एक छात्रा से अपने कंधे की मालिश कराने का आरोप भी जांच प्रतिवेदन में दर्ज है. हालांकि, जांच के दौरान शिक्षक ने इस आरोप को गलत बताया था. जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की ओर से कार्रवाई के बाद चारों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
- गरहथा कला मध्य विद्यालय की जांच में खुलीं अनियमितताओं की कई परतें, प्रधानाध्यापक समेत चार पर कार्रवाई
- पाठ टीका और गृहकार्य का साक्ष्य नहीं मिला, शौचालय में बंद मिली खेल सामग्री व छात्रों की कॉपियां; छात्रों ने की थी तालाबंदी
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : डुमरांव प्रखंड के नथुनी अहीर के डेरा स्थित मध्य विद्यालय में छात्राओं से कुकर्म की घटना के बाद शिक्षा विभाग की सख्ती अब ब्रह्मपुर प्रखंड के मध्य विद्यालय गरहथा कला तक पहुंच गई है. विद्यालय में शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के बाद प्रभारी प्रधानाध्यापक राधामोहन यादव समेत चार शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है. इनमें शिक्षक रामबचन यादव पर एक छात्रा से अपने कंधे की मालिश कराने का आरोप भी जांच प्रतिवेदन में दर्ज है. हालांकि, जांच के दौरान शिक्षक ने इस आरोप को गलत बताया था. जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की ओर से कार्रवाई के बाद चारों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
25 अगस्त को हुई जांच में खुली विद्यालय की पोल
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ब्रह्मपुर की ओर से जिला शिक्षा पदाधिकारी को भेजे गए जांच प्रतिवेदन के अनुसार समाचार पत्र में प्रकाशित शिकायत के आधार पर 25 अगस्त को मध्य विद्यालय गरहथा कला का निरीक्षण किया गया. जांच के दौरान मुखिया ग्राम पंचायत निमेज, अभिभावक और साधनसेवी मध्याह्न भोजन भी मौजूद थे. निरीक्षण में विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर छात्रों की कई शिकायतें तथ्यात्मक रूप से सही पाई गईं.
प्रतिवेदन के अनुसार शिक्षक रामबचन यादव, राकेश सिंह, योगेंद्र यादव और प्रभारी प्रधानाध्यापक राधामोहन यादव से पिछले एक माह के शिक्षण कार्य का प्रमाण मांगा गया, लेकिन पाठटीका उपलब्ध नहीं कराई गई. किसी छात्र की कॉपी में गृहकार्य की जांच का भी साक्ष्य नहीं मिला. छात्रों ने बताया कि गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषय की पढ़ाई ही अन्य शिक्षकों द्वारा कराई जाती है.
समय-सारणी की जांच में न तो प्रभारी प्रधानाध्यापक का हस्ताक्षर मिला और न ही किसी शिक्षक का. समय-सारणी विभागीय निर्देश के अनुरूप भी नहीं पाई गई. वर्ग संचालन से संबंधित पंजी भी विद्यालय में उपलब्ध नहीं था. जांच अधिकारी ने शिक्षण व्यवस्था की इस स्थिति के लिए संबंधित शिक्षकों के साथ प्रभारी प्रधानाध्यापक को भी जिम्मेदार माना है.
छात्रा से कंधा दबवाने का आरोप, शिक्षक ने बताया गलत
जांच प्रतिवेदन में शिक्षक रामबचन यादव पर एक छात्रा से कंधा दबवाने का आरोप भी दर्ज किया गया है. हालांकि, शिक्षक ने जांच के दौरान इस आरोप से इनकार करते हुए इसे गलत बताया. विभागीय प्रतिवेदन में आरोप और शिक्षक का पक्ष दोनों दर्ज किए गए हैं. इसके अलावा रामबचन यादव पर पाठटीका तैयार नहीं करने, गृहकार्य नहीं देने और समय-सारणी के अनुसार कक्षा का संचालन नहीं करने के आरोप भी लगाए गए हैं.
