पैशन के पीछे भागने से पहले खुद से पूछें- यह जुनून है या सिर्फ फैंटेसी? बिहार एजुकेशनल कॉन्क्लेव में रोहित दुबे का युवाओं को संदेश ..

युवाओं से अपने फैसलों को लेकर सजग और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की. उनके मुताबिक करियर में सफलता के लिए रुचि के साथ उस क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों, अपनी क्षमताओं और लंबे समय तक मेहनत करने की तैयारी को भी समझना जरूरी है.





                           




करियर चुनने में भावनाओं के साथ व्यावहारिक सोच जरूरी, शिक्षा को डिग्री और अंकों से आगे ले जाने पर दिया जोर

शिक्षा, कौशल, अनुशासन और आत्मविश्वास को बताया सफलता की तैयारी का अहम हिस्सा

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : बिहार स्टेट एजुकेशनल कॉन्क्लेव में लेखक और कॉरपोरेट प्रोफेशनल रोहित दुबे ने युवाओं को करियर को लेकर बड़ा संदेश दिया. स्वर्गीय डॉ. बैजनाथ दुबे के पुत्र रोहित दुबे ने कहा कि करियर के फैसले सिर्फ भावनाओं या आकर्षण के आधार पर नहीं लिए जाने चाहिए, बल्कि यह समझना जरूरी है कि जिस काम को युवा अपना पैशन मान रहे हैं, वह वास्तव में उनका जुनून है या महज एक फैंटेसी. उन्होंने शिक्षा को डिग्री और अंकों की दौड़ से आगे ले जाकर कौशल, अनुशासन और आत्मविश्वास से जोड़ने की जरूरत बताई.


पैशन और फैंटेसी का अंतर समझना जरूरी

कॉन्क्लेव में युवाओं से संवाद करते हुए रोहित दुबे ने कहा कि आज के दौर में युवाओं के बीच अपने पैशन को फॉलो करने की बात खूब कही जाती है, लेकिन पैशन चुनने से पहले उसके वास्तविक स्वरूप को समझना जरूरी है. कई बार किसी क्षेत्र का आकर्षण व्यक्ति को यह महसूस करा सकता है कि यही उसका पैशन है, जबकि वास्तविकता में वह सिर्फ एक फैंटेसी हो सकती है. ऐसे में बिना सोचे-समझे लिया गया करियर निर्णय आगे चलकर चुनौती बन सकता है.

उन्होंने युवाओं से अपने फैसलों को लेकर सजग और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की. उनके मुताबिक करियर में सफलता के लिए रुचि के साथ उस क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों, अपनी क्षमताओं और लंबे समय तक मेहनत करने की तैयारी को भी समझना जरूरी है.

शिक्षा का मतलब सिर्फ डिग्री और अच्छे अंक नहीं

रोहित दुबे ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना या डिग्री प्राप्त करना नहीं होना चाहिए. बदलते दौर में युवाओं के लिए कौशल विकास, अनुशासन, आत्मविश्वास और करियर की व्यावहारिक तैयारी भी उतनी ही जरूरी है. शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो युवाओं को सिर्फ नौकरी पाने के लिए नहीं, बल्कि बदलती चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार करे.

कार्यक्रम में रोहित दुबे ने शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी और जदयू के राष्ट्रीय महासचिव मनीष वर्मा के साथ मंच साझा किया. वह Letter To My Son और 30 Lessons Not Taught in School के लेखक भी हैं.


















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