कहा कि बाढ़ से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई परिवारों के सामने भोजन, पीने के पानी, दवा, पशुचारा और सुरक्षित स्थान की समस्या खड़ी है.
- बाढ़ प्रभावित तीन प्रखंडों को घोषित किया जाए बाढ़ग्रस्त, मृतकों के परिजनों को मिले मुआवजा
- उत्तरी नैनीजोर की स्थिति सबसे गंभीर, भोजन-पानी से लेकर पशुचारा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : बिहार में बाढ़ की स्थिति और राहत व्यवस्था को लेकर शुक्रवार को भाकपा माले के राज्यव्यापी आह्वान पर डुमरांव थाना के समीप विरोध प्रदर्शन और सभा आयोजित की गई. प्रदर्शन में बक्सर जिले के ब्रह्मपुर, चक्की और सिमरी प्रखंडों के बाढ़ प्रभावित इलाकों में तत्काल राहत पहुंचाने, बाढ़ से हुई मौतों का जिला एवं प्रखंडवार वास्तविक आंकड़ा सार्वजनिक करने तथा मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग उठाई गई.
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले नेताओं ने कहा कि बाढ़ से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई परिवारों के सामने भोजन, पीने के पानी, दवा, पशुचारा और सुरक्षित स्थान की समस्या खड़ी है. नेताओं ने आरोप लगाया कि राहत और बचाव कार्य जरूरत के अनुरूप नहीं पहुंच रहा है. उन्होंने राहत वितरण में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की भी मांग की.
ब्रह्मपुर से सिमरी तक बाढ़ का असर, कई पंचायतें प्रभावित
भाकपा माले नेताओं ने बक्सर जिले के ब्रह्मपुर, चक्की और सिमरी प्रखंड के बाढ़ प्रभावित पंचायतों का मुद्दा उठाया. नेताओं के अनुसार ब्रह्मपुर उत्तरी क्षेत्र के उत्तरी नैनीजोर, दक्षिणी नैनीजोर, बैरिया, महुआर, गायघाट, हरनाथपुर, गहौना, निमेज और जोगिया समेत कई पंचायतों में बाढ़ से आम जनजीवन प्रभावित है.
दो मौतों का दावा, बाढ़ग्रस्त घोषित करने की मांग
पार्टी की ओर से दावा किया गया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब तक दो लोगों की मौत हुई है. नेताओं ने इन क्षेत्रों को बाढ़ग्रस्त घोषित कर प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की. उत्तरी नैनीजोर को सबसे अधिक प्रभावित बताते हुए वहां विशेष राहत व्यवस्था की मांग की गई.
मौतों का जिला-प्रखंडवार आंकड़ा सार्वजनिक करे सरकार
वक्ताओं ने कहा कि सरकार को बाढ़ से हुई मौतों का जिला एवं प्रखंडवार आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक करना चाहिए. साथ ही मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा और बाढ़ में बर्बाद फसलों तथा क्षतिग्रस्त मकानों का तत्काल सर्वे कर मुआवजा देने की मांग की गई.
राहत सामग्री में भोजन, पानी से लेकर पशुचारा तक की मांग
प्रदर्शनकारियों ने प्रत्येक प्रभावित परिवार तक भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवा, पशुचारा, नाव और सुरक्षित आश्रय पहुंचाने की मांग की. राहत वितरण में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के साथ पंचायत स्तर पर पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई.
बाढ़ के बाद बीमारी का खतरा, स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग
बाढ़ का पानी उतरने के बाद बीमारी फैलने की आशंका को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाने और साफ-सफाई अभियान चलाने की मांग की गई. नेताओं ने कहा कि प्रभावित इलाकों में दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी है.
‘बाढ़ महज आंकड़ा नहीं’, युद्धस्तर पर राहत की मांग
सभा में वक्ताओं ने कहा कि बाढ़ महज सरकारी आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों लोगों की जिंदगी और रोजी-रोटी से जुड़ा सवाल है. सरकार को बाढ़ की भयावहता को आंकड़ों तक सीमित रखने के बजाय जमीन पर युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाना चाहिए.
प्रदर्शन में जुटे दर्जनों नेता और कार्यकर्ता
सभा में भाकपा माले जिला सचिव कॉमरेड नवीन कुमार, प्रखंड सचिव धर्मेंद्र यादव, किसान सभा नेता अलख नारायण चौधरी, नवानगर सचिव हरेंद्र राम, चौगाई सचिव वीरेंद्र सिंह, खेत मजदूर नेता नारायण दास, ललन राम, ऐपवा नेत्री संध्या पाल, पूजा कुमारी, संजय शर्मा, सर्वेश पांडेय, सफाईकर्मी नेता भगवान दास, इंसाफ मंच नेता मो. नासिर हसन, डुमरांव नगर सचिव कृष्णा राम, टुनटुन बैठा, रिंकू कुरैशी और बहादुर जी समेत दर्जनों नेता, कार्यकर्ता एवं आम नागरिक मौजूद रहे.
भाकपा माले की प्रमुख मांगें
- बाढ़ से हुई मौतों का वास्तविक एवं जिला-प्रखंडवार आंकड़ा सार्वजनिक किया जाए.
- मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए.
- हर बाढ़ प्रभावित परिवार को पर्याप्त राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए.
- बर्बाद फसलों और क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे कर मुआवजा दिया जाए.
- राहत वितरण में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए.
- प्रभावित क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएं.
- बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत और पुनर्वास कार्य युद्धस्तर पर चलाया जाए.







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