श्रद्धालुओं को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा, जब गंगा में बहकर आया एक मृत मवेशी का शव घाट के किनारे आकर लग गया. श्रद्धालुओं ने इसकी सूचना स्थानीय लोगों को दी, जिसके बाद मामला सामने आया.
- पितृपक्ष में तर्पण के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को गंदगी के बीच करना पड़ रहा स्नान और कर्मकांड
- नगर परिषद की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल, एनजीटी के निर्देशों के बीच गंगा में शव बहाने का आरोप
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नगर परिषद की ओर से शहर की साफ-सफाई पर हर माह करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावों के बीच रामरेखा घाट पर बुधवार सुबह ऐसा नजारा सामने आया, जिसने पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. पितृपक्ष के दौरान पितरों का तर्पण करने पहुंचे श्रद्धालुओं को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा, जब गंगा में बहकर आया एक मृत मवेशी का शव घाट के किनारे आकर लग गया. श्रद्धालुओं ने इसकी सूचना स्थानीय लोगों को दी, जिसके बाद मामला सामने आया.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मामले की जानकारी नगर परिषद के संबंधित कर्मियों को दिए जाने के बाद शव को गंगा से बाहर निकालकर उचित तरीके से निस्तारित करने के बजाय उसे दोबारा गंगा में बहा दिया गया. बताया गया कि इस कार्रवाई में एसडीआरएफ की टीम का भी सहयोग लिया गया. घाट पर मौजूद लोगों ने जब यह नजारा देखा तो उन्होंने नगर परिषद की सफाई व्यवस्था और गंगा घाटों की निगरानी को लेकर गंभीर चिंता जताई.
पितृपक्ष में घाटों पर उमड़ रही भीड़, फिर भी गंदगी से राहत नहीं
पितृपक्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोग गंगा स्नान और तर्पण के लिए रामरेखा घाट समेत अन्य घाटों पर पहुंच रहे हैं. ऐसे समय में घाटों की विशेष सफाई और स्वच्छता व्यवस्था का दावा नगर परिषद की ओर से किया जाता है. इसके बावजूद श्रद्धालुओं को कई जगह गंदगी के बीच से होकर घाट तक पहुंचना पड़ रहा है.
बुधवार को मृत मवेशी का शव घाट पर पहुंचना और फिर उसे गंगा से बाहर निकालने के बजाय पानी में ही बहा दिए जाने की बात ने व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि घाटों की नियमित निगरानी और सफाई की प्रभावी व्यवस्था होती तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती.
गंगा को प्रदूषण से बचाने के दावों के बीच उठे सवाल
गंगा की स्वच्छता और प्रदूषण रोकने को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं. ऐसे में मृत मवेशी के शव को गंगा में ही बहाने की कार्रवाई पर प्रबुद्ध लोगों ने चिंता जताई है. उनका कहना है कि नदी में शव बहाना गंगा के पर्यावरण और जल की गुणवत्ता के लिए गंभीर चिंता का विषय है. साथ ही, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के तहत गंगा को प्रदूषण से बचाने के प्रयासों के बीच इस तरह की घटना व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े करती है.
लोगों का सवाल है कि जब नगर परिषद साफ-सफाई के नाम पर हर माह बड़ी राशि खर्च करने का दावा करती है, तो फिर गंगा घाटों पर मृत मवेशी के शव जैसी स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं दिखी. खासकर पितृपक्ष जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर घाटों की निगरानी और सफाई में ऐसी लापरवाही श्रद्धालुओं के साथ-साथ गंगा की सेहत के लिए भी चिंता का विषय है.
इस मामले में नगर परिषद के स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारी रवि कुमार सिंह ने कहा कि शव को हटाने के लिए नगर परिषद की ओर से कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गई है. ऐसी घटना किस कारण से हुई, इसकी जानकारी ली जाएगी और मामले को दिखवाया जाएगा.





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