गांधी जयंती पर जेल के दरवाजे खुले, 73 से 93 साल के 7 सजायाफ्ता बंदी हुए आजाद ..

राज्य सरकार के एकबारगी परिहार के निर्णय के तहत जिला और राज्य स्तरीय समितियों की अनुशंसा के बाद यह कार्रवाई की गई. इनमें केंद्रीय कारा, बक्सर में बंद चार तथा मुक्त कारागार, बक्सर में संसीमित तीन सजायाफ्ता बंदी शामिल हैं.




                           


  • रोहतास के चार बंदियों समेत बक्सर की जेल से 7 को मिली रिहाई, राज्य सरकार के एकबारगी परिहार के फैसले के बाद हुई कार्रवाई
  • 84 से 93 साल की उम्र में मिली आजादी, केंद्रीय कारा के 4 और मुक्त कारागार के 3 बंदी हुए कारामुक्त

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : गांधी जयंती के अवसर पर शुक्रवार को बक्सर की जेलों में उस समय खुशी का माहौल बन गया, जब 73 से 93 वर्ष की उम्र के सात सजायाफ्ता बंदियों को कारामुक्त कर दिया गया. राज्य सरकार के एकबारगी परिहार के निर्णय के तहत जिला और राज्य स्तरीय समितियों की अनुशंसा के बाद यह कार्रवाई की गई. इनमें केंद्रीय कारा, बक्सर में बंद चार तथा मुक्त कारागार, बक्सर में संसीमित तीन सजायाफ्ता बंदी शामिल हैं.

सबसे उम्रदराज 93 वर्षीय बंदी

केंद्रीय कारा से रिहा होने वालों में रोहतास के सासाराम निवासी 84 वर्षीय हरिवंश राम, 93 वर्षीय रामवृक्ष कोईरी, 80 वर्षीय रामाश्रय कोईरी और 83 वर्षीय सत्यनारायण राम शामिल हैं. इनमें रामवृक्ष कोईरी की उम्र 93 वर्ष है और वे रिहा होने वाले बंदियों में सबसे अधिक उम्र के हैं.

मुक्त कारागार से तीन बंदियों की रिहाई

मुक्त कारागार, बक्सर में संसीमित तीन बंदियों को भी गांधी जयंती पर रिहाई मिली. इनमें पटना जिले के 73 वर्षीय विश्वनाथ यादव, पश्चिम चम्पारण जिले के 81 वर्षीय हंसराज राम उर्फ हंसराज चमार और सहरसा जिले के 78 वर्षीय बलराम सिंह शामिल हैं.

राज्य सरकार के निर्णय के आलोक में जिला स्तरीय समिति से प्राप्त अनुशंसाओं पर राज्य स्तरीय समिति की बैठक में इन सजायाफ्ता बंदियों को कारामुक्त किए जाने की अनुशंसा का निर्णय लिया गया था. इसी के बाद गांधी जयंती के अवसर पर सातों बंदियों को रिहा किया गया.




















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