फ्यूचर स्किल्स से ‘बियॉन्ड मार्क्स’ तक... राष्ट्रीय शैक्षिक कॉन्क्लेव में रोहित दुबे ने खींचा बदलती शिक्षा का खाका ..

कहा कि आने वाले दौर में सिर्फ तकनीकी ज्ञान विद्यार्थियों की सफलता की गारंटी नहीं होगा. तेजी से बदलती तकनीक और रोजगार की दुनिया के बीच सीखने की क्षमता, रचनात्मक सोच, संवाद कौशल, समस्या-समाधान, सहयोग, आत्मविश्वास और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण होगी.





                           

  • दो दिनों तक देश के कुलपतियों, शिक्षाविदों और स्कूल प्राचार्यों के साथ पैनल चर्चा में हुए शामिल
  • अंकों से आगे बढ़कर विद्यार्थियों में रचनात्मकता, संवाद, आत्मविश्वास और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने पर दिया जोर

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नोएडा में 11 और 12 सितंबर को आयोजित नेशनल एजुकेशनल कॉन्क्लेव में बक्सर के श्रीकृष्ण नगर कॉलोनी निवासी लेखक एवं वक्ता रोहित दुबे ने लगातार दो दिनों तक शिक्षा के बदलते स्वरूप और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी. देशभर से जुटे कुलपतियों, शिक्षाविदों और शिक्षण संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बीच पैनलिस्ट के रूप में उनकी सहभागिता ने शिक्षा में आ रहे बदलावों को लेकर महत्वपूर्ण विमर्श को सामने रखा.

कॉन्क्लेव के पहले दिन ‘इंडस्ट्री 5.0 के लिए भविष्य के कौशल’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में रोहित दुबे ने कहा कि आने वाले दौर में सिर्फ तकनीकी ज्ञान विद्यार्थियों की सफलता की गारंटी नहीं होगा. तेजी से बदलती तकनीक और रोजगार की दुनिया के बीच सीखने की क्षमता, रचनात्मक सोच, संवाद कौशल, समस्या-समाधान, सहयोग, आत्मविश्वास और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण होगी.

इस दौरान उन्होंने प्रो. (डॉ.) टंकेश्वर कुमार, कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा, महेंद्रगढ़, प्रो. (डॉ.) राजीव सूद, कुलपति, बाबा फरीद विश्वविद्यालय स्वास्थ्य विज्ञान, फरीदकोट, प्रो. (डॉ.) सतीश चंदर शर्मा, प्रति-कुलपति, बीबीडी-बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय, लखनऊ समेत शिक्षा जगत से जुड़े कई वरिष्ठ विशेषज्ञों के साथ मंच साझा किया.

‘बियॉन्ड मार्क्स’ पर भी हुई चर्चा

कॉन्क्लेव के दूसरे दिन ‘बियॉन्ड मार्क्स - वे कौशल जो वास्तव में मायने रखते हैं’ विषय पर पैनल चर्चा में भी रोहित दुबे ने सहभागिता की. उन्होंने कहा कि शिक्षा का मकसद सिर्फ परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना नहीं होना चाहिए. असली चुनौती विद्यार्थियों को जीवन, करियर और तेजी से बदलती दुनिया के लिए तैयार करने की है.

उन्होंने रचनात्मक सोच, प्रभावी संवाद, आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता, समस्या का समाधान खोजने और लगातार सीखते रहने की आदत को भविष्य की शिक्षा का अहम हिस्सा बताया. इस चर्चा में श्री शिवप्रकाशम रमन, निदेशक, इरोड हिंदू कल्वी निलयम, श्री अमरेंद्र पांडेय, संस्थापक निदेशक, जीके मेमोरियल स्कूल तथा डॉ. जसजीत सूद, प्रधानाचार्य, ओपीएस विद्या मंदिर, करनाल के साथ उन्होंने मंच साझा किया.

शिक्षा से करियर तक की तैयारी पर जोर

रोहित दुबे शिक्षा, युवा विकास, शिक्षा से करियर की ओर संक्रमण और करियर-तैयारी जैसे विषयों पर लेखन एवं वक्तव्य के माध्यम से सक्रिय हैं. राष्ट्रीय शैक्षिक कॉन्क्लेव में दो दिनों तक लगातार अलग-अलग पैनल चर्चाओं में शामिल होकर उन्होंने विश्वविद्यालयों और स्कूलों के वरिष्ठ शिक्षाविदों के साथ विचार साझा किए.

उनका जोर इस बात पर रहा कि आज के विद्यार्थियों को केवल अगली परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि आने वाले भविष्य के लिए तैयार करने की जरूरत है. बदलती तकनीक के दौर में शिक्षा व्यवस्था को भी ‘मार्क्स’ से आगे बढ़कर ऐसे कौशल पर ध्यान देना होगा, जो विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन और करियर की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाए.

















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