कहा कि प्रतिमाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रंगों और अन्य रासायनिक पदार्थों से जल प्रदूषित होने की आशंका रहती है. ऐसे में पोखर के पानी की जांच कराए बिना उसकी गुणवत्ता को लेकर निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता.
- डुमरांव में छठ व्रती कैसे देंगे अर्घ्य? प्रदीप शरण ने पूछा- आखिर पदाधिकारियों ने पोखर में प्रतिमा विसर्जन की अनुमति कैसे दी?
- जिस पोखर में देना है अर्घ्य, उसी के पानी पर सवाल
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : दुर्गा पूजा के बाद अब डुमरांव के छठिया पोखर के पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता गहराने लगी है. सामाजिक मंच के संयोजक और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के डुमरांव विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी प्रदीप कुमार शरण ने आशंका जताई है कि प्रतिमा विसर्जन के कारण पोखर के पानी में विषाक्त केमिकल घुल गए हैं, जिससे छठ महापर्व के दौरान व्रतियों को परेशानी हो सकती है. उन्होंने डीएम को पत्र लिखकर पोखर के पानी की जांच कराने की मांग की है. साथ ही सवाल उठाया है कि आखिर संबंधित पदाधिकारियों ने छठिया पोखर में प्रतिमाओं का विसर्जन कैसे कराया, जबकि इसी जलाशय में छठ व्रती भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं.
छठ महापर्व में स्वच्छता और शुद्धता का विशेष महत्व है. व्रती घंटों पानी में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं. ऐसे में छठिया पोखर के पानी में विषाक्त रसायन घुलने की आशंका ने श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है. प्रदीप कुमार शरण ने कहा कि प्रतिमाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रंगों और अन्य रासायनिक पदार्थों से जल प्रदूषित होने की आशंका रहती है. ऐसे में पोखर के पानी की जांच कराए बिना उसकी गुणवत्ता को लेकर निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता.
उन्होंने सवाल उठाया कि जब छठिया पोखर में छठ पूजा होनी है, तो फिर इसी जलाशय में दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन कराने का निर्णय किस आधार पर लिया गया. संबंधित पदाधिकारियों ने संभावित दुष्प्रभावों पर ध्यान क्यों नहीं दिया? उन्होंने प्रशासन से इस मामले में जवाबदेही तय करने की भी मांग की.
कृत्रिम पोखर नहीं बनाने पर भी उठाए सवाल
प्रदीप कुमार शरण ने प्रतिमा विसर्जन के लिए कृत्रिम पोखर की व्यवस्था नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए. उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण के नियमों और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के पालन से जुड़ा मामला बताया. उनका कहना है कि प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए विसर्जन की उचित व्यवस्था होनी चाहिए.
उन्होंने पोखर के दूषित पानी से चर्म रोगों के मरीजों की संख्या बढ़ने की आशंका जताते हुए जल की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है. हालांकि, पानी में विषाक्त रसायनों की मौजूदगी और चर्म रोगों से उसके संबंध की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
छठ महापर्व को देखते हुए अब प्रशासन के सामने पोखर के पानी की जांच कराने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है. जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकेगा कि छठ पूजा के दौरान पोखर के पानी का इस्तेमाल कितना सुरक्षित है.






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