जब बक्सर की सड़कों पर खिंचेगा भगवान वामन का रथ, 23 सितंबर को आस्था का सैलाब ..

भगवान वामन चेतना मंच की ओर से 23 सितंबर की सुबह 8 बजे भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी. रामेश्वरनाथ मंदिर, रामरेखाघाट से शुरू होने वाली यह यात्रा वामन मंदिर तक जाएगी. रथ की रज्जु थामकर श्रद्धालु स्वयं भगवान वामन को मंदिर तक ले जाएंगे.

 





                             



- रामरेखाघाट से वामन मंदिर तक निकलेगी भव्य रथयात्रा, रज्जु थामकर श्रद्धालु करेंगे भगवान वामन का जयघोष
- पुरी की तर्ज पर दिखेगा सामूहिक आस्था का अद्भुत नजारा, धार्मिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की पहल

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : भगवान वामन के प्राकट्य दिवस वामन द्वादशी पर इस बार बक्सर की धरती पर आस्था का ऐसा नजारा देखने को मिलेगा, जिसमें श्रद्धा की रज्जु से भगवान वामन का रथ खिंचेगा और सड़कों पर जयघोष गूंजेगा. भगवान वामन चेतना मंच की ओर से 23 सितंबर की सुबह 8 बजे भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी. रामेश्वरनाथ मंदिर, रामरेखाघाट से शुरू होने वाली यह यात्रा वामन मंदिर तक जाएगी. रथ की रज्जु थामकर श्रद्धालु स्वयं भगवान वामन को मंदिर तक ले जाएंगे.

एक रज्जु, हजारों हाथ और एक आस्था

रथयात्रा का सबसे आकर्षक दृश्य वह होगा, जब श्रद्धालु एक साथ रथ की रज्जु थामेंगे. आयोजकों का कहना है कि यह केवल रथ खींचने की परंपरा नहीं, बल्कि सामूहिक आस्था, सामाजिक एकता और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रतीक होगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना को देखते हुए आयोजन को लेकर अभी से उत्साह का माहौल है.

बक्सर में दिखेगी पुरी की रथयात्रा जैसी छटा

भगवान वामन चेतना मंच के अनुसार, पुरी की भगवान जगन्नाथ रथयात्रा में जिस तरह लाखों श्रद्धालु भगवान के रथ की रज्जु थामकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं, उसी भाव और परंपरा की झलक बक्सर के वामनाश्रम में दिखाई देगी. भगवान वामन की रथयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के जयघोष से रामरेखाघाट से वामन मंदिर तक का मार्ग भक्तिमय होने की उम्मीद है.

धर्म के साथ बक्सर की पहचान का उत्सव

रथयात्रा को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा गया है. आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य बक्सर की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देना तथा नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ना भी है. बक्सर की धरती सदियों से धर्म, अध्यात्म और संस्कृति की परंपराओं की वाहक रही है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से इन्हीं परंपराओं को सार्वजनिक जीवन में फिर से जीवंत करने का प्रयास किया जा रहा है.

राघव पाण्डेय ने कहा- रथ की रज्जु बनेगी एकता का प्रतीक

रथयात्रा में शामिल होने के लिए भगवान वामन चेतना मंच के सदस्यों ने अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता राघव कुमार पाण्डेय को आमंत्रित किया. उन्होंने कहा कि वामन द्वादशी पर आयोजित यह रथयात्रा बक्सर की धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा देने वाली पहल है. जब समाज के लोग एक साथ भगवान वामन के रथ की रज्जु थामेंगे, तो यह सामूहिक श्रद्धा और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक बनेगा.

उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन तभी व्यापक अर्थ ग्रहण करते हैं, जब उनमें समाज की सहभागिता हो. रथयात्रा लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ने के साथ आपसी भाईचारे और एकता का संदेश भी देगी.

डॉ. सत्येंद्र ओझा को भी मिला आमंत्रण

इसी क्रम में कांग्रेस नेता डॉ. सत्येंद्र ओझा को भी भगवान वामन चेतना मंच की ओर से रथयात्रा में शामिल होने का सादर आमंत्रण दिया गया. डॉ. ओझा ने आमंत्रण स्वीकार करते हुए आयोजन के प्रति शुभकामनाएं दीं और इसकी सफलता की कामना की. उन्होंने कहा कि बक्सर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाले आयोजनों में समाज की व्यापक भागीदारी आवश्यक है.

किसी एक का नहीं, पूरे बक्सर का उत्सव

आयोजकों ने कहा कि यह रथयात्रा किसी व्यक्ति या संस्था विशेष का आयोजन नहीं, बल्कि बक्सर की सनातन धार्मिक चेतना, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का सामूहिक उत्सव है. मंच की कोशिश है कि 23 सितंबर को रथयात्रा में हर वर्ग और हर उम्र के श्रद्धालु सहभागी बनें.

जयघोष के साथ रथयात्रा में शामिल होने की अपील

भगवान वामन चेतना मंच ने जिलेवासियों और श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में रथयात्रा में शामिल होने की अपील की है. आयोजकों ने श्रद्धालुओं से सामूहिक रूप से भगवान वामन का जयघोष करते हुए रथ की रज्जु थामने और इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनने का आह्वान किया है. अब 23 सितंबर को बक्सर की सड़कों पर यह देखना खास होगा कि भगवान वामन के रथ की रज्जु कितने हाथ थामते हैं और उनकी जय-जयकार से शहर कितना गूंजता है.












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