मारपीट के आरोपों के बाद पीड़ित कर्मचारी विधायक आनंद मिश्र से मिले, जेई पर धमकी का आरोप


सोन नहर विभाग के मौसमी मेट कर्मचारियों ने प्रशाखा पदाधिकारी (जेई) पर लगाए गंभीर आरोप
कहा- तीन महीने का मेहनताना बकाया, अब केस में फंसाने की दी जा रही धमकी

बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : सोन नहर विभाग में कार्यरत मौसमी मेट कर्मचारियों ने प्रशाखा पदाधिकारी (जेई) जितेंद्र कुमार पर मारपीट और धमकी देने का आरोप लगाया है. मामले को लेकर सभी पीड़ित कर्मचारी सदर विधायक आनंद मिश्र से मिले और उनके समक्ष अपनी समस्याएं रखीं. कर्मचारियों ने विधायक को बताया कि घटना के बाद अब प्रशाखा पदाधिकारी (जेई) उन्हें केस में फंसा देने की धमकी दे रहे हैं. साथ ही करीब तीन महीने का मेहनताना भी रोके जाने का आरोप लगाया.

नहर पर बुलाने के बाद मारपीट का आरोप

पीड़ित कर्मचारियों के अनुसार, 19 अगस्त को नहर में अलग-अलग जगहों पर काम कर रहे कर्मचारियों को 11 नंबर लख पर बुलाया गया था. आरोप है कि वहां प्रशाखा पदाधिकारी (जेई) जितेंद्र कुमार ने कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज की और इसके बाद मारपीट की.

कर्मचारियों का दावा है कि इस दौरान मंटू रजक और सुरेश सिंह को चोटें आईं, जबकि बीच-बचाव करने पहुंचे मनु पांडेय भी चोटिल हुए. मंटू रजक ने आरोप लगाया कि उनके गर्दन और छाती पर मुक्के से वार किया गया और हाथ की अंगुली में भी चोट लगी. वहीं सुरेश सिंह के मुंह और होंठ पर चोट लगने की बात कही गई है.

घटना के बाद धमकी देने का भी आरोप

पीड़ितों का आरोप है कि मारपीट की घटना के बाद उन्हें दोबारा नहर पर दिखाई देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई. कर्मचारियों का कहना है कि घटना के बाद से वे दबाव में हैं और मामले में निष्पक्ष कार्रवाई चाहते हैं.

तीन महीने से मेहनताना बकाया होने की शिकायत

विधायक आनंद मिश्र से मुलाकात के दौरान कर्मचारियों ने करीब तीन महीने का मेहनताना बकाया होने की समस्या भी रखी. कर्मचारियों के अनुसार, वे मौसमी कर्मचारी हैं और मेहनताने से ही अपने परिवार का खर्च चलाते हैं. लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

विधायक से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग

पीड़ित कर्मचारियों ने सदर विधायक आनंद मिश्र से मामले में हस्तक्षेप करने, घटना की निष्पक्ष जांच कराने, बकाया मेहनताना दिलाने और कथित धमकी से राहत दिलाने की मांग की. कर्मचारियों ने कहा कि वे विभाग में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं और चाहते हैं कि पूरे मामले का निष्पक्ष तरीके से समाधान हो.

मामले में प्रशाखा पदाधिकारी (जेई) जितेंद्र कुमार का पक्ष लेने के लिए उन्हें फोन किया गया लेकिन फोन नहीं उठाने के कारण उनका पक्ष ज्ञात नहीं हो सका.

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