66 की उम्र में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग जारी, 1000 से ज्यादा आरटीआई और 65 जनहित याचिकाओं का सफर ..

उन्होंने अब तक एक हजार से अधिक आरटीआई आवेदन दायर किए हैं और पटना उच्च न्यायालय में 65 जनहित याचिकाएं दाखिल की हैं. इस संघर्ष में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला, वहीं मुकदमों, धमकियों और जेल जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा.




                           



  • सोलर स्ट्रीट लाइट से लेकर धान, पीडीएस और पाठ्यपुस्तक मामलों तक उठाई आवाज
  • संघर्ष में जेल भी गए आरटीआई कार्यकर्ता शिव प्रकाश राय

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : उम्र 66 वर्ष, लेकिन जनहित के मुद्दों को लेकर जज्बा आज भी किसी युवा से कम नहीं. बक्सर के चर्चित आरटीआई कार्यकर्ता शिव प्रकाश राय पिछले दो दशक से अधिक समय से भ्रष्टाचार और सरकारी योजनाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाते आ रहे हैं. वर्ष 2005 में सूचना का अधिकार कानून लागू होने से पहले से ही इसके आंदोलन से जुड़े शिव प्रकाश राय के अनुसार, उन्होंने अब तक एक हजार से अधिक आरटीआई आवेदन दायर किए हैं और पटना उच्च न्यायालय में 65 जनहित याचिकाएं दाखिल की हैं. इस संघर्ष में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला, वहीं मुकदमों, धमकियों और जेल जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा.


शिव प्रकाश राय का कहना है कि वह सत्य के मार्ग पर चलते हैं और जनता, समाज तथा अन्याय के खिलाफ लड़ाई के लिए किसी भी कुर्बानी से पीछे नहीं हटेंगे. सूचना के अधिकार को उन्होंने सरकारी व्यवस्था से सवाल पूछने और जनहित से जुड़े मामलों को सामने लाने का माध्यम बनाया. सोलर स्ट्रीट लाइट, धान, पीडीएस, पाठ्यपुस्तक, सीटी स्कैन, गंगा सफाई और अन्य मामलों को लेकर उन्होंने लगातार आवाज उठाई.

सोलर स्ट्रीट लाइट मामला बना सबसे बड़ा संघर्ष

शिव प्रकाश राय के संघर्ष में वर्ष 2008 का सोलर स्ट्रीट लाइट मामला सबसे चर्चित रहा. उनके अनुसार, पंचायतों में सोलर लाइट लगाने में कथित अनियमितता और अधिक कीमत पर खरीद का मामला सामने आया था. उन्होंने सूचना के अधिकार के माध्यम से इससे संबंधित जानकारी जुटाई और मामला पटना उच्च न्यायालय तक पहुंचाया.

उनके मुताबिक, उस समय बक्सर में 142 पंचायतें थीं और इनमें से 141 पंचायतों के मुखिया एवं पंचायत सचिवों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी. उनका कहना है कि सोलर लाइट की कीमत अलग-अलग स्तरों पर अलग बताई गई थी. मुखिया स्तर पर इसकी कीमत 32 हजार रुपये, प्रखंड विकास पदाधिकारी स्तर पर 34 हजार रुपये और जिला स्तर पर 46 हजार रुपये बताई गई थी.

भ्रष्टाचार उजागर करने पर प्राथमिकी, 29 दिन जेल में रहे

सोलर लाइट मामले को उठाने के बाद शिव प्रकाश राय के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज हुई. उनके अनुसार, तत्कालीन जिलाधिकारी विष्णु देव प्रसाद सिंह के स्तर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी के बाद उन्हें करीब 29 दिनों तक जेल में रहना पड़ा.

शिव प्रकाश राय का कहना है कि बाद में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के पर्यवेक्षण में हुई जांच में उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे को गलत बताया गया. उनके अनुसार, जांच में यह बात सामने आई कि भ्रष्टाचार का मामला उजागर करने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी.

