कागजों पर 11 साल जलती रही 'बिजली', घर में रहा अंधेरा : बक्सर उपभोक्ता आयोग ने बिजली विभाग की खोली पोल ..

जवाब मिला— "कागजों पर आपका कनेक्शन चालू हो चुका है, इसलिए बिल देना पड़ेगा. यदि लाइट नहीं जलाई है, तो मुखिया-सरपंच से लिखवाकर लाइए." 





               






- बिना सर्विस तार और मीटर थमा दिया ₹45 हजार का बिल, अफसर बोले— 'कागज पर चालू है कनेक्शन, पैसा तो भरना ही पड़ेगा'

- उपभोक्ता आयोग ने लेट फाइन खत्म कर 45 दिनों में मीटर लगाने का दिया आदेश, विभाग पर ठोका ₹5,000 का हर्जाना

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : बिजली विभाग की लापरवाही और अजब-गजब कार्यशैली का एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां उपभोक्ता के घर पर 11 वर्षों तक न तो बिजली का तार पहुंचा और न ही मीटर लगा, लेकिन कागजों में बिजली जलाकर विभाग ने ₹45,000 से अधिक का बकाया बिल थमा दिया. इस अंधेरगर्दी पर कड़ा संज्ञान लेते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बक्सर ने विद्युत विभाग को कड़ी फटकार लगाई है. आयोग के अध्यक्ष वेद प्रकाश सिंह और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने बिजली कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए उपभोक्ता को राहत दी और विभाग पर ₹5,000 का जुर्माना लगाया है.

2015 में दिया था आवेदन, बिना तार-मीटर थमा दिया पहला बिल

इटाढ़ी थाना क्षेत्र के कादीपुर (सिसराढ़) निवासी सोनू कुमार चौबे ने 12 फरवरी 2015 को अपने पिता त्रिभुवन चौबे के नाम से घरेलू बिजली कनेक्शन के लिए विधिवत आवेदन दिया था. उन्होंने सिक्योरिटी मनी व आपूर्ति शुल्क के रूप में ₹475 भी जमा किए. अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि महीने भर में मीटर लगाकर बिजली चालू कर दी जाएगी.

महीनों इंतजार के बाद जब घर में रोशनी नहीं पहुंची, तो पीड़ित बिजली दफ्तर पहुंचे. वहां कनीय विद्युत अभियंता (JEE) ने नया ही खेल शुरू कर दिया. उपभोक्ता को बताया गया कि उन पर ₹2,087 का बकाया निकल चुका है. जब पीड़ित ने पूछा कि बिना कनेक्शन और मीटर के बिल कैसा, तो जवाब मिला— "कागजों पर आपका कनेक्शन चालू हो चुका है, इसलिए बिल देना पड़ेगा. यदि लाइट नहीं जलाई है, तो मुखिया-सरपंच से लिखवाकर लाइए." कनेक्शन मिलने की उम्मीद में आवेदक ने 20 जनवरी 2016 को इस कथित बकाये का भी ऑनलाइन भुगतान कर दिया, फिर भी उनके घर लाइन नहीं जोड़ी गई.

11 साल तक जलती रही 'कागजी बिजली', बिल पहुंचा ₹45,081

सालों तक दफ्तरों के चक्कर काटने और 2018 में सुधार की अर्जी देने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई. उलटे विभाग ने बिना मीटर के ही औसत खपत और विलंब अधिभार (लेट फाइन) जोड़ते हुए फरवरी 2025 तक कुल ₹45,081 का बिल बना दिया, जिसमें ₹21,728 से अधिक केवल लेट फाइन था.

परेशान होकर पीड़ित ने लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के पास गुहार लगाई. वहां सहायक विद्युत अभियंता की जांच में यह सच सामने आ गया कि उपभोक्ता के परिसर में कोई सर्विस तार ही नहीं है और घर पर ताला लटका है. कुकुढ़ा पंचायत के मुखिया और सरपंच ने भी लिखित प्रमाण दिया कि गांव के इस मकान में कभी कोई बिजली कनेक्शन या मीटर लगा ही नहीं.

इसके बावजूद बिजली विभाग अपनी गलती मानने के बजाय अजीब दलील देने लगा कि उपभोक्ता ने मुकदमा बनाने के लिए खुद ही मुख्य लाइन से अपना तार हटा दिया था.

आयोग की सख्त टिप्पणी: 11 वर्षों तक मीटर न लगाना सेवा में घोर त्रुटि

उपभोक्ता आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विभाग के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया. आयोग ने पाया कि बिजली विभाग 11 वर्षों में यह साबित करने का कोई साक्ष्य पेश नहीं कर सका कि उसने वास्तव में परिसर में कब कनेक्शन दिया था और इतने वर्षों तक मीटर क्यों नहीं लगाया गया. आयोग ने स्पष्ट किया कि बिना कनेक्शन और बिना मीटर के लगातार भारी-भरकम सरचार्ज जोड़कर बिल भेजना सेवा में गंभीर कमी (Deficiency in Service) है.

आयोग ने सुनाया यह फैसला:

  1. 45 दिनों में कनेक्शन व मीटर: बिजली विभाग आदेश की तिथि से 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता से नया आवेदन लेकर विधिवत कनेक्शन चालू करे और मीटर स्थापित करे.
  2. सरचार्ज पूरी तरह माफ: विभाग अब तक जोड़े गए संपूर्ण विलंब अधिभार (लेट फाइन) को समाप्त कर नियमानुसार नया बिल जारी करे.
  3. ₹5,000 की क्षतिपूर्ति: 11 वर्षों तक उपभोक्ता को हुई शारीरिक, मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना तथा वाद खर्च के एवज में विभाग उपभोक्ता को एकमुश्त ₹5,000 का भुगतान करे.









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