कहा कि हिंदी हमारी संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना की संवाहक है. बदलते वैश्विक परिदृश्य में हिंदी का दायरा लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा के प्रयोग को लेकर गर्व की भावना रखनी चाहिए.

- रंगोली से पोस्टर तक दिखा हिंदी प्रेम, भाषण प्रतियोगिता में वैश्विक स्वरूप पर जमकर रखे विचार
- प्राचार्या ने कहा- हिंदी सिर्फ भाषा नहीं, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना की संवाहक
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : राजकीय डिग्री महाविद्यालय, ब्रह्मपुर में हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित एक दिवसीय कार्यक्रम में भाषा, संस्कृति और विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा का अनूठा संगम देखने को मिला. कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर वीणा कुमारी ने दीप प्रज्वलित कर की. इसके बाद पूरे परिसर में हिंदी की महत्ता, उसके बदलते स्वरूप और वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रभाव को लेकर विचारों का सिलसिला चला.
अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्या प्रोफेसर वीणा कुमारी ने कहा कि हिंदी हमारी संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना की संवाहक है. बदलते वैश्विक परिदृश्य में हिंदी का दायरा लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा के प्रयोग को लेकर गर्व की भावना रखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान और संस्कारों से भी जुड़ी होती है.
कार्यक्रम में डीके कॉलेज के भूगोल विभाग के डॉ. विनोद और राजनीति विज्ञान विभाग के डॉ. अब्दुल कैश ने मुख्य वक्ता के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया. दोनों वक्ताओं ने शिक्षा, तकनीक और रोजगार के क्षेत्र में हिंदी की बढ़ती उपयोगिता पर प्रकाश डाला. वक्ताओं ने विद्यार्थियों को हिंदी को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखने बल्कि आधुनिक तकनीक और व्यावसायिक क्षेत्रों में भी इसके प्रयोग की संभावनाओं को समझने के लिए प्रेरित किया.
रंगोली में उकेरी हिंदी की तस्वीर, भाषण में गूंजा वैश्विक स्वर
हिंदी दिवस को यादगार बनाने के लिए विद्यार्थियों ने विभिन्न रचनात्मक और बौद्धिक प्रतियोगिताओं में उत्साह के साथ भाग लिया. रंगोली प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के विविध रंगों को कलात्मक अंदाज में उकेरा. वहीं भाषण प्रतियोगिता में ‘हिंदी का वैश्विक स्वरूप’ जैसे विषयों पर विद्यार्थियों ने अपने विचार रखे.
पोस्टर प्रस्तुतिकरण में भी विद्यार्थियों की रचनात्मकता देखने को मिली. पोस्टरों के जरिए हिंदी के विकास, उसकी वैज्ञानिकता और बदलते दौर में उसकी उपयोगिता को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया. प्रतियोगिताओं ने न केवल विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच दिया, बल्कि हिंदी के प्रति उनके जुड़ाव को भी सामने रखा.
कार्यक्रम का सफल संयोजन हिंदी विभाग के डॉ. जितेंद्र कुमार और डॉ. मोतीचंद ने किया. मंच संचालन की जिम्मेदारी डॉ. आकांक्षा ने संभाली. आयोजन को सफल बनाने में बसंत सर, नवीन सर, अजीत सर, भाग्यश्री मैम, श्वेता मैम, प्रशांत सर, रितेश सर समेत अन्य कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका रही.
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ आयोजन का समापन हुआ. इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी सहायक प्राध्यापक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे.





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