वामन मंदिर के समीप स्थित बगीचा उत्सव लॉन में होने वाले इस कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने शुक्रवार को जदयू के कई नेता कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे. नेताओं ने व्यवस्था का निरीक्षण करने के साथ ही कार्यकर्ताओं और आम लोगों की भागीदारी को लेकर तैयारियों की समीक्षा की.
चरित्रवन के सोमेश्वर स्थान में वामन मंदिर के समीप बगीचा उत्सव लॉन में जुटेंगे जदयू के दिग्गज
कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण करने पहुंचे नेता, पांच हजार से अधिक कार्यकर्ताओं के जुटने का दावा
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : फरक्का जल संधि की शर्तों में बिहार के हितों को प्राथमिकता देने की मांग को लेकर जनता दल यूनाइटेड की ओर से 5 सितंबर को बक्सर में ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. चरित्रवन के सोमेश्वर स्थान मोहल्ले में वामन मंदिर के समीप स्थित बगीचा उत्सव लॉन में होने वाले इस कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने शुक्रवार को जदयू के कई नेता कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे. नेताओं ने व्यवस्था का निरीक्षण करने के साथ ही कार्यकर्ताओं और आम लोगों की भागीदारी को लेकर तैयारियों की समीक्षा की.
डुमरांव विधायक राहुल सिंह ने कहा, “बक्सर वह महत्वपूर्ण जिला है, जहां गंगा बिहार में प्रवेश करती है और इसके बाद बिहार के कई जिलों से होते हुए बंगाल की ओर जाती है. गंगा में गाद जमा होने, गर्मी में पानी की कमी और बरसात में बाढ़ की समस्या लगातार सामने आती रही है.” उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को संसद में भी उठाया जा रहा है. “गर्मी के दिनों में तिनोहानी के पास गंगा की धार बेहद पतली दिखाई देती है, जबकि बरसात आते ही बाढ़ की स्थिति बन जाती है. बिहार को इस दोहरी समस्या से निजात चाहिए.”
जदयू प्रदेश प्रवक्ता अंजुम आरा ने कहा, “12 दिसंबर 2026 को फरक्का जल संधि के 30 वर्ष पूरे होने वाले हैं. 30 साल पहले हुए फैसले में बिहार के हितों को नजरअंदाज किया गया था. इस बार ऐसा नहीं होना चाहिए.” उन्होंने कहा कि फरक्का बैराज के कारण गंगा में गाद की समस्या गंभीर हुई है. “गर्मी में पानी की किल्लत और बरसात में बाढ़ बिहार की बड़ी समस्या है. समझौते के तहत बांग्लादेश को पानी देना पड़ता है, लेकिन गाद के कारण नदी की स्थिति प्रभावित होती है, जिसका असर किसानों और सिंचाई पर भी पड़ता है.”
उन्होंने बताया कि जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने इस मुद्दे को संसद में मजबूती से उठाया है. “गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में जनता से संवाद किया जाएगा. इसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है, ताकि 30 साल पहले हुई अनदेखी दोबारा न हो और भविष्य में बिहार के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले.”
राजपुर विधायक संतोष निराला ने तैयारियों की जानकारी देते हुए कहा, “कार्यक्रम की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और सभी लोग इसमें पूरी तरह जुटे हुए हैं. चुनाव के बाद पहली बार जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष इस कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे हैं.” उन्होंने कहा, “हजारों की संख्या में कार्यकर्ता जुटेंगे और कार्यक्रम पूरी तरह सफल होगा.”
जदयू जिलाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने कहा, “गांव-गांव से लोग नेताओं के स्वागत और कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निकल रहे हैं. पांच हजार से ज्यादा लोगों के शामिल होने की उम्मीद है.” उन्होंने बताया कि नेता सड़क मार्ग से पटना से बक्सर पहुंचेंगे, ताकि रास्ते में जनता से मुलाकात और संवाद हो सके. उन्होंने कहा, “कार्यक्रम स्थल पर करीब पांच हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है. भीड़ बढ़ने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था भी रहेगी. बारिश को देखते हुए वाटरप्रूफ टेंट लगाया गया है.”
जदयू नेता मंटू उपाध्याय ने कार्यक्रम स्थल के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “यह भगवान वामन की जन्मस्थली है और पास में भगवान वामन का मंदिर भी है. यह महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि और भगवान श्रीराम की कर्मभूमि से जुड़ी ऐतिहासिक धरती है.” उन्होंने कहा, “संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के स्वागत के लिए बक्सर में प्रवेश से लेकर सभा स्थल तक हजारों कार्यकर्ता फूल-मालाओं के साथ मौजूद रहेंगे. इस ऐतिहासिक धरती पर उनका स्वागत भी ऐतिहासिक होगा.”
जदयू शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने फरक्का जल संधि की शर्तों को बताते हुए कहा, “पूर्व की संधि के अनुसार यदि पानी 70 हजार क्यूसेक या उससे कम होता था, तो बांग्लादेश को 35 हजार क्यूसेक पानी देने का प्रावधान था. 70 हजार से 75 हजार क्यूसेक के बीच पानी होने पर निर्धारित हिस्सेदारी थी और 75 हजार क्यूसेक से अधिक पानी होने पर तय हिस्सा भारत को रखने के बाद शेष पानी देने की व्यवस्था थी.”
उन्होंने कहा, “1975 में फरक्का बैराज बनने के बाद गंगा में भारी मात्रा में गाद जमा होने लगी. इसके कारण बिहार को गर्मी में सूखे और मानसून में बाढ़ की समस्या का सामना करना पड़ता है.” उन्होंने बिहार के हित से जुड़े इस मुद्दे को मजबूती से उठाने के लिए पार्टी नेतृत्व का आभार जताया.
30 साल बाद फिर उठेगा बिहार के हिस्से का सवाल
12 दिसंबर 2026 को भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि के 30 वर्ष पूरे होने से पहले जदयू ने इसे बिहार के जल अधिकार, सिंचाई, कृषि और बाढ़ की समस्या से जोड़ते हुए बड़ा जनसंवाद अभियान शुरू किया है. 5 सितंबर को बक्सर से होने वाला ‘नीतीश संवाद’ इसी अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है. कार्यक्रम को लेकर शुक्रवार को स्थल निरीक्षण के दौरान नेताओं ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए.






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