4 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक श्री रामलीला और श्रीकृष्णलीला का भव्य आयोजन किया जाएगा. वृंदावन-मथुरा की श्री बाल कृष्ण रासलीला रामलीला मंडल के स्वामी मोहन श्याम भारद्वाज के संचालन में लगातार 38वीं बार कलाकार भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की लीलाओं का मंचन करेंगे.
- वृंदावन-मथुरा की मंडली 38वीं बार करेगी श्रीकृष्णलीला और रामलीला का मंचन, धनुष यज्ञ से लेकर रावण वध तक दिखेंगे प्रमुख प्रसंग
- विजयादशमी पर दोपहर 2 बजे होगा रावण वध, 22 अक्टूबर की रात यमुना चौक पर निकलेगा भव्य भरत मिलाप
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : नगर के ऐतिहासिक रामलीला मैदान किला में एक बार फिर भक्ति, आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा. वर्ष 1941 से चली आ रही रामलीला की परंपरा के तहत श्री रामलीला समिति, बक्सर के तत्वावधान में 4 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक श्री रामलीला और श्रीकृष्णलीला का भव्य आयोजन किया जाएगा. वृंदावन-मथुरा की श्री बाल कृष्ण रासलीला रामलीला मंडल के स्वामी मोहन श्याम भारद्वाज के संचालन में लगातार 38वीं बार कलाकार भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की लीलाओं का मंचन करेंगे.
गणेश पूजन से शुरू होगी लीला, धनुष यज्ञ पर पहुंचेगा रोमांच
कार्यक्रम की शुरुआत 4 अक्टूबर की शाम गणेश पूजन, शिव विवाह और नारद मोह की लीला से होगी. इसके बाद 5 अक्टूबर को श्रीकृष्ण जन्म के साथ मनु-सतरूपा तपस्या, रावण जन्म और अत्याचार का मंचन होगा. 6 अक्टूबर को नंद महोत्सव और पूतना वध के साथ राम जन्म और नामकरण का प्रसंग दर्शाया जाएगा.
7 अक्टूबर को माखन चोरी लीला के साथ विश्वामित्र आगमन, ताड़का वध और मारीच-सुबाहु वध होगा. 8 अक्टूबर को ऊखल बंधन लीला तथा अहिल्या उद्धार, गंगा पार, नगर दर्शन और फुलवारी प्रसंग होंगे.
9 अक्टूबर को सीता स्वयंवर और धनुष यज्ञ का मंचन आकर्षण का केंद्र रहेगा. 10 अक्टूबर को लक्ष्मण-परशुराम संवाद और श्रीराम विवाह होगा. इसके बाद राम वनगमन, केवट प्रसंग, चित्रकूट वास, दशरथ मरण, भरत मिलाप, शूर्पणखा प्रसंग, सीता हरण और शबरी प्रसंग सहित रामायण के प्रमुख प्रसंग मंचित किए जाएंगे.
लंका दहन से रावण वध तक दिखेगा युद्ध का रोमांच
16 अक्टूबर को सुग्रीव मित्रता, वाली वध और सीता की खोज का मंचन होगा. 17 अक्टूबर को हनुमान जी का लंका में प्रवेश और लंकादहन दर्शकों में उत्साह भर देगा. 18 अक्टूबर को विभीषण शरणागति, सेतु स्थापना और अंगद-रावण संवाद होगा.
19 अक्टूबर को राम-रावण युद्ध की शुरुआत, लक्ष्मण शक्ति और कुंभकरण वध का मंचन होगा. इसके अगले दिन 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर दोपहर 2 बजे से विशेष कार्यक्रम होगा. मेघनाथ वध, अहिरावण प्रसंग और अंत में रावण वध के साथ अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया जाएगा.
भरत मिलाप के दिन निकलेगा भव्य रथ
21 अक्टूबर को राजा हरिश्चंद्र नाटक, 22 अक्टूबर को वीर अभिमन्यु नाटक के साथ रात 10 बजे से भरत मिलाप का आयोजन यमुना चौक पर किया जाएगा. 23 अक्टूबर को श्रीराम राज्याभिषेक के साथ आयोजन का समापन होगा.
भरत मिलाप के दिन श्रीराम का रथ प्रदुम्न जी के हाता से तथा भरत जी का रथ मल्लाह टोली स्थित हनुमान मंदिर से निकलेगा. दोनों रथों के नगर भ्रमण के बाद श्रद्धालु भव्य भरत मिलाप के साक्षी बनेंगे.
रामलीला समिति ने श्रद्धालुओं से बड़ी संख्या में पहुंचकर इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन को सफल बनाने की अपील की है. आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, मर्यादा, भक्ति और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का माध्यम भी है.






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