वीडियो : बक्सर में बाहुबली का शाही जन्मदिन, केक काटकर मना जश्न; रेस के मैदान में भी है जलवा ..

इस दौरान बाहुबली के प्रति उनका लगाव भी देखने को मिला. अजय सिंह के लिए बाहुबली महज एक घोड़ा नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह है. अपनी खास बनावट और रफ्तार के कारण यह घोड़ा घुड़दौड़ के शौकीनों के बीच चर्चित है.




                           





  • परिवार के सदस्य की तरह पाला जाता है मशहूर घोड़ा बाहुबली, फैजाबाद से मुजफ्फरपुर और ब्रह्मपुर तक जीत चुका है कई खिताब
  • अजय सिंह के अस्तबल में आधा दर्जन घोड़े समेत कई पशु-पक्षी, नई पीढ़ी को पशुप्रेम और पुरानी परंपराओं से जोड़ने की पहल

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : अपनी शानदार कद-काठी, फुर्ती और रेस के मैदान में अपनी पहचान बनाने वाले घोड़े बाहुबली का जन्मदिन बक्सर में धूमधाम से मनाया गया. पशु प्रेमी अजय सिंह ने अपने चहेते घोड़े का केक काटकर जन्मदिन मनाया. इस दौरान बाहुबली के प्रति उनका लगाव भी देखने को मिला. अजय सिंह के लिए बाहुबली महज एक घोड़ा नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह है. अपनी खास बनावट और रफ्तार के कारण यह घोड़ा घुड़दौड़ के शौकीनों के बीच चर्चित है.

रेस के मैदान में बाहुबली का जलवा

बाहुबली की पहचान सिर्फ उसकी शानदार कद-काठी तक सीमित नहीं है. घुड़दौड़ प्रतियोगिताओं में भी उसने अपनी उपलब्धियों से अलग पहचान बनाई है. अंसारी पंचायत के मुखिया पिंटू सिंह के अनुसार, बाहुबली पिछले करीब छह वर्षों से उनके पास है. उन्होंने बताया कि यह घोड़ा कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर प्रथम पुरस्कार हासिल कर चुका है.

पिंटू सिंह के मुताबिक, बाहुबली फैजाबाद और मुजफ्फरपुर की प्रतियोगिताओं में जीत दर्ज करने के साथ बिहार की प्रतिष्ठित ब्रह्मपुर रेस का खिताब भी अपने नाम कर चुका है. स्थानीय स्तर पर ब्रह्मपुर रेस को घुड़दौड़ की दुनिया में बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है. यहां जीत हासिल करना घोड़े और उसके संचालक दोनों के लिए खास उपलब्धि मानी जाती है.

घोड़ों के साथ दूसरे पशु-पक्षियों से भी है लगाव

अजय सिंह का पशुप्रेम केवल बाहुबली तक सीमित नहीं है. उनके अस्तबल में करीब आधा दर्जन घोड़े हैं. इसके अलावा उनके पास बाज, कुत्ते और अच्छी नस्ल की गाय-भैंसें भी हैं. इन पशु-पक्षियों की देखभाल और उन्हें बेहतर माहौल देने पर विशेष ध्यान दिया जाता है.

अजय सिंह का मानना है कि बेजुबान जानवर भी प्यार, सम्मान और उचित देखभाल के हकदार हैं. यही वजह है कि वह पशुओं को केवल अपनी संपत्ति नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा मानते हैं. बाहुबली के जन्मदिन पर केक काटने का आयोजन भी इसी लगाव की एक झलक है.

रिजवान संभालते हैं बाहुबली की फिटनेस

बाहुबली की नियमित देखभाल, फिटनेस और घुड़सवारी की जिम्मेदारी रिजवान संभालते हैं. घोड़े को प्रतियोगिताओं के लिए तैयार रखने में उनकी अहम भूमिका है. रिजवान इससे पहले मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह के घोड़ों के घुड़सवार के रूप में भी चर्चा में रह चुके हैं.

नई पीढ़ी को पशुप्रेम से जोड़ने की जरूरत

पिंटू सिंह ने कहा कि आज की नई पीढ़ी धीरे-धीरे पारंपरिक गतिविधियों और पशुओं से दूर होती जा रही है. ऐसे समय में अजय सिंह जैसे पशुप्रेमियों की पहल पुरानी परंपराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण है. पशुओं के प्रति संवेदना और उनके साथ जुड़ाव समाज को बेहतर संदेश देता है.

बाहुबली का जन्मदिन समारोह केवल एक घोड़े के जन्मदिन का आयोजन नहीं, बल्कि इंसान और बेजुबान पशुओं के बीच लगाव की कहानी भी है. रेस के मैदान में अपनी पहचान बनाने वाला बाहुबली अपने मालिक के लिए जितना खास है, उतना ही अपने शौक और उपलब्धियों के कारण घुड़दौड़ प्रेमियों के बीच भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

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