4 अक्टूबर को ही होगा जीवित्पुत्रिका व्रत, बक्सर के आचार्यों ने शास्त्रीय गणना के बाद लिया सर्वसम्मत निर्णय ..

विद्वानों ने उदयातिथि, शास्त्रीय गणना और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर तिथि का गहन परीक्षण किया. करीब कई दौर के मंथन में पंचांगों में बताई जा रही अलग-अलग तिथियों, खासकर 3 अक्टूबर की तिथि पर चर्चा की गई. 





                           


  • उदयातिथि, शास्त्रीय गणना और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर हुआ तिथि निर्धारण, पंचांगों में अलग-अलग तारीखों से पैदा हुआ था भ्रम
  • गोयल धर्मशाला के हनुमान मंदिर प्रांगण में जुटे विद्वान आचार्य, 3 अक्टूबर की तिथि पर भी हुई विस्तार से चर्चा

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जीवित्पुत्रिका व्रत की तिथि को लेकर अलग-अलग पंचांगों में जारी असमंजस को दूर करने के लिए बुधवार को बक्सर के विद्वान आचार्यों ने नगर के गोयल धर्मशाला स्थित हनुमान मंदिर प्रांगण में बैठक की. आचार्य कृष्णानंद पौराणिक जी महाराज समेत कई विद्वानों ने उदयातिथि, शास्त्रीय गणना और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर तिथि का गहन परीक्षण किया. करीब कई दौर के मंथन में पंचांगों में बताई जा रही अलग-अलग तिथियों, खासकर 3 अक्टूबर की तिथि पर चर्चा की गई. इसके बाद मौजूद आचार्यों ने सर्वसम्मति से 4 अक्टूबर को जीवित्पुत्रिका व्रत मनाने का निर्णय लिया और श्रद्धालुओं से इसी तिथि पर व्रत रखने की अपील की.

उदयातिथि को माना तिथि निर्धारण का आधार

बैठक में आचार्यों ने कहा कि किसी धार्मिक व्रत की तिथि तय करने में केवल कैलेंडर की तारीख को आधार नहीं बनाया जा सकता. इसके लिए संबंधित तिथि के उदयकाल, शास्त्रीय गणना और धार्मिक मान्यताओं का अध्ययन आवश्यक है. इसी आधार पर जीवित्पुत्रिका व्रत के लिए 4 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की गई.

आचार्य कृष्णानंद पौराणिक जी महाराज ने कहा कि तिथि निर्धारण में उदयातिथि के सिद्धांत को ध्यान में रखा गया है. उन्होंने काशी के पंचांगकारों की ओर से निर्धारित 3 अक्टूबर की तिथि को लेकर भी शास्त्रीय आधार पर अपना पक्ष रखा और उनकी गणना पर सवाल उठाए.

बक्सर की धार्मिक परंपरा भी बनी चर्चा का आधार

आचार्य संजय शास्त्री ने कहा कि पिछले कई वर्षों से जिस दिन बक्सर में जीवित्पुत्रिका व्रत मनाया जाता रहा है, उसी दिन ऐतिहासिक किला मैदान से रामलीला मंचन के शुभारंभ की परंपरा भी रही है. उनके अनुसार बक्सर की यह स्थानीय धार्मिक परंपरा भी व्रत की तिथि को समझने में महत्वपूर्ण तथ्य है.

बैठक में आचार्य कृष्णानंद पौराणिक जी महाराज, आचार्य धनजी चतुर्वेदी जी महाराज, आचार्य संजय शास्त्री, आचार्य मुक्तेश्वर नाथ शास्त्री, ज्योतिषाचार्य नरोत्तम द्विवेदी, पंडित विनय चतुर्वेदी, आचार्य दिवाकर पाठक, पंडित अखिलेश पाठक और सोखाधाम पुजारी विकास पांडेय समेत कई विद्वान आचार्य मौजूद रहे.

श्रद्धालुओं से 4 अक्टूबर को व्रत रखने की अपील

बैठक के बाद आचार्यों ने श्रद्धालुओं से पंचांगों में अलग-अलग तिथियां देखकर भ्रमित नहीं होने की अपील की. उन्होंने कहा कि बैठक में शास्त्रीय गणना, उदयातिथि और धार्मिक मान्यताओं पर विचार करने के बाद सर्वसम्मति से 4 अक्टूबर की तिथि तय की गई है. श्रद्धालुओं से इसी निर्णय के अनुसार 4 अक्टूबर को जीवित्पुत्रिका व्रत रखने की अपील की गई.



















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