कहा कि आजादी-पूर्व से निरंतर आयोजित हो रही रामलीला बक्सर की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है. इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है.

- वेदमंत्रों की गूंज और जयकारों के बीच हुआ शुभारंभ, शिक्षामंत्री मिथिलेश तिवारी समेत कई गणमान्य हुए शामिल
- पहले दिन ‘नारद मोह लीला’ ने बांधा समां, अहंकार छोड़ विनम्रता और भक्ति का दिया संदेश
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : किला मैदान में रविवार की देर शाम रामलीला के रंग में बक्सर डूब गया. श्री रामलीला समिति, बक्सर के तत्वावधान में आजादी से पहले से चली आ रही पारंपरिक रामलीला के 20 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव का वैदिक मंत्रोच्चार और मंगलाचरण के बीच भव्य शुभारंभ हुआ. विशाल रामलीला मंच पर पूजा-अर्चना के बाद वृंदावन से आए कलाकारों ने ‘नारद मोह लीला’ का मंचन किया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक जुटे.
महोत्सव का उद्घाटन लक्ष्मी नारायण मंदिर के पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य महंत श्री राजगोपालाचार्य ‘त्यागी जी’ महाराज ने विधिवत पूजा-अर्चना और आशीर्वचन के साथ किया. पूजन कार्य पंडित छविनाथ त्रिपाठी, संजय शास्त्री और मनोज मिश्रा सहित विद्वानों ने कराया. समिति अध्यक्ष रमेश गोयल यजमान रहे, जबकि विभिन्न मंदिरों से आए वेदपाठी ब्रह्मचारियों ने वैदिक अनुष्ठान में सहयोग किया.
पीढ़ियां बदलीं, रामलीला की परंपरा कायम
बक्सर की यह रामलीला धार्मिक आयोजन के साथ शहर की पुरानी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है. आजादी से पहले से चली आ रही इस परंपरा ने समय के साथ कई बदलाव देखे, लेकिन किला मैदान का रामलीला मंच आज भी इस विरासत को आगे बढ़ा रहा है.
मुख्य अतिथि बिहार सरकार के शिक्षामंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि आजादी-पूर्व से निरंतर आयोजित हो रही रामलीला बक्सर की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है. इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्श, मर्यादा, त्याग, सत्य और धर्म का संदेश रामलीला के माध्यम से जन-जन तक पहुंचता है.
महंत श्री राजगोपालाचार्य ‘त्यागी जी’ महाराज ने कहा कि बक्सर की पावन धरती भगवान श्रीराम की स्मृतियों से जुड़ी है. यहां की रामलीला और कृष्णलीला सनातन संस्कृति, भक्ति और संस्कारों की जीवंत परंपराएं हैं. इनका उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को सद्मार्ग की ओर प्रेरित करना है.
‘नारद मोह’ में दिखा अहंकार से आत्मबोध तक का सफर
पहले दिन वृंदावन से पहुंचे श्री बालकृष्ण रासलीला रामलीला मंडल के स्वामी एवं निर्देशक स्वामी मोहन श्याम भारद्वाज के निर्देशन में गणेश पूजन, श्रीराम-जानकी पूजन और आरती के बाद ‘नारद मोह लीला’ का भावपूर्ण मंचन हुआ.
लीला में देवर्षि नारद की तपस्या और भक्ति से उत्पन्न अहंकार तथा भगवान विष्णु की लीला के माध्यम से उनके मोहभंग और आत्मबोध को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया. मंचन के दौरान पूरा पंडाल धार्मिक जयकारों से गूंज उठा. लीला ने दर्शकों को अहंकार त्याग, विनम्रता और भक्ति का संदेश दिया.
कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष रमेश गोयल ने की. संचालन कोषाध्यक्ष सह प्रवक्ता सुरेश संगम ने, स्वागत भाषण सचिव बैकुंठनाथ शर्मा ने तथा धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त सचिव सह मीडिया प्रभारी हरिशंकर गुप्ता ने किया.
समारोह में विधान पार्षद जीवन कुमार, नगर परिषद की मुख्य पार्षद कमरून निशा, भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश भुवन, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राणा प्रताप सिंह, दिनेश जायसवाल, डॉ. श्रवण तिवारी, भाजपा नेता रंजन तिवारी, ब्रजकिशोर सिंह सहित समिति के पदाधिकारी व सदस्य, समाजसेवी, साहित्यकार, व्यवसायी और राजनीतिक-सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे.




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