धान घोटाले में 151 चावल मिल संचालकों पर प्राथमिकी

शिव प्रकाश राय के अनुसार, अरबों रुपये के धान घोटाले का मामला भी उन्होंने उठाया. उनके मुताबिक, इस मामले में बक्सर जिले के 151 चावल मिल संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. धान की खरीद और मिलिंग से जुड़ी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर उन्होंने दस्तावेजों और सरकारी सूचनाओं के आधार पर मामला सामने लाने का प्रयास किया.

‘बढ़ चला बिहार’ के 500 करोड़ के मामले पर उठाए सवाल

उन्होंने ‘बढ़ चला बिहार’ योजना से जुड़े करीब 500 करोड़ रुपये के कथित फर्जीवाड़े का मामला भी उठाया. शिव प्रकाश राय के अनुसार, मामला पटना उच्च न्यायालय तक पहुंचा और न्यायालय के हस्तक्षेप से इसे रुकवाया गया.

उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं में जनता की राशि खर्च होती है, इसलिए योजनाओं में पारदर्शिता और खर्च का उचित हिसाब जरूरी है.

गंगा सफाई की 256 करोड़ की परियोजना पर भी उठाई आपत्ति

शिव प्रकाश राय के अनुसार, पटना में गंगा तट की घास और बालू की सफाई के नाम पर तैयार 256 करोड़ रुपये की परियोजना में भी कथित गड़बड़ी का मामला उन्होंने उठाया. उनका कहना है कि सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़ी योजनाओं में वास्तविक जरूरत और खर्च की पारदर्शिता पर सवाल उठाना जरूरी है.

सीटी स्कैन, पाठ्यपुस्तक और पीडीएस मामले भी उठाए

आरटीआई कार्यकर्ता के अनुसार, राज्य के नौ चिकित्सा महाविद्यालय अस्पतालों में सीटी स्कैन मशीन से जुड़े मामले को भी उन्होंने सामने लाया. इसके अलावा स्कूली बच्चों के लिए 250 करोड़ रुपये की पाठ्यपुस्तक खरीद से जुड़े मामले और जन वितरण प्रणाली में 305 करोड़ रुपये के खाद्यान्न घोटाले को भी उन्होंने प्रमुख मामलों में शामिल बताया.

उनके द्वारा उठाए गए अन्य प्रमुख मामलों में कीट, धन और नलकूप से जुड़े मामले भी शामिल हैं. शिव प्रकाश राय के अनुसार, इन मामलों में उन्होंने सूचना के अधिकार के जरिए जानकारी हासिल कर संबंधित स्तर पर कार्रवाई की मांग की.

65 जनहित याचिकाएं, राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान

शिव प्रकाश राय के मुताबिक, उन्होंने पटना उच्च न्यायालय में अब तक 65 जनहित याचिकाएं दाखिल की हैं. जनहित के मुद्दों को लगातार उठाने के कारण उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली.

उनके अनुसार, आईबीएन द्वारा आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यक्रम में उन्हें आम जनता की आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता के रूप में अभिनेता अमिताभ बच्चन के मंच पर सम्मानित किया गया था.

उम्र बढ़ी, लेकिन जनहित की लड़ाई नहीं रुकी

शिव प्रकाश राय का कहना है कि जनता की आवाज उठाने के दौरान उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन इससे उनका अभियान नहीं रुका. 66 वर्ष की उम्र में भी वह सूचना के अधिकार के माध्यम से सरकारी योजनाओं और जनहित से जुड़े मामलों पर सवाल उठाते हैं.

उनका कहना है कि वह सत्य के रास्ते पर चलते हुए जीवन की अंतिम सांस तक जनता की आवाज उठाते रहेंगे. उनके लिए उम्र अब भी सक्रियता की राह में बाधा नहीं बनी है और सूचना का अधिकार आज भी जनहित की लड़ाई में उनका प्रमुख हथियार है.

















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