. लोगों के बीच सवाल उठने लगे कि क्या वार्ड की मौजूदा सीमा बदलने वाली है? यदि सीमा बदली तो किन इलाकों का स्वरूप बदलेगा? और इसका असर आम लोगों के दस्तावेजों पर कितना पड़ेगा?

मुन्ना तिवारी ने इसी मुद्दे को लेकर नगर परिषद की प्रक्रिया पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में नया परिसीमन किया जा रहा है तो जनता को इसकी पूरी जानकारी मिलनी चाहिए. इसके लिए उन्होंने चार सीधे सवाल नगर परिषद के सामने रखे.

पहला—क्या नए परिसीमन के लिए कोई कमेटी गठित की गई है? दूसरा—यदि कमेटी बनी है तो उसकी अध्यक्षता कौन कर रहा है और उसमें कितने सदस्य हैं? तीसरा—परिसीमन के लिए कितनी जनसंख्या को आधार बनाया गया है? चौथा—शहर की मैपिंग और वार्ड की चौहद्दी तय करने का आधार क्या रखा गया है?

‘जनता को अंधेरे में रखकर कैसे चलेगा काम?’

पूर्व विधायक ने कहा कि परिसीमन जैसी प्रक्रिया केवल नक्शे पर खींची जाने वाली सीमा का मामला नहीं है. इसका सीधा असर लोगों के पते और सरकारी दस्तावेजों पर पड़ सकता है. इसलिए नगर परिषद को मीडिया के माध्यम से तथ्य सामने रखकर जनता के बीच पैदा हुए भ्रम को खत्म करना चाहिए.

उन्होंने यह भी मांग की कि यदि परिसीमन की प्रक्रिया चल रही है तो उससे जुड़े नियम, आधार और प्रस्तावित सीमा की जानकारी सार्वजनिक की जाए. वहीं यदि कोई नया परिसीमन नहीं हो रहा है तो नगर परिषद को साफ-साफ इसकी जानकारी देनी चाहिए.

पार्षद प्रतिनिधि ने भी उठाई परेशानी

वार्ड 16 के पार्षद प्रतिनिधि विजय राजभर ने कहा कि मापी के बाद जब नगर परिषद के मापी करने वाले कर्मियों से सवाल किया गया तो परिसीमन की बात सामने आई. इसके बाद से लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है. उनका कहना है कि बार-बार लोगों को अपने जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र और पहचान पत्र में पता बदलवाने के लिए दौड़ना पड़ा तो आम जनता के सामने नई परेशानी खड़ी हो जाएगी.

मामले में कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन, कांग्रेस व्यवसायिक प्रकोष्ठ अध्यक्ष दौलत चंद गुप्ता, कामेश्वर पांडेय, गोपाल शर्मा, ई. रामप्रसन्न द्विवेदी, नीलू मिश्र, भृगुनाथ तिवारी, अभिषेक राय, मदन वर्मा सहित वार्ड के कई लोग मौजूद रहे.

अब वार्ड 16 की मापी से उठे सवालों का राजनीतिक असर साफ दिखाई देने लगा है. पूर्व विधायक के सवालों के बाद गेंद नगर परिषद के पाले में है. देखना यह है कि परिषद इन सवालों का जवाब देती है या वार्ड 16 का यह परिसीमन विवाद आगे और बड़ा सियासी मुद्दा बनता है.

















Post a Comment

0 Comments