उनके मुताबिक, बक्सर की पहचान विश्वामित्र आश्रम और भगवान श्रीराम से जुड़े प्रसंगों के कारण विशेष रही है. ऐसे में यहां श्रीराम के नाम पर कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना शिक्षा के साथ पर्यटन और रोजगार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.
- माता सीता और दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय की पहल के बीच डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने उठाया बक्सर का मुद्दा
- कहा- राम की दीक्षास्थली में रोजगारपरक शिक्षा का केंद्र बने, आरा जाने की मजबूरी से छात्रों को मिले राहत
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : बिहार में नए विश्वविद्यालयों को लेकर सरकार की पहल के बीच बक्सर के लिए भी विश्वविद्यालय की मांग उठी है. बिहार कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने एनडीए सरकार से बक्सर में ‘श्रीराम कौशल विश्वविद्यालय’ स्थापित करने की मांग की है. उनका कहना है कि राम की दीक्षास्थली के रूप में प्रसिद्ध बक्सर को अब रोजगारपरक और आधुनिक कौशल शिक्षा के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए.
डॉ. वर्धन ने कहा कि पटना में माता सीता के नाम पर महिला विश्वविद्यालय और बेगूसराय में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय की प्रस्तावित पहल के बीच बक्सर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक, बक्सर की पहचान विश्वामित्र आश्रम और भगवान श्रीराम से जुड़े प्रसंगों के कारण विशेष रही है. ऐसे में यहां श्रीराम के नाम पर कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना शिक्षा के साथ पर्यटन और रोजगार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.
दो अंगीभूत कॉलेजों तक सीमित उच्च शिक्षा का दायरा
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि बक्सर में वर्तमान में सिर्फ दो अंगीभूत महाविद्यालय हैं. यहां पारंपरिक विषयों में भी उच्च शिक्षा के पर्याप्त विकल्प उपलब्ध नहीं हैं. परास्नातक के कई विषयों और शोध के लिए छात्रों को आरा या दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है. इससे आर्थिक रूप से कमजोर और दूरदराज के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना मुश्किल हो जाता है.
उन्होंने कहा कि वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय से चार जिलों के विभिन्न कॉलेज जुड़े हैं. ऐसे में बक्सर में अलग कौशल विश्वविद्यालय बनने से उस विश्वविद्यालय का भार कम होगा और शिक्षकों व शिक्षकेत्तर कर्मियों पर काम का दबाव भी घटेगा.
रोजगार, पर्यटन और शिक्षा को एक साथ जोड़ने का तर्क
डॉ. वर्धन ने बिहार विशिष्ट विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 का हवाला देते हुए कहा कि जब राज्य में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना पर विचार हो रहा है, तब बक्सर को भी इस पहल से जोड़ा जाना चाहिए. प्रस्तावित श्रीराम कौशल विश्वविद्यालय में रोजगारपरक पाठ्यक्रम, आधुनिक तकनीक और कौशल विकास से जुड़े विषयों की पढ़ाई शुरू की जा सकती है.
उनका कहना है कि ऐसे विश्वविद्यालय की स्थापना से बक्सर में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ने के साथ पर्यटन को भी नई पहचान मिल सकती है. धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों के विकास के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना भी बढ़ेगी. कांग्रेस ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से इस मांग पर गंभीरता से पहल करने की अपील की है.






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