उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, अवैध कृत्यों, कर्तव्य में घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और पुलिस विभाग की छवि धूमिल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

- प्राथमिकी में देरी, आरोपितों को छोड़ने और महिला सिपाहियों को गैराज में रखने समेत कई गंभीर आरोप जांच में मिले सही
- हथियार व शराबबंदी के मामलों में अज्ञात के खिलाफ केस, वरीय अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी का भी उल्लेख
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी संभालने वाली मुरार थानाध्यक्ष नेहा कुमारी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे हैं. लगातार मिल रही शिकायतों और जांच प्रतिवेदनों की समीक्षा के बाद बक्सर पुलिस प्रशासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, अवैध कृत्यों, कर्तव्य में घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और पुलिस विभाग की छवि धूमिल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. पुलिस निरीक्षक, डुमरांव अंचल की ओर से सौंपे गए जांच प्रतिवेदनों में 11 बिंदुओं पर लगाए गए आरोपों को सही पाया गया है. निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र, बक्सर निर्धारित किया गया है.
प्राथमिकी दर्ज करने में देरी से लेकर आरोपितों को छोड़ने तक के आरोप
जांच रिपोर्ट में चौंगाई निवासी अभिषेक कुमार की शिकायत का प्रमुखता से उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, 21 अगस्त 2026 को उनके भाई ने मारपीट की घटना में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन उसी दिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई. इस बीच, ईआरवी के पुलिस पदाधिकारी ने घटना से जुड़े पवन कुमार और विकास कुमार को थानाध्यक्ष के सुपुर्द किया था. आरोप है कि दोनों को उसी रात छोड़ दिया गया. पूछताछ में थानाध्यक्ष ने दोनों के नाबालिग होने की बात कहते हुए स्टेशन डायरी में प्रविष्टि कर छोड़ने की बात स्वीकार की.
हालांकि, अगले दिन 22 अगस्त को दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया और न्यायिक हिरासत में बक्सर केंद्रीय कारा भेज दिया गया. जांच प्रतिवेदन में इस शिकायत को सही पाया गया है.
मसर्हिया गांव में हथियार से धमकाने के मामले में भी पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में आई. रिपोर्ट के मुताबिक, 3 अक्टूबर की रात बंटी कुमार के देशी कट्टा लेकर लोगों को धमकाने की सूचना पर पुलिस पहुंची थी. आरोप है कि बंटी कुमार हथियार फेंककर भागने लगा, लेकिन पुलिस बल ने उसे पकड़ लिया. इसके बावजूद मुरार थाना कांड संख्या 82/26 में आर्म्स एक्ट के तहत अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई. जांच में वर्ष 2026 के दो अन्य आर्म्स एक्ट मामलों में भी अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज किए जाने का उल्लेख है.
इसके अतिरिक्त, शराबबंदी से जुड़े आठ मामलों में अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और अनुसंधान के दौरान किसी भी मामले का उद्भेदन नहीं होने की बात जांच रिपोर्ट में कही गई है.
महिला सिपाहियों की सुविधाओं की अनदेखी, कई मामलों में जवाब भी नहीं
जांच रिपोर्ट में महिला सिपाहियों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने का मामला भी शामिल है. आरोप है कि महिला पुलिसकर्मियों के लिए निर्धारित बैरक खाली नहीं कराया गया, जिसके कारण उन्हें थाने के सरकारी वाहनों के गैराज में रहना पड़ रहा था. शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें पुरुषों के शौचालय का इस्तेमाल करना पड़ता था. डीएसपी, डुमरांव की ओर से बैरक खाली कर महिला सिपाहियों को उनके निर्धारित कमरे में शिफ्ट करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन इसका पालन नहीं किया गया.
मुरार थाना कांड संख्या 44/26 में गंभीर जख्म होने के बावजूद धारा 109 नहीं जोड़ने का मामला भी जांच में सामने आया. इस संबंध में एसपी कार्यालय ने 12 सितंबर 2026 को स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन आदेश के अनुसार, थानाध्यक्ष ने जवाब नहीं दिया.
जांच रिपोर्ट में विधानसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तारी की धीमी गति, दर्ज और निष्पादित मामलों के आंकड़ों में विरोधाभास, लंबित वारंट और इश्तेहार के निष्पादन में लापरवाही तथा विशेष मामलों में गिरफ्तारी नहीं होने जैसे आरोप भी शामिल हैं. अगस्त से अक्टूबर 2026 के बीच शराब के अवैध कारोबार पर रोकथाम और बरामदगी के लिए अपेक्षित रुचि नहीं लेने की बात भी कही गई है.
इसके अलावा, जनवरी और फरवरी 2026 में पर्व-त्योहारों के दौरान असामाजिक तत्वों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की समीक्षा में किसी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई नहीं किए जाने का उल्लेख है. कई मामलों में वरीय अधिकारियों की ओर से स्पष्टीकरण मांगे जाने के बावजूद जवाब नहीं देने की बात भी आदेश में दर्ज है.
लगातार शिकायतों और जांच प्रतिवेदनों की समीक्षा के बाद पुलिस प्रशासन ने नेहा कुमारी को निलंबित कर दिया है. इस कार्रवाई से मुरार थाने की कार्यशैली और पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. हालांकि, निलंबन विभागीय कार्रवाई है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित विभागीय प्रक्रिया के अनुसार ही तय होगा.





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