सरोज राजभर की याचिका में रेलवे ओवरब्रिज को लेकर क्या-क्या मांगें? गुमटी खुलने के बाद अब इन 2 मुद्दों पर हाईकोर्ट में सुनवाई बाकी ..

याचिका में धंसे हुए पिलर और रेलवे ओवरब्रिज की समयबद्ध मरम्मत कराने की मांग की गई थी. साथ ही संबंधित पक्षों को मरम्मत पूरी करने की समय-सीमा बताने और कोर्ट के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट/एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देने की मांग की गई थी.





                           



  • धंसे पिलर की समयबद्ध मरम्मत और तकनीकी विशेषज्ञ समिति से जांच की मांग, जिम्मेदारी तय करने की भी याचिका में गुहार
  • हाईकोर्ट ने प्रतिवादी 1 से 7 से 4 सप्ताह में मांगा जवाब, 27 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नगर के पूर्वी रेलवे क्रॉसिंग और नवनिर्मित रेलवे ओवरब्रिज को लेकर सरोज कुमार राजभर की ओर से पटना हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में कई मांगें रखी गई थीं. इनमें बंद रेलवे क्रॉसिंग को आम लोगों के लिए खोलने के साथ धंसे हुए पिलर और ओवरब्रिज की समयबद्ध मरम्मत, तकनीकी विशेषज्ञ समिति से जांच और पिलर के समय से पहले क्षतिग्रस्त होने की जिम्मेदारी तय करने की मांग शामिल थी. 15 सितंबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने दर्ज किया कि रेलवे क्रॉसिंग अब आम जनता के लिए खोल दी गई है. वहीं मरम्मत की समय-सीमा और तकनीकी जांच से जुड़ी मांगें अभी बाकी हैं.

याचिका में पहली मांग- गुमटी को आम लोगों के लिए खोलें

C.W.J.C. No. 13634 of 2026 में सरोज राजभर ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट से बक्सर ईस्ट रेलवे क्रॉसिंग L.C. No. 70-B को आम जनता के लिए तत्काल खोलने की मांग की थी. याचिका में कहा गया था कि जब तक नवनिर्मित रेलवे ओवरब्रिज पूरी तरह ठीक, सुरक्षित और आम लोगों के इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं हो जाता, तब तक रेलवे क्रॉसिंग को चालू रखा जाए.

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राजीव रंजन कुमार पांडेय ने बताया कि यह मांग अब पूरी हो चुकी है, क्योंकि रेलवे क्रॉसिंग आम जनता के लिए खोल दी गई है. कोर्ट ने भी अपने आदेश में इस तथ्य को दर्ज किया.

दूसरी मांग- धंसे पिलर और ROB की मरम्मत कब तक होगी, बताएं

याचिका में धंसे हुए पिलर और रेलवे ओवरब्रिज की समयबद्ध मरम्मत कराने की मांग की गई थी. साथ ही संबंधित पक्षों को मरम्मत पूरी करने की समय-सीमा बताने और कोर्ट के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट/एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देने की मांग की गई थी.

याचिकाकर्ता की ओर से सुनवाई में स्पष्ट किया गया कि यह मांग अभी भी लंबित है.

तीसरी मांग- विशेषज्ञ समिति करे ओवरब्रिज की जांच

याचिका में रेलवे ओवरब्रिज के निरीक्षण के लिए तकनीकी/विशेषज्ञ समिति गठित या प्रतिनियुक्त करने की मांग भी की गई थी. याचिका के अनुसार समिति ओवरब्रिज की स्थिति की जांच करे और पिलर के समय से पहले धंसने के मामले में जिम्मेदारी और जवाबदेही तय करे.

यानी याचिका में सिर्फ मरम्मत कराने की मांग नहीं, बल्कि यह पता लगाने की भी मांग की गई है कि पिलर इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त क्यों हुआ और इसके लिए जवाबदेही किसकी बनती है.

चौथी मांग- प्रशासनिक निष्क्रियता की जांच

याचिका में रेलवे प्रशासन की कथित निष्क्रियता की जांच कराने की मांग भी रखी गई थी. इसमें कहा गया था कि ओवरब्रिज के धंसने और रेलवे क्रॉसिंग बंद होने से बक्सर शहर और आसपास के हजारों लोगों को आवागमन, सुरक्षा और आजीविका से जुड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.

याचिका में इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(d) और 21 से जुड़े अधिकारों के संदर्भ में भी रखा गया.

कौन-कौन हैं प्रतिवादी?

मूल हाईकोर्ट आदेश में मामला सरोज कुमार राजभर बनाम द यूनियन ऑफ इंडिया एंड अदर्स दर्ज है. आदेश में प्रतिवादियों को Respondent Nos. 1 to 7 के रूप में संबोधित किया गया है. अधिकारियों में जिला स्तरीय अधिकारी समेत  रेलवे के अधिकारी शामिल हैं, इसलिए बिना मूल याचिका के नामों की पुष्टि किए किसी व्यक्ति या अधिकारी का नाम जोड़ना उचित नहीं होगा.

मामले में केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल दीपक कुमार, सीनियर सीजीसी तथा राज्य सरकार की ओर से एएजी-02 डॉ. मौर्य विजय चंद्र और एसी टू एजी मोहित अग्रवाल उपस्थित रहे. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजीव रंजन कुमार पांडेय ने पक्ष रखा.

हाईकोर्ट ने फिलहाल क्या किया?

मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की खंडपीठ ने 15 सितंबर की सुनवाई में प्रार्थना 1(b) और 1(c) से संबंधित मुद्दों पर प्रतिवादी संख्या 1 से 7 को चार सप्ताह में काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है. इसके बाद याचिकाकर्ता को दो सप्ताह में rejoinder दाखिल करने का अवसर दिया गया है.

मामले को अगली सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध किया गया है.

यानी गुमटी खुलने की मांग पूरी हो चुकी है, लेकिन ROB की मरम्मत की समय-सीमा और तकनीकी जांच जैसे मुद्दों पर अब संबंधित पक्षों के जवाब का इंतजार है.
















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