स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला आयोजित की गई. कार्यशाला में जिले के विभिन्न विद्यालयों के शैक्षणिक नेतृत्वकर्ताओं और शिक्षकों को तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन तथा बच्चों की मनोवैज्ञानिक जरूरतों को समझने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया.
- बक्सर में मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण पर विशेष कार्यशाला, शिक्षकों को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
- डीएम साहिला बोलीं - सुरक्षित और भावनात्मक रूप से मजबूत बच्चे ही दिखा सकते हैं अपनी पूरी क्षमता
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : बच्चों की पढ़ाई के साथ अब उनके मन, भावनाओं और मानसिक स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाने की दिशा में बक्सर जिला प्रशासन ने विशेष पहल की है. जिला प्रशासन की महत्वाकांक्षी 'मिशन ज्ञानार्जन' के तहत शनिवार को राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय, बक्सर के ऑडिटोरियम में मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला आयोजित की गई. कार्यशाला में जिले के विभिन्न विद्यालयों के शैक्षणिक नेतृत्वकर्ताओं और शिक्षकों को तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन तथा बच्चों की मनोवैज्ञानिक जरूरतों को समझने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया.
कार्यक्रम का उद्घाटन डीएम साहिला ने दीप प्रज्वलित कर किया. कार्यशाला का आयोजन जिला शिक्षा कार्यालय, बक्सर द्वारा किया गया, जबकि तकनीकी सहयोग वर्ल्डबीइंग इंडिया की टीम ने प्रदान किया. इस दौरान शिक्षकों को बताया गया कि बच्चों की सफलता केवल परीक्षा के अंकों से तय नहीं होती, बल्कि उनका मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
तनाव से निपटने और भावनाओं को समझने का प्रशिक्षण
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण की समझ विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया. शिक्षकों को तनाव प्रबंधन और भावनात्मक संतुलन के व्यावहारिक तरीके बताए गए, ताकि वे स्वयं के साथ-साथ विद्यार्थियों की भावनात्मक जरूरतों को भी बेहतर ढंग से समझ सकें.
विशेषज्ञों ने बच्चों के व्यवहार, उनकी मानसिक स्थिति और मनोवैज्ञानिक जरूरतों की पहचान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की. इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से शिक्षकों को व्यक्तिगत क्षमताओं की पहचान, सकारात्मक परिवर्तन और बच्चों के साथ संवेदनशील व्यवहार के लिए उन्मुख किया गया.
स्कूलों में बनेगा सुरक्षित और सकारात्मक माहौल
कार्यशाला का एक प्रमुख उद्देश्य केजीबीवी, पीएम श्री और मॉडल स्कूलों में सुरक्षित, सकारात्मक, संवेदनशील और सहयोगात्मक वातावरण तैयार करना रहा. प्रशासन का मानना है कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व और भावनात्मक विकास की भी महत्वपूर्ण जगह है.
डीएम साहिला ने कहा कि 'मिशन ज्ञानार्जन' का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है.' उन्होंने कहा कि जब बच्चों को मानसिक और भावनात्मक रूप से सुरक्षित वातावरण मिलेगा, तभी वे अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ सकेंगे.
'हर बच्चे को समझना भी शिक्षक की बड़ी जिम्मेदारी'
कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को यह संदेश भी दिया गया कि बदलते सामाजिक परिवेश में बच्चों की समस्याओं और भावनाओं को समझना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है. पढ़ाई के दबाव, प्रतिस्पर्धा और अन्य परिस्थितियों के बीच बच्चे किस मानसिक स्थिति से गुजर रहे हैं, इसकी समय रहते पहचान कर उन्हें सहयोग देना आवश्यक है.
मिशन ज्ञानार्जन के इस नए प्रयास के जरिए बक्सर प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि अब शिक्षा की सफलता सिर्फ किताबों और परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्वस्थ मन, मजबूत भावनाएं और सुरक्षित बचपन भी शैक्षणिक विकास का अहम हिस्सा होंगे.
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