कारागार से गोकुल तक गूंजी किलकारी, किला मैदान में ‘जय श्रीराम’ से गूंजा रामलीला मंच ..

देवकी-वसुदेव विवाह और उसके बाद हुई आकाशवाणी का प्रसंग दिखाया गया. आकाशवाणी में कंस को बताया गया कि देवकी की आठवीं संतान उसके अत्याचार का अंत करेगी. 




                           



  • श्रीकृष्ण जन्म की लीला ने बांधा समां, रात में रावण के अत्याचारों ने दिखाया अधर्म का चेहरा
  • मनु-सतरूपा की तपस्या से लेकर रावण के अहंकार तक का मंचन, देर रात तक उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : ऐतिहासिक किला मैदान में चल रहे 20 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को रामलीला मंच भक्ति और धर्म की कथाओं से जीवंत हो उठा. दिन में जहां श्रीकृष्ण जन्म की लीला ने श्रद्धालुओं को भावविभोर किया, वहीं रात में मनु-सतरूपा की तपस्या से लेकर रावण के जन्म, वरदान और अत्याचारों का प्रभावशाली मंचन हुआ. वृंदावन से आए श्री बालकृष्ण रासलीला रामलीला मंडल के कलाकारों ने स्वामी श्री मोहन श्याम भारद्वाज के निर्देशन में दोनों प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया.

‘नंद के घर आनंद भयो’ से गूंज उठा किला मैदान

दिन के कार्यक्रम में देवकी-वसुदेव विवाह और उसके बाद हुई आकाशवाणी का प्रसंग दिखाया गया. आकाशवाणी में कंस को बताया गया कि देवकी की आठवीं संतान उसके अत्याचार का अंत करेगी. इसके बाद कंस द्वारा देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद करने का दृश्य प्रस्तुत किया गया.

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी की अर्धरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का दृश्य आते ही माहौल भक्तिमय हो गया. भगवान के निर्देश पर वसुदेव श्रीकृष्ण को लेकर गोकुल पहुंचे और यशोदा के पास जन्मी कन्या को लेकर मथुरा लौटे. कंस द्वारा कन्या को मारने का प्रयास किए जाने पर उसके योगमाया के रूप में प्रकट होने और कंस को यह चेतावनी देने का प्रसंग भी मंचित किया गया कि उसका संहार करने वाला जन्म ले चुका है.

श्रीकृष्ण जन्म होते ही रामलीला परिसर में ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष गूंजने लगे.

रावण के जन्म से अत्याचार तक दिखी अधर्म की कहानी

रात के मंचन में स्वायंभुव मनु और महारानी सतरूपा की कठोर तपस्या तथा भगवान श्रीहरि के दर्शन का प्रसंग प्रस्तुत किया गया. दोनों द्वारा भगवान को पुत्र रूप में प्राप्त करने की इच्छा और मिले वरदान के बाद कथा रावण के जन्म की ओर बढ़ी.

रावण की कठोर तपस्या, वरदान प्राप्त करने के बाद बढ़ा अहंकार और उसके द्वारा देवताओं, ऋषि-मुनियों तथा प्रजा पर किए गए अत्याचारों को प्रभावशाली ढंग से मंचित किया गया. कुंभकर्ण और विभीषण की तपस्या तथा वरदान के प्रसंग ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा.

रावण के अत्याचारों से परेशान देवताओं और ऋषि-मुनियों द्वारा भगवान श्रीहरि से धर्म की रक्षा तथा अधर्म के विनाश की प्रार्थना के साथ भगवान श्रीराम के अवतार की पृष्ठभूमि तैयार होने का प्रसंग दिखाया गया. देर रात तक चले मंचन के दौरान ‘जय कन्हैया लाल की’ और ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से पूरा किला मैदान गूंजता रहा.

कार्यक्रम में रामलीला समिति के सचिव बैकुंठनाथ शर्मा, संयुक्त सचिव हरिशंकर गुप्ता, मंच प्रभारी उदय सर्राफ उर्फ जोखन, लाइसेंसदार कृष्णा वर्मा सहित समिति के अन्य सदस्य और पदाधिकारी मौजूद रहे.


















Post a Comment

0 Comments