कहा कि आज के दौर में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है. विद्यार्थियों को यह तय करना होगा कि वे भविष्य में सिर्फ ‘Technician’ बनना चाहते हैं या अपनी व्यापक सोच, ज्ञान और नेतृत्व क्षमता के दम पर ‘Technocrat’ बनकर आगे बढ़ना चाहते हैं.
- महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय में बीसीए-बीबीए के विद्यार्थियों का ओरिएंटेशन कार्यक्रम, नियमित उपस्थिति और अनुशासन पर जोर
- अभिभावकों ने भी माना- बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर निगरानी रखना हमारी जिम्मेदारी
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय, बक्सर में बीसीए एवं बीबीए के नवप्रवेशी विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम में पढ़ाई के साथ करियर को लेकर गंभीरता, अनुशासन और नियमितता का संदेश दिया गया. कार्यक्रम में विद्यार्थियों को महाविद्यालय के शैक्षणिक माहौल, पाठ्यक्रम, व्यावहारिक शिक्षा और भविष्य में रोजगार एवं उद्यमिता की संभावनाओं से परिचित कराया गया.
महाविद्यालय के प्राचार्य सह बीसीए एवं बीबीए के निदेशक प्रो. कृष्ण कांत सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के दौर में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है. विद्यार्थियों को यह तय करना होगा कि वे भविष्य में सिर्फ ‘Technician’ बनना चाहते हैं या अपनी व्यापक सोच, ज्ञान और नेतृत्व क्षमता के दम पर ‘Technocrat’ बनकर आगे बढ़ना चाहते हैं.
उन्होंने विद्यार्थियों के सामने एक और सवाल रखा- ‘Get Settlement या Get Placement’. उन्होंने कहा कि भविष्य को लेकर लक्ष्य तय करना पहला कदम है, लेकिन सफलता के लिए कर्म, अनुशासन, नियमित कक्षा उपस्थिति और लगातार प्रयास जरूरी हैं. विद्यार्थियों को समय का सदुपयोग करते हुए अपने ज्ञान और व्यावहारिक कौशल को लगातार मजबूत करने की सलाह दी गई.
कार्यक्रम में बीसीए समन्वयक डॉ. सैकत देबनाथ और बीबीए समन्वयक डॉ. पंकज चौधरी ने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि बीसीए और बीबीए जैसे रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को केवल डिग्री नहीं देते, बल्कि रोजगार, उद्यमिता और विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल विकसित करने का अवसर भी देते हैं.
बीसीए विभाग के शिक्षक अरुण कुमार ओझा, मधुसूदन कुमार और यथार्थ राज ने विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम एवं विषयों की जानकारी दी. वहीं बीबीए विभाग के शिक्षक अरविंद कुमार मिश्रा और सरोज कुमार सर्राफ ने प्रबंधन शिक्षा, पाठ्यक्रम की संरचना और उसके व्यावहारिक महत्व पर प्रकाश डाला. शिक्षकों ने नियमित अध्ययन और सक्रिय सहभागिता को सफलता की कुंजी बताया.
‘अब बेटों से भी पूछा जाएगा- कहां जा रहे हो?’
कार्यक्रम में एक नवप्रवेशी छात्रा के अभिभावक, जो स्वयं महाविद्यालय के पूर्व छात्र रहे हैं, की बात ने खासा ध्यान खींचा. उन्होंने कहा कि अब केवल बेटियों से ही यह नहीं पूछा जाना चाहिए कि वे कहां जा रही हैं, बल्कि बेटों से भी पूछा जाना चाहिए कि वे कहां जा रहे हैं और अपना समय किस तरह बिता रहे हैं.
उन्होंने कहा कि बच्चे का महाविद्यालय में दाखिला करा देना अभिभावकों की जिम्मेदारी का अंत नहीं है. उसकी नियमित उपस्थिति, पढ़ाई, अनुशासन और शैक्षणिक प्रगति पर नजर रखना भी उतना ही जरूरी है. इस विचार से प्रभावित अभिभावकों ने बच्चों की नियमित उपस्थिति और बेहतर शैक्षणिक भविष्य के लिए महाविद्यालय के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने का भरोसा दिया.
कार्यक्रम के आयोजन एवं समन्वय में बीसीए एवं बीबीए सहायक डॉ. शिवम भारद्वाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही. कार्यक्रम के माध्यम से नवप्रवेशी विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ अपने भविष्य के प्रति जिम्मेदार बनने और लक्ष्य के लिए निरंतर मेहनत करने का संदेश दिया गया.






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