सेंट्रल जेल में पेट्रोल पंप खोलने का रास्ता साफ, सरकार से मिली हरी झंडी ..

कारा के दक्षिणी हिस्से में मुख्य सड़क से सटी जमीन का चयन किया गया है. योजना शुरू होने के बाद मुक्त कारागार के बंदियों को पेट्रोल पंप के संचालन से जुड़े काम में लगाया जाएगा.






                           



  • एचपीसीएल लगाएगी और चलाएगी पंप, दक्षिणी परिसर में मुख्य सड़क से सटी जमीन का हुआ चयन
  • मुक्त कारागार के करीब डेढ़ दर्जन बंदियों को मिलेगा नियमित रोजगार, कौशल के अनुसार 147 से 397 रुपए तक पारिश्रमिक

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : केंद्रीय कारा में अब बंदियों के लिए सजा के साथ रोजगार और आत्मनिर्भरता का रास्ता भी खुलेगा. कारा एवं सुधार विभाग की ओर से केंद्रीय कारा परिसर में पेट्रोल पंप खोलने की योजना को सरकार से मंजूरी मिल गई है. हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) कारा के बाहरी परिसर में पेट्रोल पंप स्थापित कर इसका संचालन करेगा. इसके लिए केंद्रीय कारा के दक्षिणी हिस्से में मुख्य सड़क से सटी जमीन का चयन किया गया है. योजना शुरू होने के बाद मुक्त कारागार के बंदियों को पेट्रोल पंप के संचालन से जुड़े काम में लगाया जाएगा.

करीब 80 एकड़ में फैले केंद्रीय कारा परिसर में मुक्त कारागार भी शामिल है. दक्षिणी हिस्से में पर्याप्त खाली जमीन होने के साथ यह मुख्य सड़क से जुड़ी है. इसी वजह से पेट्रोल पंप के लिए इस स्थान को उपयुक्त माना गया. अधिकारियों के मुताबिक शुरुआती चरण में करीब डेढ़ दर्जन बंदियों को रोजगार से जोड़ने की योजना है. जरूरत और व्यवस्था के अनुसार आगे यह संख्या बढ़ाई भी जा सकती है.

शहर में काम की तलाश में भटकने की जगह जेल परिसर में ही मिलेगा रोजगार

मुक्त कारागार के बंदी फिलहाल काम की तलाश में नगर क्षेत्र में जाते हैं और शाम को वापस लौटते हैं. हर दिन काम मिलना तय नहीं होता. कई बार काम नहीं मिलने पर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है. दूसरी समस्या मजदूरी को लेकर भी रहती है, क्योंकि बाहर मिलने वाले काम में पारिश्रमिक पहले से निर्धारित नहीं होता.

पेट्रोल पंप शुरू होने के बाद ऐसे बंदियों को जेल परिसर में ही नियमित काम मिलने का अवसर मिलेगा. काम के बदले जेल मैन्युअल के अनुसार निर्धारित पारिश्रमिक दिया जाएगा. इससे बंदियों को रोजगार के साथ काम का अनुभव और जिम्मेदारी निभाने का प्रशिक्षण भी मिलेगा.

कुशल बंदी को 397 रुपये तक मिलते हैं रोज

बिहार के जेल मैन्युअल के अनुसार सजायाफ्ता बंदियों को उनके काम और कौशल के आधार पर पारिश्रमिक दिया जाता है. निर्धारित श्रेणी के अनुसार चार घंटे काम करने वाले अकुशल बंदी को 147 रुपये, अकुशल को 294 रुपये, अर्द्धकुशल को 309 रुपये और कुशल बंदी को 397 रुपये प्रतिदिन तक पारिश्रमिक मिलता है.

पेट्रोल पंप पर काम के दौरान बंदियों को जिम्मेदारी के अनुरूप प्रशिक्षण और कार्य सौंपे जाने की संभावना है. इससे जेल से बाहर निकलने के बाद रोजगार हासिल करने में भी उन्हें व्यावहारिक अनुभव मिल सकता है.

जेल में हुनर सीख रहे बंदी, अब रोजगार से जुड़ने की तैयारी

कारा एवं सुधार विभाग लंबे समय से बंदियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण और रोजगार आधारित गतिविधियां चला रहा है. जेल में बंदियों को विभिन्न कामों का प्रशिक्षण दिया जाता है. कई जेलों में उनके द्वारा तैयार उत्पादों को दूसरी जेलों में उपयोग के लिए भेजा जाता है. उद्देश्य यह है कि सजा पूरी होने के बाद बंदी समाज में लौटें तो उनके पास कोई हुनर और काम का अनुभव हो.

बक्सर में इसी पहल के तहत हाल ही में मुक्ति आउटलेट की भी शुरुआत की गई है. यहां जेल में बंदियों द्वारा तैयार मसाले, साबुन समेत अन्य उत्पाद बिक्री के लिए रखे जाते हैं. अब पेट्रोल पंप की योजना को इसी कड़ी में रोजगार आधारित पहल के तौर पर देखा जा रहा है.

भास्कर एक्सपर्ट : रोजगार से मुख्यधारा में लौटने का अवसर

साहित्यकार रामेश्वर प्रसाद वर्मा बताते हैं कि बक्सर केंद्रीय कारा का इतिहास काफी पुराना और समृद्ध रहा है. यहां स्वतंत्रता सेनानियों के साथ जेपी आंदोलन से जुड़े लोग भी रह चुके हैं. जेल में पहले से ही फांसी की रस्सी समेत कई तरह के काम होते रहे हैं. उनका कहना है कि बंदियों को प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की योजनाएं उन्हें सजा पूरी होने के बाद सामान्य जीवन में लौटने के लिए तैयार करती हैं. पेट्रोल पंप जैसी पहल से उन्हें काम का व्यावहारिक अनुभव मिलने के साथ आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिलेगा.
















Post a Comment

0 Comments