तुलसी महोत्सव को स्थायी सरकारी मंजूरी की कवायद तेज, मंत्री से मिले शैलेश ओझा ..

देश-प्रदेश के रामकथा वाचकों, विद्वानों और कवियों के साथ स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं को भी मंच देने की योजना बताई गई है. इससे क्षेत्र की लोक परंपरा, लोकगीत, लोकनृत्य और स्थानीय प्रतिभाओं को व्यापक मंच मिलने की उम्मीद है.





                           


  • बक्सर के रघुनाथपुर स्थित तुलसी आश्रम को सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की भी मांग, तीन दिवसीय आयोजन में रामकथा से लोक संस्कृति तक दिखेगा रंग
  • जिला प्रशासन पहले ही भेज चुका है प्रस्ताव, करीब 14 लाख रुपये के अनुमानित खर्च का उल्लेख; मंत्री ने विभागीय स्तर पर सकारात्मक पहल का दिया भरोसा 

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिले के ऐतिहासिक तुलसी आश्रम में हर साल राजकीय स्तर पर तुलसी महोत्सव आयोजित कराने की कोशिश अब पटना के कला एवं संस्कृति विभाग तक पहुंच गई है. तुलसी विचार मंच के संयोजक शैलेश कुमार ओझा ने बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी से मुलाकात कर महोत्सव को स्थायी रूप से आयोजित कराने के लिए मंत्रालय से स्वीकृति दिलाने की मांग की. साथ ही तुलसी आश्रम, तुलसी सरोवर और प्राचीन मंदिर के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाओं के विकास का मुद्दा भी उठाया.

जिला प्रशासन ने भेजा प्रस्ताव, 14 लाख का अनुमानित खर्च

शैलेश ओझा ने मंत्री को बताया कि तुलसी महोत्सव के आयोजन को लेकर बक्सर जिला प्रशासन की ओर से कला एवं संस्कृति विभाग को अनुशंसा भेजी जा चुकी है. जिलाधिकारी के निर्देश पर ब्रह्मपुर बीडीओ के माध्यम से महोत्सव की रूपरेखा, प्रशासनिक व्यवस्था, कलाकारों की उपलब्धता और तुलसी आश्रम की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक महत्ता से जुड़ा विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कराया गया है. प्रस्ताव में तीन दिवसीय आयोजन के लिए करीब 14 लाख रुपये के अनुमानित खर्च का उल्लेख किया गया है.

मुलाकात के दौरान मंत्री ने मामले में विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई और अनुशंसा की दिशा में सकारात्मक पहल का भरोसा दिया.

रामकथा से लोक संस्कृति तक सजेगा तीन दिवसीय मंच

प्रस्तावित महोत्सव में रामकथा, तुलसी साहित्य पर परिचर्चा, कवि गोष्ठी, रामचरितमानस आधारित नृत्य-नाटिका और लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कराने की रूपरेखा है. देश-प्रदेश के रामकथा वाचकों, विद्वानों और कवियों के साथ स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं को भी मंच देने की योजना बताई गई है. इससे क्षेत्र की लोक परंपरा, लोकगीत, लोकनृत्य और स्थानीय प्रतिभाओं को व्यापक मंच मिलने की उम्मीद है.

शैलेश ओझा ने कहा कि तुलसी आश्रम को स्थानीय परंपरा में गोस्वामी तुलसीदास के रघुनाथपुर प्रवास से जोड़ा जाता है. उनके अनुसार शाहाबाद गजेटियर में भी तुलसीदास के रघुनाथपुर प्रवास का उल्लेख मिलता है. उन्होंने आश्रम को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए सड़क, प्रकाश, पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ तुलसी सरोवर और प्राचीन मंदिर के संरक्षण व सौंदर्यीकरण की मांग की.


















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