लंबे समय से विवाद और कानूनी प्रक्रिया में उलझे 28 परिवारों के मामलों का आपसी सुलह के आधार पर निपटारा हुआ. ऐसे में राष्ट्रीय लोक अदालत सिर्फ मुकदमों के निपटारे का मंच नहीं बनी, बल्कि कई टूटते रिश्तों के बीच समझौते की राह खोलने का भी माध्यम बनी.

- राष्ट्रीय लोक अदालत में 9.81 करोड़ रुपये की समझौता राशि पर लगी मुहर, 790 बैंक मामलों का निपटारा
- 28 वैवाहिक विवाद सुलझे तो वर्षों से चल रही कानूनी जद्दोजहद थमी, 10 बेंचों पर हुई सुनवाई
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर के तत्वावधान में शनिवार, 12 सितंबर को आयोजित वर्ष 2026 की तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत में 1607 मामलों का सुलह-समझौते के आधार पर निपटारा कराया गया. जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय मनीष कुमार शुक्ला की अध्यक्षता में आयोजित लोक अदालत में कुल 10 बेंच गठित की गई थीं, जहां विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई करते हुए कुल 9 करोड़ 81 लाख 87 हजार 527 रुपये की समझौता राशि से जुड़े मामलों का निष्पादन कराया गया.
लोक अदालत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 28 वैवाहिक विवादों का समाधान रहा. लंबे समय से विवाद और कानूनी प्रक्रिया में उलझे 28 परिवारों के मामलों का आपसी सुलह के आधार पर निपटारा हुआ. ऐसे में राष्ट्रीय लोक अदालत सिर्फ मुकदमों के निपटारे का मंच नहीं बनी, बल्कि कई टूटते रिश्तों के बीच समझौते की राह खोलने का भी माध्यम बनी.
उद्घाटन में न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम का उद्घाटन जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय मनीष कुमार शुक्ला, जिला पदाधिकारी साहिला, पुलिस उपाधीक्षक तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव नेहा दयाल समेत अन्य मंचासीन पदाधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इस दौरान स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह श्रीनेत, विधिक सहायता प्रतिरक्षा प्रणाली के मुख्य अधिवक्ता विनय कुमार सिन्हा, जिला अधिवक्ता संघ के सचिव बिंदेश्वरी पांडेय सहित न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता और न्यायालय कर्मी मौजूद रहे.
दोनों पक्षों की सहमति से होता है विवादों का समाधान
अपने संबोधन में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय मनीष कुमार शुक्ला ने कहा कि लोक अदालत मुकदमों के त्वरित और सुलभ निपटारे का प्रभावी माध्यम है. इसमें किसी एक पक्ष की जीत या हार नहीं होती, बल्कि समझौते के माध्यम से दोनों पक्षों की जीत होती है. उन्होंने लोगों से अपने विवादों का समाधान लोक अदालत के माध्यम से कराने की अपील की.
न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ कम करने में अहम भूमिका
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव नेहा दयाल ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत को राष्ट्रीय पर्व की तरह आयोजित किया जाता है. न्यायालयों में वर्षों तक चलने वाले मामलों से पक्षकारों को राहत देने और न्यायालयों पर मुकदमों के बढ़ते बोझ को कम करने में लोक अदालत की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने कहा कि लोक अदालत जनता की अदालत है, जहां दोनों पक्षों की सहमति से विवाद का समाधान किया जाता है. समझौते के बाद अवार्ड तैयार कर दोनों पक्षों को उपलब्ध कराया जाता है और उसकी एक प्रति न्यायालय में सुरक्षित रखी जाती है.
790 बैंक मामलों में 9.12 करोड़ रुपये की समझौता राशि
राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न बैंकों से जुड़े 790 वसूली मामलों का निपटारा कराया गया. इन मामलों में कुल 9 करोड़ 12 लाख 39 हजार 204 रुपये की समझौता राशि पर सहमति बनी. इसके अलावा यातायात से जुड़े 319, आपराधिक 271, विद्युत 193, वैवाहिक 28 और एनआई एक्ट के पांच मामलों का भी निष्पादन किया गया.
पैनल अधिवक्ताओं और पारा विधिक स्वयंसेवकों ने संभाली जिम्मेदारी
लोक अदालत में न्यायिक पदाधिकारियों, पैनल अधिवक्ताओं, पारा विधिक स्वयंसेवकों और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कर्मचारियों ने मामलों के निष्पादन में सहयोग किया. आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में पक्षकार अपने-अपने मामलों के समाधान के लिए पहुंचे.
कई न्यायिक पदाधिकारी रहे उपस्थित
इस अवसर पर न्यायिक पदाधिकारी सोने लाल रजक, मानस कुमार वत्सल, कमल कुमार, भोला सिंह, महेश्वर नाथ पांडेय, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सचिन कुमार और दिवाकर राम समेत अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे. मंच संचालन न्यायिक दंडाधिकारी द्वितीय श्रेणी आंचल ने किया.





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