15 बिंदुओं का मांग-पत्र सौंपकर कर निर्धारण, बकाया राशि, वसूली और बैंक खातों से जुड़े अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांगी हैं. मंच का कहना है कि स्पष्ट रिकॉर्ड सामने आने से करदाताओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि उनसे किस आधार पर और कितनी राशि वसूली जा रही है.

- कर निर्धारण के आधार वर्ष से लेकर निजी एजेंसी के डाटा तक की जानकारी मांगने की उठी आवाज
- पुराने-नए दर से वसूली और बकाया राशि में गड़बड़ी का आरोप, अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नगर परिषद डुमरांव में होल्डिंग टैक्स और सम्पत्ति कर की वसूली को लेकर सामाजिक मंच ने अब दस्तावेजों के साथ पारदर्शिता का सवाल उठाया है. 30 सितंबर की शाम पुराने चकबंदी कार्यालय के पास हुई बैठक के बाद मंच ने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को 15 बिंदुओं का मांग-पत्र सौंपकर कर निर्धारण, बकाया राशि, वसूली और बैंक खातों से जुड़े अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांगी हैं. मंच का कहना है कि स्पष्ट रिकॉर्ड सामने आने से करदाताओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि उनसे किस आधार पर और कितनी राशि वसूली जा रही है.
2011-12 से 2021-22 तक के आधार वर्ष पर मांगा स्पष्ट जवाब
सामाजिक मंच की बैठक श्री ललन कुशवाहा की अध्यक्षता में हुई, जबकि संचालन श्री समता कुमार ने किया. बैठक में ललन सिंह यादव, राजेन्द्र केशरी, बलराम यादव, मो. शमीम, रिंकू यादव, रमेश केशरी, सुरेश यादव, बीरबल चौधरी, बुधन यादव और कैलाश कुमार समेत अन्य सदस्यों ने हिस्सा लिया. मंच के संयोजक प्रदीप कुमार शरण ने बैठक का समापन किया.
मंच ने सबसे पहले यह स्पष्ट करने की मांग की है कि डुमरांव में सम्पत्ति कर वास्तव में किस वित्तीय वर्ष से लागू हुआ. मांग-पत्र में 2011-12, 2013-14, 2016-17 और 2021-22 जैसे अलग-अलग वर्षों का उल्लेख करते हुए संबंधित सरकारी आदेश और अधिसूचना मांगी गई है. साथ ही पुराने दर से होल्डिंग टैक्स की वसूली कब तक हुई और नई दर कब लागू हुई, इसका भी पूरा विवरण मांगा गया है.
15 बिंदुओं में मांगा कर-वसूली का पूरा रिकॉर्ड
सामाजिक मंच ने वित्तीय वर्ष 2011-12 से 2026-27 तक होल्डिंग टैक्स और सम्पत्ति कर से हुई वर्षवार वसूली तथा जिस बैंक खाते में राशि जमा की गई, उसका विवरण मांगा है. इसके अलावा करदाताओं को दर बढ़ने की सूचना कब और किस माध्यम से दी गई, पहला डिमांड नोटिस किस वर्ष जारी हुआ और वार्ड 1 से 35 तक कुल कितनी होल्डिंग दर्ज है, इसकी जानकारी भी मांगी गई है.
मंच ने प्रधान मुख्य सड़क, मुख्य सड़क और अन्य सड़क की श्रेणी तय करने के सरकारी मानक, आवासीय व वाणिज्यिक संपत्तियों की कर दरों का आधार तथा 1 अप्रैल 2023 से 1 अक्टूबर 2026 तक कर वसूली में लगी निजी एजेंसियों के अनुबंध और वसूली का ब्योरा भी मांगा है.
सबसे अहम मांगों में निजी एजेंसियों के सॉफ्टवेयर में दर्ज करदाता नाम, पीआईडी, पुराने और नए होल्डिंग नंबर के मिलान की जानकारी तथा बकाया राशि की पूरी सूची उपलब्ध कराने की मांग शामिल है. मंच ने डिमांड और भुगतान राशि में किए गए किसी भी संशोधन की अनुमति और उससे जुड़े रिकॉर्ड की भी प्रमाणित प्रतियां मांगी हैं.
सामाजिक मंच का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि कर निर्धारण और वसूली की प्रक्रिया को स्पष्ट और पारदर्शी बनाना है. मंच ने विवादित या त्रुटिपूर्ण बकाया राशि की अभिलेखीय जांच, आवश्यक सुधार और सभी संबंधित आदेशों व अभिलेखों का बिंदुवार जवाब देने की मांग की है.




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