वीडियो : मौत के बाद भी सुकून नहीं : शव को घसीट कर पोस्टमार्टम के लिए ले जाने का मामला आया सामने ..

शव लेकर पोस्टमार्टम हाउस में पहुंचे बिहारी कुमार नामक व्यक्ति ने शव को रिक्शे से उतार कर परिसर में रखा और कफ़न में लिपटी लाश को घसीटते हुए पोस्टमार्टम हाउस के अंदर ले गया.





                           




- जीआरपी ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा
- कर्मी ने अकेले होने का हवाला देकर किया अमानवीय व्यवहार 

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिले में स्वास्थ्य विभाग की अमानवीय तस्वीर सामने आई है. जहां पोस्टमार्टम हाउस में कर्मी कथित तौर पर सहयोगियों के अभाव में शव को घसीट कर रूम में ले जाता हुआ दिखाई दे रहा है. इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद न सिर्फ स्वास्थ्य महकमे बल्कि मनुष्यता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.

दरअसल, बीते 31 अगस्त 2026 को रेलवे पैदल पुल के पास मिले एक अज्ञात मृतक के शव को जीआरपी के द्वारा पोस्टमार्टम के लिए पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया था. शव लेकर पोस्टमार्टम हाउस में पहुंचे बिहारी कुमार नामक व्यक्ति ने शव को रिक्शे से उतार कर परिसर में रखा और कफ़न में लिपटी लाश को घसीटते हुए पोस्टमार्टम हाउस के अंदर ले गया.

जिस व्यक्ति ने इस घटना का  वीडियो बनाया उससे बिहारी नामक व्यक्ति से बात की और इस अमानवीयता का कारण पूछा. बिहारी ने साफ कहा कि शव को उठाने के लिए कम से कम चार लोगों की आवश्यकता होती है लेकिन यहां तो वह अकेले ही कार्य कर रहा है. साथ ही उसे मेहनताना भी काफी कम है. ऐसे में उसके पास शव को घसीट कर ले जाने की अतिरिक्त कोई रास्ता नहीं है.

सिविल सर्जन डॉ शिवकुमार प्रसाद चक्रवर्ती ने बताया कि बिहारी नाम का उनका कोई कर्मी है ही नहीं. उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम हाउस में शंकर नाम का व्यक्ति कार्यरत है. हालांकि उन्होंने कहा कि वह इस घटना की जानकारी ले रहे हैं.

इस मामले में जीआरपी थानाध्यक्ष से बात करने पर उन्होंने बताया कि बिहारी नाम का वह व्यक्ति उनके यहां काम करता है. हालांकि उनके यहां से शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस आदि की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में निजी तौर पर किसी तरह शव को पोस्टमार्टम हाउस भिजवाया जाता है.

बिहारी नामक व्यक्ति के मेहनताना बढ़ाने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि उनके स्तर से इस पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता है.

बहरहाल, इस तस्वीर ने मानवता को शर्मसार कर दिया है और यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या मृत्यु के बाद क्या शव के साथ हो रहा है व्यवहार उचित है? और अगर नहीं, तो इस घटना की जवाबदेही किसकी है?















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