सरोज कुमार राजभर की याचिका पर कोर्ट ने संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. साथ ही आरओबी का निरीक्षण कराने और इसके क्षतिग्रस्त होने की वजह तथा जिम्मेदारी तय करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञ समिति गठित करने की जरूरत पर जोर दिया है.

- गुमटी बंद होने से लेकर उद्घाटन के बाद पुल धंसने तक... अब तकनीकी जांच से तय होगी जिम्मेदारी
- मरम्मत में देरी पर कोर्ट ने मांगा जवाब, रेलवे से निरीक्षण और विशेषज्ञ समिति गठित करने पर जोर
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : इटाढ़ी रेलवे क्रॉसिंग के पास बने रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) की मरम्मत में हो रही देरी अब पटना हाईकोर्ट तक पहुंच गई है. आरओबी की धीमी रफ्तार से चल रही मरम्मत और इससे हजारों लोगों को हो रही परेशानी के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. सरोज कुमार राजभर की याचिका पर कोर्ट ने संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. साथ ही आरओबी का निरीक्षण कराने और इसके क्षतिग्रस्त होने की वजह तथा जिम्मेदारी तय करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञ समिति गठित करने की जरूरत पर जोर दिया है.
मामला सिर्फ एक पुल के क्षतिग्रस्त होने का नहीं है. इसके साथ इटाढ़ी रेलवे गुमटी बंद होने से पैदा हुई परेशानी भी जुड़ी है. याचिका पर सुनवाई के दौरान आवेदक सरोज कुमार राजभर की ओर से अधिवक्ता राजीव रंजन पांडेय ने कोर्ट को बताया कि आरओबी के क्षतिग्रस्त होने और गुमटी बंद किए जाने से बक्सर शहर और आसपास के इलाकों के हजारों लोगों को आवागमन, सुरक्षा और आजीविका से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा.
उद्घाटन के बाद ही उठे सवाल
आरओबी के उद्घाटन के कुछ ही समय बाद इसके एक हिस्से में गंभीर तकनीकी समस्या सामने आने से निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठे थे. इसके बाद पुल पर यातायात रोकना पड़ा. लंबे समय तक पुल बंद रहने से लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा. दूसरी ओर इटाढ़ी रेलवे क्रासिंग बंद होने से भी शहर के एक बड़े हिस्से का आवागमन प्रभावित हुआ.
अब चार सप्ताह में देना होगा हिसाब
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायाधीश सुधीर सिंह की खंडपीठ ने की. कोर्ट ने संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. अब संबंधित विभागों को यह बताना होगा कि आरओबी की मरम्मत में देरी क्यों हो रही है और इसे ठीक करने के लिए क्या समय-सीमा तय की गई है.
विशेषज्ञ जांच से खुलेगा ‘राज’
याचिकाकर्ता सरोज कुमार राजभर ने न्यायालय का आभार जताया और यह बताया कि सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से आरओबी का निरीक्षण कराने और तकनीकी विशेषज्ञ समिति गठित करने पर भी जोर दिया गया. समिति यह जांच कर सकती है कि पुल के क्षतिग्रस्त होने के पीछे तकनीकी कारण क्या रहे और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है. हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर है कि चार सप्ताह में दाखिल होने वाले जवाब में आरओबी की मरम्मत, तकनीकी जांच और जिम्मेदारी को लेकर क्या तस्वीर सामने आती है.





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