आईसीयू में गंभीर मरीजों की जिंदगी का ‘सहारा’ कौन? आयुष और हेम्योपैथिक चिकित्सकों की तैनाती पर उठे सवाल ..

वेंटिलेटर, मॉनिटर, डिफिब्रिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट जैसी सुविधाओं के बीच चिकित्सक की भूमिका केवल मशीन चलाने तक सीमित नहीं होती.





                           



  • वेंटिलेटर वाले आईसीयू में दो आयुर्वेदिक और दो होम्योपैथिक डॉक्टर प्रतिनियुक्त, आईएमए ने जताई आपत्ति
  • सिविल सर्जन बोले- आयुष डॉक्टर सिर्फ सहयोग करेंगे, सवाल- इमरजेंसी में फैसला कौन लेगा?

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : सदर अस्पताल के आईसीयू में वेंटिलेटर और जीवनरक्षक उपकरणों के बीच चार आयुष चिकित्सकों की तैनाती ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. 11 सितंबर को सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती की ओर से जारी आदेश में दो आयुर्वेदिक और दो होम्योपैथिक चिकित्सा पदाधिकारियों को अगले आदेश तक आईसीयू में कार्य करने का निर्देश दिया गया है. ऐसे में सवाल है कि गंभीर मरीजों की हालत अचानक बिगड़ने पर प्रशिक्षित चिकित्सकीय निगरानी और तत्काल निर्णय की व्यवस्था कैसे होगी.

आदेश के अनुसार डॉ. तेज नारायण सिंह, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. राजेश कुमार अवस्थी और डॉ. शम्भू नाथ को सदर अस्पताल के उपाधीक्षक के अधीन आईसीयू में योगदान देना है. आदेश की प्रतिलिपि जिला पदाधिकारी से लेकर स्वास्थ्य विभाग के सचिव तक भेजी गई है और सचिव से व्यवस्था के अनुमोदन का अनुरोध किया गया है.

आईसीयू में चूक की गुंजाइश कितनी?

आईसीयू में सांस की गंभीर परेशानी, हृदय संबंधी संकट, बेहोशी और गंभीर संक्रमण जैसे मामलों वाले मरीज भर्ती होते हैं. यहां मरीज की हालत पर लगातार नजर रखने के साथ जरूरत पड़ते ही चिकित्सकीय निर्णय लेना पड़ता है. वेंटिलेटर, मॉनिटर, डिफिब्रिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट जैसी सुविधाओं के बीच चिकित्सक की भूमिका केवल मशीन चलाने तक सीमित नहीं होती.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डॉ. रंगनाथ तिवारी ने आयुष चिकित्सकों की तैनाती पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि आईसीयू में एमबीबीएस चिकित्सक के साथ आईसीयू संचालन का प्रशिक्षण जरूरी है. गंभीर मरीजों की देखरेख में योग्यता और प्रशिक्षण से समझौता नहीं किया जाना चाहिए.

सिविल सर्जन बोले- इलाज एमबीबीएस डॉक्टर करेंगे

सिविल सर्जन डॉ. शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती का कहना है कि आयुष चिकित्सक मरीजों का मुख्य उपचार नहीं करेंगे. संबंधित चिकित्सक मरीज का इलाज और आईसीयू में उसकी देखरेख करेंगे, जबकि प्रतिनियुक्त आयुष चिकित्सक केवल सहयोग करेंगे. गंभीर मरीजों का विशेष उपचार एमबीबीएस चिकित्सक करेंगे और मशीनों के संचालन का कार्य मूर्छक चिकित्सक द्वारा किया जाएगा.

इसके बावजूद सरकारी आदेश में आयुष चिकित्सकों को आईसीयू में ‘कार्य करने’ के लिए प्रतिनियुक्त किए जाने से उनकी वास्तविक भूमिका को लेकर सवाल बना हुआ है. आपात स्थिति में अंतिम चिकित्सकीय निर्णय कौन लेगा? मरीज की हालत बिगड़ने पर प्रशिक्षित चिकित्सक कितनी देर में उपलब्ध होगा?

सुविधा शुरू हुई, अब सुरक्षा का सवाल

सदर अस्पताल में आईसीयू की सुविधा जिले के मरीजों के लिए बड़ी जरूरत है, लेकिन इसके संचालन के साथ जिम्मेदारी की स्पष्ट व्यवस्था भी जरूरी है. मरीज के परिजनों के लिए सबसे अहम बात यह है कि संकट की घड़ी में इलाज का निर्णय कौन लेगा और प्रशिक्षित चिकित्सकीय टीम कितनी तेजी से उपलब्ध होगी.

अब स्वास्थ्य विभाग के सामने आईसीयू को सिर्फ चालू रखने की नहीं, बल्कि उसकी चिकित्सकीय व्यवस्था को लेकर उठे सवालों का स्पष्ट जवाब देने की चुनौती है.
















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