पालि में बक्सर का डंका, अंकित ने देशभर में लहराया परचम ..

यह सफलता अंकित की वर्षों की मेहनत का परिणाम है. पालि विषय में अभ्यर्थियों की संख्या भले ही अन्य विषयों की तुलना में कम हो, लेकिन JRF की सीटें भी बेहद सीमित रहती हैं. 

 





                             


  • यूजीसी नेट जून 2026 में 97.4 पर्सेन्टाइल के साथ ऑल इंडिया रैंक-1, देश की महज पांच JRF में बनाई जगह
  • नदांव के युवा शोधार्थी की उपलब्धि पर गांव में जश्न, दर्जनों ग्रामीणों ने घर पहुंचकर दी बधाई

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : यूजीसी नेट जून 2026 के परिणाम में बक्सर के युवा शोधार्थी अंकित द्विवेदी ने ऐसा परचम लहराया है, जिसकी चर्चा अब राष्ट्रीय अकादमिक जगत में हो रही है. सदर प्रखंड के नदाँव गांव निवासी अंकित ने पालि विषय में 97.4 पर्सेन्टाइल हासिल करते हुए अपनी EWS श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त की है. सबसे बड़ी बात यह है कि पालि विषय में पूरे देश में महज पांच अभ्यर्थियों को जूनियर रिसर्च फेलोशिप यानी JRF मिली है और इन पांच में बक्सर के अंकित भी शामिल हैं.

सीमित सीट, कड़ी चुनौती और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा के बीच मिली यह सफलता अंकित की वर्षों की मेहनत का परिणाम है. पालि विषय में अभ्यर्थियों की संख्या भले ही अन्य विषयों की तुलना में कम हो, लेकिन JRF की सीटें भी बेहद सीमित रहती हैं. ऐसे में पांच उपलब्ध JRF में जगह बनाना अपने आप में बड़ी अकादमिक उपलब्धि मानी जा रही है.

अंकित के अनुसार पालि को आसान विषय समझना प्रतियोगियों की बड़ी भूल है. उन्होंने बताया कि JRF के अवसर बेहद सीमित होने के कारण यहां एक-एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला होता है. दिसंबर 2025 में EWS श्रेणी में एक भी JRF नहीं मिली थी. ऐसे में इस बार 97.4 पर्सेन्टाइल के साथ EWS में एकमात्र JRF हासिल करना उनके लिए विशेष उपलब्धि है.

शोध के साथ लगातार मिल रही सफलता

अंकित वर्तमान में नव नालंदा महाविहार, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के बौद्ध अध्ययन विभाग में शोधरत हैं. वे विभागाध्यक्ष डॉ. मुकेश कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में शोध कार्य कर रहे हैं. इससे पहले दिसंबर 2025 में उनका चयन भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी ICSSR, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की Full-term Doctoral Fellowship 2025 के लिए हुआ था. इसके तहत उनके शोध के लिए सरकार की ओर से 5.20 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है.

अंकित की उपलब्धियों का सिलसिला यहीं नहीं रुकता. दर्शन और बौद्ध अध्ययन से जुड़े राष्ट्रीय मंचों पर वे अपनी शोध प्रतिभा का परिचय दे चुके हैं. अखिल भारतीय दर्शन परिषद, बिहार दर्शन परिषद और मध्यप्रदेश दर्शन परिषद के सम्मेलनों में उन्हें Best Paper Award मिल चुका है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिषद, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार से जुड़े Young Buddhist Scholar भी रहे हैं.

इलाहाबाद से दिल्ली, जेएनयू और अब नालंदा तक सफर

नदाँव के ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय अकादमिक पहचान बनाने वाले अंकित ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक, दिल्ली विश्वविद्यालय से परास्नातक और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से डिप्लोमा किया. इसके बाद उन्होंने बौद्ध अध्ययन और पालि को अपने शोध का केंद्र बनाया.

अंकित नदाँव गांव के स्वतंत्रता सेनानी स्व. जितेंद्र नाथ द्विवेदी के पौत्र और स्व. अनुज द्विवेदी के पुत्र हैं. उनकी इस उपलब्धि से गांव में खुशी का माहौल है. अंकित की सफलता की खबर मिलते ही ग्रामीणों ने उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.

वार्ड सदस्य मंटु कुमार 'बबुआ जी', अंकित सिंह, लालू यादव, रूपा जी, शिक्षक शिव अंचल सिंह, पृथ्वीनाथ सिंह सहित दर्जनों ग्रामीणों ने अंकित को बधाई दी.

पालि जैसी प्राचीन भारतीय भाषा और बौद्ध अध्ययन जैसे विशिष्ट क्षेत्र में लगातार सफलता हासिल कर अंकित ने यह संदेश दिया है कि अवसर सीमित हों तो भी लक्ष्य बड़ा रखा जा सकता है. मेहनत, अनुशासन और विषय के प्रति समर्पण के दम पर गांव की मिट्टी से निकली प्रतिभा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती है. यूजीसी नेट जून 2026 में देश की महज पांच JRF में जगह बनाकर अंकित ने बक्सर का नाम एक बार फिर अकादमिक मानचित्र पर चमका दिया है.













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