प्रार्थना सभा में कभी जिस कतार में रौशन एक विद्यार्थी के रूप में खड़े होते थे, उसी परिसर में इस बार उनका स्वागत एक Flying Officer के रूप में हुआ. शिक्षक-शिक्षिकाओं और विद्यार्थियों ने उनका जोरदार स्वागत किया.
- पिता की सड़क हादसे में मौत के बाद CRPF में नौकरी का विकल्प मिला, लेकिन बेटे ने कहा- नौकरी करूंगा तो पिता से ऊंचे रैंक पर
- 2014 बैच के छात्र रौशन ने Engineering के बाद AFCAT से हासिल की सफलता, स्कूल पहुंचने पर शिक्षकों और परिवार की आंखों में दिखा गर्व
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : पिता नेवी तथा बाद में सीआरपीएफ में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर थे. सड़क हादसे में उनकी मौत के बाद बेटे रौशन कुमार के सामने सीआरपीएफ में अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने आसान रास्ता चुनने के बजाय अपने लिए बड़ा लक्ष्य तय किया. मूल रूप से ग्राम - डिहुपुर पोस्ट - आथर, थाना - नावानगर निवासी तथा वर्तमान में बक्सर नगर के सिविल लाइंस मोहल्ले के विप्र नगर के रहने वाले स्वर्गीय रामकृष्ण द्विवेदी के पुत्र रौशन ने ठाना कि जब भी नौकरी करेंगे, पिता से ऊंचे पद पर पहुंचकर करेंगे. इसी संकल्प को लेकर उन्होंने लगातार मेहनत की, Engineering की पढ़ाई पूरी की और Air Force Common Admission Test (AFCAT) के माध्यम से भारतीय वायु सेना में चयनित होकर Flying Officer का पद हासिल किया. प्रशिक्षण पूरा करने के बाद बुधवार को जब वे पहली बार अपने पुराने विद्यालय फाउंडेशन स्कूल, गुरुदास मठिया पहुंचे, तो पूरा परिसर गर्व और भावुकता से भर उठा.
प्रार्थना सभा में कभी जिस कतार में रौशन एक विद्यार्थी के रूप में खड़े होते थे, उसी परिसर में इस बार उनका स्वागत एक Flying Officer के रूप में हुआ. शिक्षक-शिक्षिकाओं और विद्यार्थियों ने उनका जोरदार स्वागत किया. रौशन के साथ उनकी मां, दादा-दादी और अन्य स्वजन भी विद्यालय पहुंचे. बेटे और पोते की इस उपलब्धि को सामने देखकर परिवार के चेहरे पर गर्व साफ नजर आया, वहीं भावुकता भी छिपी नहीं रह सकी.
रौशन ने विद्यार्थियों से साझा किया सफलता का मंत्र
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए रौशन कुमार ने कहा कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए कठिन परिश्रम, Determination, Dedication और दृढ़ इच्छाशक्ति जरूरी है. लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहकर लगातार प्रयास करना चाहिए. उन्होंने विद्यार्थियों से अपने शिक्षकों की बात ध्यान से सुनने और उनके मार्गदर्शन को जीवन में अपनाने की अपील की. विशेष रूप से सेना में करियर बनाने के इच्छुक विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्होंने भारतीय सशस्त्र सेनाओं में उपलब्ध अवसरों और तैयारी के बारे में जानकारी दी तथा अपने अनुभव साझा किए.
रौशन ने अपने विद्यालय जीवन को याद करते हुए कहा कि कभी वे भी इसी प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों की कतार में खड़े होते थे. आज उसी विद्यालय में भारतीय वायु सेना के Flying Officer के रूप में सम्मानित होना उनके लिए बेहद गर्व और भावुकता का क्षण है.
2014 बैच के मेधावी छात्र रहे हैं रौशन
विद्यालय के प्राचार्य मनोज कुमार त्रिगुण ने बताया कि रौशन कुमार वर्ष 2014 बैच के विद्यार्थी रहे हैं. विद्यार्थी जीवन से ही वे मेधावी और अनुशासित छात्र थे. विद्यालयी शिक्षा के बाद उन्होंने Engineering की पढ़ाई पूरी की और AFCAT के माध्यम से भारतीय वायु सेना में चयनित हुए. प्रशिक्षण पूरा कर Flying Officer के रूप में अपने विद्यालय लौटना पूरे फाउंडेशन स्कूल परिवार के लिए गौरव का विषय है.
प्राचार्य ने कहा कि यह गर्व का क्षण है कि विद्यालय के पूर्ववर्ती विद्यार्थी आज भारतीय सशस्त्र सेनाओं के महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचकर देश की सेवा कर रहे हैं. प्रत्येक विद्यार्थी के भीतर असीम संभावनाएं होती हैं. जरूरत उन संभावनाओं को पहचानकर उन्हें सही दिशा देने की है. विद्यालय में मिले शिक्षा और संस्कार का प्रभाव समय के साथ सामने आता है और रौशन की उपलब्धि इसका उदाहरण है.
रौशन की सफलता पर उनके परिजनों के साथ उनके भाई-बहनों में भी खुशी का माहौल रहा. विद्यालय परिवार ने कहा कि पूर्ववर्ती विद्यार्थियों की सफलता वर्तमान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है और यह फाउंडेशन स्कूल की शिक्षा, संस्कार और मार्गदर्शन की बड़ी उपलब्धि है.
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