शौचालय में बंद मिली बच्चों की कॉपियां और खेल सामग्री
विद्यालय के अभिलेखों की जांच में भी गंभीर लापरवाही सामने आई. मध्याह्न भोजन, कंपोजिट ग्रांट और विद्यालय मरम्मत कार्य में खर्च की गई राशि से संबंधित पीपीए, रोकड़ पंजी, स्टॉक पंजी समेत कई अभिलेख विद्यालय में नहीं मिले. प्रभारी प्रधानाध्यापक ने बताया कि सभी अभिलेख घर पर रखे हुए हैं. जांच अधिकारी ने इसे वित्तीय मामलों में गंभीर लापरवाही मानते हुए वित्तीय अनियमितता की संभावना जताई.
भौतिक सत्यापन के दौरान खेल सामग्री शौचालय में रखी मिली. बीआरसी से विद्यार्थियों के लिए प्राप्त कॉपियां भी शौचालय में बंद मिलीं, जबकि उन्हें बच्चों के बीच वितरित किया जाना था. विद्यालय में कुल चार शौचालय हैं, जिनमें सिर्फ दो ही क्रियाशील पाए गए. बाकी दो शौचालयों में खेल सामग्री, कॉपियां, संगीत सामग्री और पाठ्य पुस्तकें रखी हुई थीं.
मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं
जांच के दौरान विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि मध्याह्न भोजन में कभी हरी सब्जी का इस्तेमाल नहीं किया जाता. निरीक्षण में मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई. संबंधित पंजी उपलब्ध नहीं होने के कारण भंडार में रखे चावल का भौतिक सत्यापन भी नहीं किया जा सका.
विद्यालय शिक्षा समिति की व्यवस्था भी जांच में सवालों के घेरे में मिली. वार्ड एक और वार्ड दो के सदस्य निरीक्षण के दौरान मौजूद थे. दोनों ने बताया कि उन्हें ही जानकारी नहीं है कि विद्यालय शिक्षा समिति का अध्यक्ष कौन है. दोनों सदस्यों ने किसी पंजी पर हस्ताक्षर नहीं करने की बात कही. समिति से संबंधित कोई पंजी भी विद्यालय में नहीं मिला, जबकि प्रत्येक माह समिति की बैठक अनिवार्य है. सचिव के अनुपस्थित रहने के कारण उनका पक्ष नहीं लिया जा सका.
अनुपस्थित शिक्षिका को उपस्थित दिखाकर वेतन भुगतान का आरोप
जांच प्रतिवेदन में शिक्षिका खुशबू कुमारी से जुड़ा मामला भी सामने आया है. ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर वह 1 मई से 17 मई 2026 तक अनुपस्थित दर्ज थीं. इसके बावजूद प्रभारी प्रधानाध्यापक की ओर से मई 2026 की अनुपस्थिति विवरणी में उन्हें उपस्थित दिखाकर वेतन भुगतान कराया गया. जांच अधिकारी ने इसे वित्तीय अनियमितता का मामला माना है. इस संबंध में 18 अगस्त को स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन प्रतिवेदन के अनुसार उसका जवाब अब तक प्राप्त नहीं हुआ था.
तालाबंदी के बाद भी विभाग को नहीं दी सूचना
जांच प्रतिवेदन के अनुसार 22 अगस्त को शैक्षणिक व्यवस्था में अनियमितता और शिक्षकों द्वारा वर्ग संचालन में रुचि नहीं लेने के विरोध में छात्र-छात्राओं ने विद्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर दी थी. इसके बावजूद प्रभारी प्रधानाध्यापक ने इसकी सूचना प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय को नहीं दी. जांच अधिकारी ने इसे अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता का परिचायक माना है.
इन तमाम बिंदुओं के आधार पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने दोषी शिक्षकों और प्रभारी प्रधानाध्यापक के खिलाफ नियमानुकूल विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की. इसके बाद प्रभारी प्रधानाध्यापक राधामोहन यादव तथा विशिष्ट शिक्षक रामबचन यादव, राकेश सिंह और योगेंद्र यादव को निलंबित कर दिया गया. एक ही विद्यालय के चार शिक्षकों पर एक साथ हुई कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप की स्थिति है.






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