वीडियो : बक्सर में वामन द्वादशी पर निकली भव्य रथ यात्रा, भगवान वामन के जयकारों से गुंजायमान हुआ सिद्धाश्रम बक्सर ..

श्री रामेश्वर नाथ मंदिर में विधि-विधान से पूजन-अर्चन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य रथ यात्रा का शुभारंभ हुआ. इसके बाद भगवान वामन का सुसज्जित रथ नगर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ वामन मंदिर की ओर बढ़ा.





                           


  • वामन चेतना मंच और वामन ग्लोबल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में रामेश्वर नाथ मंदिर से वामन मंदिर तक निकली यात्रा
  • पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे, पूज्य संतों व विधायकों ने खींची रथ की रज्जू, श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : धार्मिक और पौराणिक नगरी सिद्धाश्रम बक्सर में वामन द्वादशी के पावन अवसर पर भव्य एवं अलौकिक रथ यात्रा का आयोजन बेहद धूमधाम से हुआ. "वामन चेतना मंच" और "वामन ग्लोबल फाउंडेशन" के संयुक्त तत्वावधान में निकाली गई इस रथ यात्रा से पूरी नगरी भक्ति-रस में सराबोर नजर आई.

बुधवार को निर्धारित समय पर श्री रामेश्वर नाथ मंदिर में विधि-विधान से पूजन-अर्चन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य रथ यात्रा का शुभारंभ हुआ. इसके बाद भगवान वामन का सुसज्जित रथ नगर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ वामन मंदिर की ओर बढ़ा.

संतों और जनप्रतिनिधियों ने थामी रथ की रज्जू इस पावन अवसर पर धर्म और राजनीति के कई प्रमुख चेहरे एक साथ भगवान की सेवा में लीन दिखाई दिए. पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, बक्सर सदर विधायक आनंद मिश्र, राजपुर विधायक संतोष कुमार निराला, सीताराम विवाह महोत्सव आश्रम के महंत राजा राम शरण दास जी महाराज, बसांव पीठाधीश्वर अच्युत प्रपन्नाचार्य जी महाराज तथा कथावाचक रणधीर ओझा समेत सिद्धाश्रम बक्सर के तमाम संतों, महंतों, प्रबुद्ध जनों और नेताओं ने भगवान वामन के रथ की रज्जू (रस्सी) थामकर रथ को आगे बढ़ाया.

पुष्प वर्षा और जयकारों से भक्तिमय हुआ वातावरण रामेश्वर नाथ मंदिर से वामन मंदिर के मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों द्वारा रथ यात्रा का भव्य स्वागत किया गया. लोगों ने अपने घरों की छतों से रथ पर पुष्प वर्षा की. यात्रा में शामिल हजारों श्रद्धालु हाथों में धार्मिक ध्वज लिए "जय वामन देव" और "हर-हर महादेव" के उद्घोष करते हुए भक्तिभाव से आगे बढ़ते रहे.

रथ यात्रा के वामन मंदिर पहुंचने पर विशेष महाआरती और महाप्रसाद का आयोजन किया जाएगा. इस दौरान क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से सनातन संस्कृति और सामाजिक समरसता को नई मजबूती मिलती है.

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